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    अमर ज्योति-11

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    क़ुरआने मजीद ईश्वर का कथन तथा उसकी महानता का प्रतिबिंबन है जो वास्तविकता की खोज में रहने वाली बुद्धियों और सच्चे विचारों को सोच-विचार एवं चिंतन मनन का निमंत्रण देता है। सूरए साद की आयत नंबर उनतीस में कहा गया है कि (हे पैग़म्बर!) क़ुरआन वह किताब है जिसे हमने आप पर उतारा है ताकि लोग इसकी आयतों पर विचार करें और बुद्घि वाले लोग इसके माध्यम से सत्य को समझ जाएं।प्रकृति और संसार के सीने में छिपे हुए रहस्यों की ओर संकेत, क़ुरआने मजीद के चमत्कार होने का एक अन्य आयाम है। इस ईश्वरीय किताब ने अनेक आयतों में सृष्टि, प्रकृति व अंतरिक्ष से संबंधित बातों के बारे में आश्चर्यजनक एवं सटीक तथ्य प्रस्तुत किए हैं। क़ुरआन ने ऐसे काल में सृष्टि के रहस्यों से पर्दा उठाया जब उस काल का मानव इस प्रकार की बातों के बारे में कोई ज्ञान नहीं रखता था। उस काल में यूनान व कुछ अन्य देशों के बहुत कम विद्वान, प्रकृति की कुछ बातों के बारे में अत्यंत सीमित ज्ञान रखते थे किंतु अरब के लोग तो इस प्रकार के ज्ञान से कोसों दूर थे। पांचवीं शताब्दी हिजरी क़मरी के प्रख्यात मुस्लिम दार्शनिक एवं विद्वान इमाम मुहम्मद ग़ज़्ज़ाली ने क़ुरआने मजीद के वैज्ञानिक चमत्कारों के बारे में एक महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी है। वे कहते हैं कि चूंकि ईश्वर की पहचान प्रायः सृष्टि के तथ्यों व रहस्यों को खोजने तथा उन्हें देखने से प्राप्त होती है अतः क़ुरआने मजीद ने सभी स्थानों पर सृष्टि के अत्यंत गूढ़ व सटीक मामलों को चमत्कारिक ढंग से प्रस्तुत किया है। क़ुरआने मजीद के संबंध में किताब लिखने वाले एक अन्य अध्ययनकर्ता नियाज़मंद शीराज़ी ने भी शरीर विज्ञान, भौतिकशास्त्र, खगोलशास्त्र तथा इतिहास जैसे चार क्षेत्रों में क़ुरआने मजीद के 64 वैज्ञानिक चमत्कारों को ठोस तर्कों के साथ बयान किया है।इस समय भी क़ुरआन के बारे में अध्ययन करने वाले अधिकांश न्यायप्रेमी विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि क़ुरआने मजीद में जिन ज्ञानों का उल्लेख किया गया है वे मनुष्य द्वारा खोजे गए नए तथ्यों के अनुकूल हैं और कोई भी उनका इन्कार नहीं कर सकता। कार्यक्रम के इस भाग में हम सृष्टि की रचना के बारे में क़ुरआने मजीद में प्रस्तुत की गई कुछ बातों की ओर संकेत कर रहे हैं। केनेडा के रहने वाले और विश्वविद्यालय के एकेडमिक बोर्ड के सदस्य डाक्टर गैरी मिलर ने, जो एक समय ईसाइयत के कट्टर प्रचारकों में से एक माने जाते थे, क़ुरआने मजीद का अध्ययन किया ताकि अपने विचार में, उसकी त्रुटियों को खोज कर उसके ग़लत होने को सिद्ध कर दें किंतु वे इस ईश्वरीय पुस्तक के ज्ञान के समुद्र में जितना अंदर तक जाते गए उतना ही उनके आश्चर्य में वृद्धि होती गई, यहां तक कि अंततः उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया और क़ुरआन पर ईमान ले आए। संसार की रचना के समय होने वाले महा विस्फोट या बिग बैंग के बारे में जिस आयत में संकेत किया गया है वह विशेष रूप से उनके दृष्टिगत रही। सूरए अंबिया की तीसवीं आयत में कहा गया है कि क्या ईश्वर का इन्कार करने वालों ने नहीं देखा कि आकाश और धरती एक दूसरे से जुड़े हुए थे और हमने उन्हें एक दूसरे से अलग किया और पानी के माध्यम से हर वस्तु को जीवित रखा। डाक्टर मिलर कहते हैं कि इस आयत का अध्ययन करने के बाद मैं उन अतिवादी गुटों के उन दावों पर विश्वास नहीं कर सकता था कि क़ुरआन, मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम) के विचारों का परिणाम है। किस प्रकार संभव है कि पैग़म्बरे इस्लाम चौदह सौ वर्ष पूर्व इस गैस और तत्व के बारे में बात करें जिनसे मिल कर यह धरती बनी है जबकि उन्होंने किसी व्यक्ति से शिक्षा भी ग्रहण नहीं की थी। ईश्वर हर त्रुटि से पवित्र है। यह वही वैज्ञानिक विषय है जिसका विचार प्रस्तुत करने वाले को वर्ष 1973 में नोबल पुरस्कार दिया गया था। मिलर के अनुसार यह आयत, महा विस्फोट के उस दृष्टिकोण की ओर संकेत करती है जो धरती, आकाश और सितारों के अस्तित्व में आने का कारण बना है। इस आयत के अंतिम भाग में क़ुरआने मजीद ने पानी को जीवन का स्रोत बताया है और यह बात सृष्टि की अत्यंत विचित्र बातों में से एक है। नवीन विज्ञान ने सिद्ध किया है कि जिवित कोशिका, साइटोप्लाज़्म या कोशिकाद्र्व्य से बनती है और साइटोप्लाज़्म का बड़ा भाग पानी से बना होता है। इस प्रकार की आयतें क़ुरआने मजीद की सत्यता और उसके वैज्ञानिक चमत्कार की पुष्टि करती हैं।