islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. अदभुत वास्तुकला का नमूना मासूले नगर

    अदभुत वास्तुकला का नमूना मासूले नगर

    Rate this post

    गीलान प्रांत के केन्द्र रश्त से 55 किलोमीटर की दूरी पर फ़ूमन नगर से गुज़रने और 35 किलोमीटर घने जंगलों, धान के खेतों व प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ी क्षेत्रों को तय करने के बाद मासूले नामक स्थान पर पहुचते हैं जो अपनी पारंपरिक वास्तुकला का अद्भुत दृष्य प्रस्तुत करता है।

    गीलान प्रांत की हरी प्रकृति की ताज़गी और सौंदर्य मासूले गांव के दर्शन के बिना अधूरी समझी जाती है और हर वर्ष देश विदेश के हज़ारों पर्यटक कुछ समय के लिए इस क्षेत्र में कैंप लगाते हैं ताकि भाग-दौड़ भरे शहरी जीवन की थकान दूर करें।

    इस सुंदर गांव का इतिहास आठवीं हिजरी क़मरी से मिलता है। 16 हेक्टर पर पुराने व पुरातन महत्व के घरों के साथ हरे-भरे पहाड़ के अस्तित्व ने क्षेत्र को ऐसा सुंदर बना दिया है कि हर पर्यटक के लिए इसकी यात्रा यादगार बन जाती है।

    मासूले कैस्पियन सागर के आर्द्र क्षेत्र के अंतिम छोर पर एक नदी की घाटी में स्थित है कि इस नदी का उद्गम 3050 मीटर ऊंची मासूले दाग़ नामक चोटी के निकट है। खुले समुद्र की सतह से मासूले 1050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इस पहाड़ी गांव के सबसे ऊंचे और सबसे नीचे क्षेत्र के बीच 120 मीटर का अंतर है। पहाड़ की ढलुवा गिरीपीठ पर बने घर मासूले की वास्तुकला का अद्भुत दृष्य पेश करते हैं। मासूले में घर इस प्रकार बने हैं कि अधिकांश घरों की छतें आम रास्ते हैं जिनसे होकर लोग गुज़रते हैं। दूसरे शब्दों में जब किसी गली से गुज़रना होता है तो वास्तव में कई घरों की छत से गुज़रना पड़ता है। यह रास्ते पत्थर के ज़ीनों से जुड़े हुए हैं जिससे पूरा गांव अखंड व सुदंर दिखाई देता है। अधिकांश घर दो मंज़िला हैं और एक मंज़िला या तीन मंज़िला घर बहुत कम ही दिखाई देते हैं।

    मासूले में एक संपूर्ण घर में बरामदे, भंडार कक्ष, पहले और दूसरे मंज़िले को जोड़ने वाले ऊंचे ज़ीने, और दालान होती है। दालान को स्थानीय भाषा में चेग़्म कहते हैं जो अपेक्षाकृत विशाल होता है और इसमें प्रायः मेहमान का सत्कार करते हैं। इसके अतिरिक्त छोटे कमरे में घरवाले रहते हैं। एक और कमरा होता है जिसे सूमे कहते हैं जिसमें घरवाले शीत ऋतु में रहते हैं। हाल छोटा होता है जिससे घर वाले गांव के सुदंर दृष्य का नज़ारा करते हैं जबकि छोटे क्षेत्रफल के भी घर होते हैं जो सादे होते हैं।

    मासूले के स्थानीय लोग ईंट, पत्थर, लकड़ी की धरन और फ़र्न नामक जंगली पौधे से अपने घर बनाते थे। फ़र्न पौधा मासूले और इसके आस-पास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में ख़ुद ब ख़ुद उगता है और यह जलरोधक होता है। मासूले के अधिकांश लोग वर्ष में एक बार अपने घर की पीले रंग की मिट्टी और उसकी छत की बैगनी रंग की मिट्टी से पुताई करते हैं। यह पदार्थ मासूले रूदख़ान नामक नदी के तट पर होता है।

    यद्यपि मासूले समुद्र के निकट है किन्तु ऊंचे व पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। इसलिए इसकी जलवायु पहाड़ी क्षेत्र की मृद और समुद्र तट की आर्द्र जलवायु का संगम है और पर्यटकों को मनमोहक जलवायु के कारण अपनी ओर खींचती है।

