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    अंगूर के लाभ

    अंगूर के लाभ
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    अंगूर एक ऐसा फल है जो विश्व के लगभग सभी क्षेत्रों में दिखायी पड़ता है और बहुत से लोग इसे अत्याधिक पसन्द करते हैं। अंगूर बेल में फलता है। तथा मांसल और पौष्टिता से भरा होता है। इस का ७९ प्रतिशत भाग पानी होता है तथा इसमें विभिन्न प्रकार की शर्करा, लवण और लाभदायक तत्व होते हैं। इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम कहते हैं कि चार फल, स्वर्ग के फलों में से हैं, अंगूर, ताज़ा खजूर ,अनार और सेब। हालिया वर्षों में अमरीका में वेस्कान्सिन विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ताओं में लाल अंगूर में एक एसे रसायन का पता लगाया है जो ह्रदय के लिए अत्याधिक लाभदायक होता है। रिस्वेराट्रोल (Resveratrol) नामक यह पदार्थ ह्रदय को वृद्धावस्था के प्रभावों से सुरक्षित रखता है। लाल अंगूर में पाया जाने वाला यह पदार्थ वास्तव में कम कैलरी वाला आहार है जो लंबी आयु और वृद्धावस्था में विंलब का कारण बनता है। अंगूर में ए बी सी जैसे विटामिन और पोटाशियम, (magnesium) मैगनेशियम , आयरन, और फास्फोरस जैसे तत्व पाए जाते हैं। अंगूर का शर्करा बड़ी सरलता से और बिना किसी परिवर्तन के रक्त में मिल जाता है और अत्याधिक लाभदायक होता है। क़ुरआने मजीद की ११ आयतों में अंगूर का उल्लेख किया गया है। ईश्वर ने स्वर्ग के इस फल के गुणों का वर्णन करते हुए भले लोगों के लिए इसे अजीविका बताया है। सूरए नबा की आयत नंबर ३१ और ३२ में कहा गया हैः निश्चित रूप से भले लोगों के लिए कल्याण और महासफलता है, हरे भरे बाग, और विभिन्न प्रकार के अंगूर। पैग़म्बरे इस्लाम और उनके घराने के इमामों में आहार और स्वास्थ्य के बारे में बहुत से मूल्यवान तथ्य बताए हैं और लोगों को विशेष प्रकार के फल और आहार में रूचि दिलायी है। उदाहरण स्वरूप इमाम अली अलैहिस्सलाम अंगूर के बारे में कहते हैं कि अंगूर फल भी है और आहार भी और हलवे की भांति मीठा और स्वादिष्ट है। इस कथन में उन्होंने अंगूर को केवल एक लाभदायक फल नहीं बल्कि इसे एक सम्मपूर्ण आहार की संज्ञा दी है। वर्तमान काल में भी आहार विशेषज्ञ, अंगूर खजूर बल्कि किशमिश को एक सम्मपूर्ण आहार बताते हैं जिससे शरीर के लिए आवश्यक तत्वों की पूर्ति होती है इस आधार पर मनुष्य थोड़े से अंगूर या किशमिश खाकर, शारीरिक व वैचारिक गतिविधियों के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा जुटा सकता है।

    इस फल के अनगिनत लाभ हैं जिनमें से कुछ का हम यहां पर वर्णन कर रहे हैं। अवसाद दूर करने के लिए अंगूर में असाधारण प्रभाव होता है। यह फल, दुख व चिंता तथा तनाव दूर करने में अत्याधिक प्रभावशाली होता है। इस्लामी कथनों में कहा गया है कि हज़रत नूह के तूफान की घटना के बाद, जब पानी उतर गया और मरे हुए लोगों के ढांच हर ओर बिखरे नज़र आने लगे तो हज़रत नूह अत्याधिक दुखी हो गये। ईश्वर ने उन्हें संदेश भेजा कि वह काला अंगूर खांए ताकि उनका दुख व चिंता दूर हो जाए। वर्तमान काल में अध्ययनकर्ता और विशेषज्ञ अवसाद दूर करने में अंगूर के प्रभाव का पता लगाने में सफल हो गये हैं। उनका मानना है कि अंगूर में पोटाशियम के कारण एसा होता है। पोटाशियम, प्रफुल्लता प्रदान करता है और हृदय गति को नियंत्रित करने में प्रभावी होता है। डाक्टरों के अनुसार ह्रदय गति में गड़बड़ी, अवसाद का कारण बनती है। इस लिए हृदय गति की गड़बड़ी दूर करके, अवसाद की समस्या को कम किया जा सकता है। प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और हकीम अबू अली सीना ने भी अंगूर को अमाशय और आंतों के दर्द में अत्याधिक प्रभावशाली बताया है। यह फल, शरीर के विषैले पदार्थों के बाहर निकालता है और रक्त को साफ करता है तथा रक्त वर्धक होने के कारण सुस्ती दूर करता है। आहार विशेषज्ञ, अंगूर को बदहज़्मी, उच्च रक्तचाप, और चर्म रोगों में अत्याधिक लाभदायक मानते हैं। यहां पर आप के लिए यह जानना भी रोचक होगा कि अंगूर के रस से चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने वाले लेप भी बनाए जा सकते हैं क्योंकि अंगूर का रस चेहरे के दाग धब्बों और झुर्रियों को दूर करता है और उसे ताज़गी प्रदान करता है।