पिछले कार्यक्रमों में हमने फ़्रान्सीसी विद्वान प्रोफ़ेसर मॉरिस ब्यूकेल के बारे में बात की थी। उन्होंने अपनी किताब इंजील, क़ुरआन व विज्ञान में नवीन विज्ञान व क़ुरआने मजीद के बीच सामंजस्य पर प्रकाश डाला है। वे कहते हैं कि क़ुरआन ने अपने विभिन्न सूरों में सृष्टि के आरंभ के बारे संकेत किए हैं और जो कुछ उसने कहा है वह वैज्ञानिक दृष्टि से सही व स्वीकार्य है। जब हम देखते हैं कि सृष्टि के आरंभ की घटना का क़ुरआन में उल्लेख हुआ है और हम यह भी देखते हैं कि यह प्रक्रिया आकाशों और धरती के बारे में नवीन विज्ञानों से पूरी तरह समन्वित है तो हम इस ईश्वरीय किताब की सत्यता को समझ जाते हैं। ब्यूकेल कहते हैं कि क़ुरआनेम मजीद ने दो आयतों में संक्षेप में उन तत्वों का उल्लेख किया है जिनके कारण धरती अस्तित्व में आई। एक सूरए अंबिया की तीसवीं आयत है जिसमें सृष्टि में महा विस्फोट की ओर संकेत किया गया है। दूसरी, सूरए फ़ुस्सेलत की ग्यारहवीं आयत है जो नक्षत्र में गैस के भंडारों के अस्तित्व की पुष्टि करती है। इस आयत में कहा गया है कि फिर ईश्वर ने आकाश की सृष्टि की जबकि वह धुएं के रूप में था। उसने उसे अर्थात आकाश और धरती को आदेश दिया कि अस्तित्व में आ जाओ। इसके बाद ब्यूकेल कहते हैं कि नवीन विज्ञान इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता कि उस महान अंतरिक्ष में, जिसने आकाश गंगाओं को घेर रखा था, आरंभ में क्या चीज़ थी। नवीन विज्ञान जिस चीज़ के बारे में अपना विचार प्रस्तुत कर सकता है वह यह है कि विश्व गैस से बना है जिसका मूल तत्व हाइड्रोजन और बाक़ी हीलियम था। उसके बाद गैस का यह बड़ा गोला विभिन्न आकारों के अनेक टुकड़ों में बंट गया। ब्यूकेल क़ुरआने मजीद की महानता के समक्ष नतमस्तक होते हुए सूरए हम्द की दूसरी आयत की तिलावत करते हैं, अलहम्दू लिल्लाही रब्बिल आलामीन अर्थात समस्त प्रशंसा संसारों के पालनहार के लिए विशेष है।वैज्ञानिकों के विचार में संसार में महा विस्फोट के पश्चात उसमें जो तत्व एकत्रित था वह बड़े वेग से बाहर निकल कर हर ओर फैल गया और इस प्रकार आकाश गंगाएं, तारे, सूर्य, धरती और अन्य उपग्रह इत्यादि संतुलित ढंग से और आश्चर्यजनक सामंजस्य के साथ अस्तित्व में आए। इसके अतिरिक्त क़ानूनों का एक समूह भी गठित हुआ जिसे आज भौतिकशास्त्र कहा जाता है। इन क़ानूनों ने एक ऐसी सटीक व्यवस्था को अस्तित्व प्रदान किया कि यदि उस व्यवस्था में कण बराबर भी गड़बड़ी हो जाए तो पूरा संसार अस्त-व्यस्त हो जाएगा। विश्व में इतनी सटीक एवं ठोस व्यवस्था का अस्तित्व इस अर्थ में है कि सृष्टि के लिए एक गहरी एवं समीकरणयुक्त युक्ति मौजूद रही है। ब्रिटिश खगोल शास्त्री सर फ़्रेड होएल कहते हैं कि संसार एक महा विस्फोट के परिणाम स्वरूप अस्तित्व में आया है किंतु हम जानते हैं कि हर विस्फोट बिना किसी व्यवस्था और सामंजस्य के पदार्थ को बिखेर देता है किंतु महा विस्फोट में इसके बिल्कुल विपरीत हुआ है। यह बात आश्चर्यजनक है। निसंदेह यदि बिग बैंग या महा विस्फोट में कोई सूक्ष्म एवं सटीक व्यवस्था मौजूद थी तो उसमें ईश्वरीय युक्ति का हाथ होना चाहिए। दूसरी ओर धरती की सृष्टि अत्यंत आश्चर्यजनक है। ऐसा गृह जो जीवन के लिए उपयुक्त है तथा जीवन के लिए सभी आवश्यक बातें उसमें एकत्रित हैं। यह बात असंभव है कि यह धरती एक संयोग के कारण अस्तित्व में आ गई हो।इस प्रकार जिस संसार में हम जीवन व्यतीत करते हैं वह उस युक्ति से परिपूर्ण रचयिता के अस्तित्व की गवाही देता है जिसने सृष्टि की रचना शून्य से की और उसे अत्यंत सटीक व्यवस्था प्रदान की। वही संसार का पालनहार अल्लाह है जिसने इस धरती को मानव जीवन का पालना बनाया है और एक दिन इसे वह लपेट भी देगा। http://hindi.irib.ir