    मासूले के मुहल्लों के नाम ख़ाने बर, कशे सर, असद महल्ले, मस्जिद बर और रीहाने बर हैं। मासूले का बाज़ार चार मंज़िला इमारत पर आधारित है और हर मोहल्ला सीधे रूप में बाज़ार से जुड़ा हुआ है। बाज़ार में लोहार, चाक़ू निर्माण, नानवाई, बनिये, बिनी हुयी छोटी गुड़ियों, और हाथ के बिने रंग-बिरंगे मोज़ों सहित स्थानीय हस्तकला के अन्य उद्योग की दुकाने हैं। मासूले में जगह जगह पर पारंपरिक चायख़ाने हैं जहां पर्यटक चाय और स्वादिष्ट रोटियों का मज़ा लेते हैं। इस गांव में तालिश, तुर्क और गीलक संस्कृति का संगम एक ओर और दूसरी ओर जंगली, चारागाही और पहाड़ी प्रकृति का संगम दिखाई देता है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि इस इलाक़े के लोगों ने अपने पूरे इतिहास में प्रकृति से समन्वित जीवन बिताते हुए, असाधारण वास्तुकला से सुशोभित इस बस्ती का निर्माण किया है। वास्तव में इस क्षेत्र में एक प्रकार की आदर्श जीवन शैली अस्तित्व में आयी जो अपने आप में अद्वितीय व अनुपम है। इसलिए मासूले को वर्ष 1976 में ईरान के राष्ट्रीय धरोहर की सूचि में पंजीकृत किया गया।

    मासूले के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन शब्दों में करना बहुत कठिन है। मासूले में चार सुंदर व स्वच्छ झरने हैं जिनके नाम आबशारे मासूले, ख़रयू मासूले, पर्दे सर मासूले और ख़लदश्त रूदबार मासूले हैं। पहाड़ों से बल खाते हुए निकलने वाली मासूले रूदख़ान नदी ने मासूले के सौंदर्य में चार चांद लगा दिए हैं। यह नदी का उद्गम मासूले के आस पास के पहाड़ हैं और यह नदी कैस्पियन सागर में गिरती है। मासूले की प्रसिद्ध चोटियां हर वर्ष पर्वतारोहियों से भरी रहती हैं। मासूले की महत्वपूर्ण चोटियां शाह मोअल्लिम, आसमानकूह, लासे सर, तरोशोम, और क़न्द कल्ले उल्लेखनीय हैं।

    प्रसिद्ध शाह मोअल्लिम चोटी 3100 मीटर ऊंची है। यह चोटी मासूले के पश्चिम में स्थित है। क़न्द कल्ले नामक पहाड़ 1500 मीटर ऊंचा है जो मासूले के सामने स्थित है। इसी प्रकार मासूले में दार सर, लश्करगाह और ख़लील दश्त नामक ठंडे इलाक़े भी हैं।

    मासूले से 20 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र की सतह से 2500 मीटर की ऊंचाई पर तालिश पर्वत श्रंख्ला के एक पहाड़ में बहुत ही सुदंर बर्फ़ीली गुफा है। इस गुफा में तीन प्रवेश मार्ग हैं जिसमें से एक गुफा की छत से है। मासूले के निकट बर्फ़ीली गुफा में अनेक सुरंगे, पानी के हौज़ और विशाल बर्फ़ीली क़िन्दीले और गलियारे हैं जो प्राकृतिक रूप से अस्तित्व में आये हैं। इस गुफा की एक और विशेषता यह है कि शीत ऋतु में इस गुफ़ा से गर्म पानी और ग्रीष्म ऋतु में ठंडा पानी निकलता है। इसी प्रकार इस गुफा में ग्रीष्म ऋतु में बर्फ़ के भीमकाय टुकड़े बन जाते हैं और पानी भी जम जाता है।

    ग्रीष्म ऋतु में स्थानीय लोग इस गुफा के पानी से सर्नबर्न का उपचार करते हैं। इस गुफा के आस पास उपचारिक विशेषताओं से समृद्ध कई खनिज सोते हैं।

    इस बात का उल्लेख भी आवश्यक है कि मासूले के पर्यटन की दृष्टि से विकास की योजना के कारण, देश की नई सीमांकन के आधार पर यह गांव नगर में परिवर्तित होगा। इसके साथ ही मासूले के अधिकांश भाग की ग्रामीण संरचना के दृष्टिगत इसे गांव-शहर कहना भी ठीक रहेगा।