    अंगूर से विभिन्न प्रकार की अन्य वस्तुएं भी बनायी जाती हैं जैसे किशमिश, अंगूर का शीरा, अंगूर के बीज का तेल, सिर्का तथा अन्य बहुत सी वस्तुएं। किशमिश जो वास्तव में सूखा अंगूर होती है लगभग साठ प्रतिशत शर्करा से संपन्न होती है। इसी प्रकार उसमें भारी मात्रा में एन्टी आक्सीडेन्ट (antioxidant) पाया जाता है और इस संदर्भ में वह आड़ू जैसे फलों की भांति है। यह पर रोचक तथ्य यह भी है कि अंगूर को जितनी अधिक अवधि में सुखाया जाएगा उसकी पौष्टिकता में उतनी ही वृद्धि होगी और प्रकृतिक रूप से सूखायी गयी किशमिश की पौष्टिकता उद्योगिक रूप से तैयार की गयी किशमिश से अधिक होती है। किशमिश के बहुत से लाभ हैं किशमिश अंगूर से अधिक ऊर्जावर्धक होती है और सांस, फेफड़े तथा गुर्दे , मूत्राशल तथा यकृत के रोगों में असाधारण रूप से लाभदायक होती ह। इस्लामी कथनों में एक प्रकार की किशमिश के लिए अत्याधिक लाभों का वर्णन किया गया है। इस प्रकार की किशमिश को मुनक्क़ा कहा जाता है जो काले और लाल अंगूर को सुखा कर बनायी जाती है। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम का कहना है कि मुनक़्का खाने में लापरवाही न करो क्योंकि यह शरीर को स्वस्थ्य बनाता है। मुनक़्क़ा मनुष्य को हंसमुख बनाता है, स्नायु तंत्र को शक्ति प्रदान करता है और कमज़ोरी को दूर करता है। इस्लामी कथनों के अनुसार सुबह सुबह कुछ खाने से पूर्व २१ मुनक्का खाने से भूलने की बीमारी दूर होती है। नये अनुसंधानों से पता चलता है कि मुनक़्क़ा खाने से अल्ज़ायमर का रोग दूर होता है। ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाली केमिकल एंड इंडस्ट्री पत्रिका के अनुसार मुनक़्क़ा में मौजूद पदार्थ अल्ज़ायमर के प्रभावों से सुरक्षा में अत्यन्त प्रभावी है। और अध्ययनों से पता चलता है कि मुनक्क़ा में एन्टोसियानिन और पालीफोनोलिक प्रकार के पदार्थ होते हैं जो अल्ज़ायमर के रोगियों के उपचार में प्रभावी होते हैं और इसमें ओमेगा तीन के वसायुक्त एसिड, ओमेगा ६ और विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है। ईरानी डाक्टरों की साइट के अनुसार मुनक़्क़ा कैंसर निरोधक है बल्कि कैंसर की बहुत सी क़िस्मों में और ह्रदय रोगों के उपचार के लिए भी प्रयोग होता है। मुनक्क़ा रगों को नर्म करने में भी प्रभावी होता है।

    अंगूर से सिरका भी बनाया जाता है यद्यपि सिरका अन्य कई प्रकार के रसों से भी बनता है। सिरका विश्व के लगभग सभी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार से प्रयोग किया जाता है। भोजन के साथ सिरका खाने से रक्त पतला होता है। इसी प्रकार सिरका, चर्बी कम करने और शरीर से विषैले पदार्थ निकालने की प्रक्रिया में सहायक होता है तथा इससे रक्त से वसा और हानिकारक कोलिस्ट्रोल कम होता है। इस्लामी कथनों में भी कहा गया है कि सिरका बुद्धि में तीव्रता का कारण बनता है और ह्रदय के लिए लाभदायक होता है। सिरके में मौजूद सेट्रिक एसिड आहार में मौजूद कैल्शियम को शरीर का अंश बनाता है और शरीर की भीतरी क्रियाओं के लिए अत्याधिक लाभदायक होता है। सिरका, पाचनक्रिया के लिए हानिकारिक बैक्र्टिरिया का नाश करता है। इस आधार पर जिन लोगों को पाचनतंत्र में समस्याओं का सामना है और क़ब्ज़ तथा दस्त अथवा पेट दर्द में ग्रस्त हैं वह सिरका की सहायता से इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। सिरके का एक अन्य लाभ यह है कि वह अमाशय की एसिड के स्राव को संतुलित करता है और दांतों की गंदगी दूर करने और मसूड़े की सूजन में लाभदायक है। यहां पर यह उल्लेख कर देना भी आवश्यक है कि डाक्टर, कमज़ोर स्नायुतंत्र, गठिया और अल्सर के रोगियों के लिए सिरके को हानिकारक बताते हैं। अंगूर से एक अन्य वस्तु भी बनायी जाती है जिसका प्रयोग इस्लाम ने हराम बताया है। अंगूर से शराब बनती है जो शारीरिक रूप से विभिन्न रोगों में ग्रस्त करने के अलावा वैचारिक व मानसिक समस्याओं का भी कारण बनती है। इस्लाम की दृष्टि में शराबी में अनैतिकता व अपराध की भावना प्रबल होती है इसी लिए उसे इस्लाम में वर्जित किया गया है।

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