islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. अमर ज्योति-15

    अमर ज्योति-15

    Rate this post

    क़ुरआने मजीद मार्गदर्शन की एक ऐसी किताब है जिसका पूरे संसार में प्रति दिन बड़ी संख्या में लोग अध्ययन करते हैं। दसियों लाख मुसलमान, यहां तक कि काफ़ी संख्या में ग़ैर मुस्लिम भी क़ुरआने मजीद की विषय वस्तु या विभिन्न भाषाओं में उसके अनुवाद को पढ़ते हैं। यह ईश्वरीय पुस्तक सदैव ही मनुष्य को जानने, ज्ञान प्राप्त करने व शिक्षा अर्जित करने का निमंत्रण देती है तथा इसकी आयतें बुद्धि व तर्क से समन्वित हैं। फ़्रान्स के बुद्धिजीवी जोल लाबाउम का मानना है कि बुद्धि एवं तर्क से क़ुरआने मजीद के समन्वय के कारण ही यह किताब विशेष ताज़गी के साथ पूरे संसार के करोड़ों लोगों के जीवन का ध्रुव बनी हुई है। वे लिखते हैं कि क़ुरआन एक अथाह गहराई वाला समुद्र है जिससे ज्ञान की नदियां प्रवाहित हुई हैं और लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं। निश्चित रूप से क़ुरआने मजीद सदा ही बाक़ी रहेगा और हर काल में ज्ञानी, बुद्धिजीवी, विचारक तथा संशोधनकर्ता अपनी समझ व बुद्धि के अनुसार उससे लाभान्वित होते रहेंगे। क़ुरआने मजीद की दृष्टि में यह संसार, सृष्टि के किताब का एक पन्ना है और मनुष्य को प्रकृति की विभिन्न वस्तुओं के बारे में चिंतन और विचार का निमंत्रण देता है। इस संबंध में इस किताब ने विभिन्न अवसरों व स्थितियों के अनुसार ऐसे तथ्यों को प्रस्तुत किया है जो आज वैज्ञानिक सिद्धांतों व क़ुरआन के चमत्कारों में गिने जाते हैं। क़ुरआन में प्रस्तुत अनेक विषयों में से एक वनस्पतियों और जीवों का जोड़ा होना है जिस पर विद्वानों ने बहुत अधिक ध्यान दिया है। ईश्वर ने आज से चौदह शताब्दियां पूर्व इस किताब में घोषणा की है कि उसने अपने ज्ञान व तत्वदर्शिता के आधार इस संसार की सभी वस्तुओं को जोड़ों में बनाया है। आयतों में इस संबंध में जीवित वस्तुओं और वनस्पतियों की ओर संकेत किया गया है जो नर और मादा जैसे दो लिंगों के होते हैं। यह क़ानून पशुओं और सभी वनस्पतियों में भी लागू है। क़ुरआने मजीद सूरए यासीन की छत्तीसवीं आयत में कहता है कि पवित्र है वह ईश्वर जिसने सभी जोड़ों की रचना की जो कुछ धरती में उगते हैं, स्वयं मनुष्यों में से और उनमें से जिन्हें वे नहीं जानते हैं। सूरए रअद की तीसरी आयत में भी कहा गया है कि अनन्य ईश्वर वही है जिसने धरती को फैलाया, उसमें पर्वत व नहरें बनाईं तथा सभी फलों में दो लिंग बनाए।निश्चित रूप से ईश्वर की ओर से क़ुरआने मजीद को संसार में भेजे जाने के समय मनुष्य को वस्तुओं के जोड़े होने के बारे में अधिक ज्ञान नहीं था किंतु इस ईश्वरीय किताब ने सृष्टि की सभी वस्तुओं का जोड़ा होने पर बल दिया है। आयतों में इसे ईश्वर की शक्ति का चिन्ह बताया गया है और इस माध्यम से ईश्वर के अनन्य होने पर बल दिया गया है। सूरए ज़ारियात की 48वीं और 49वीं आयतों में कहा गया है कि और हमने धरती को फैलाया और हम क्या ही अच्छा फैलाने वाले हैं और हमने हर वस्तु का एक जोड़ा बनाया कि शायद तुम नसीहत प्राप्त करो। जिस व्यक्ति ने सबसे पहले वनस्पतियों में इस वैज्ञानिक तथ्य का पता लगाया वे, स्वीडन के प्रख्यात वनस्पति शास्त्री कार्ल लीनाऊस या कार्ल लीने थे। उन्होंने 18वीं शताब्दी के मध्य में वनस्पतियों में जोड़े के क़ानून का पता लगाया। उस समय उनके दृष्टिकोण ने अधिकांश लोगों को अचरज में डाल दिया और चर्च के अधिकारी उनके विरुद्ध हो गए। यहां तक कि युरोप में वर्षों तक लीने की किताबों को भ्रामक पुस्तकों के रूप में जाना जाता था किंतु कुछ ही समय बाद वैज्ञानिक हल्क़ों ने उनके इस दृष्टिकोण की पुष्टि करते हुए उसे स्वीकार कर लिया और इस समय वैज्ञानिक उनके दृष्टिकोण को एक वैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में मानते हैं।क़ुरआने मजीद की आयतों में इसी प्रकार वनस्पतियों में बीजारोपण की सूचना दी गई है और कहा गया है कि पेड़ एवं पौधे, हवाओं के माध्यम से उपजाऊ होते हैं। सूरए हिज्र की आयत क्रमांक बाईस में कहा गया है कि और हमने हवाओं को बादलों का बोझ उठाने वाला तथा वर्षा लाने वाला बना कर भेजा तथा आकाश से पानी बरसाया जिसके माध्यम से तुम्हें तृप्त किया। अलबत्ता मनुष्य काफ़ी पहले ही खजूर के पेड़ जैसे कुछ पेड़ों में नर व मादा जैसे लिंग के अस्तित्व को जान चुका था और उसके लिए यह बात स्पष्ट हो गई थी कि यदि नर पेड़ से मादा पेड़ को परागण न किया जाए तो खजूर नहीं उगती किंतु उन्हें यह नहीं पता था कि यह एक सार्वजनिक नियम है और सभी पौधों में नर व मादा होते हैं। यहां यह बात भी स्पष्ट है कि सभी वस्तुओं में बीजारोपण या परागण की प्रक्रिया एक समान नहीं होती। ख़ूबानी, फ़र वृक्ष, अनार, नारंगी, कपास और अनाजों में बीजारोपण का कार्य हवा के माध्यम से होता है। जब बीज, इनकी कलियों और कोंपलों में पहुंचते हैं तो वह छोटी-छोटी थैलियां जो कलियों और कोंपलों में होती हैं वे अपना मुंह खोल देती हैं और हवा के माध्यम से उनके भीतर के पराग का मादा फूलों पर छिड़काव हो जाता है। इस प्रकार बीजारोपण का कार्य होता है। कुछ फूलों के पराग या रस को प्राप्त करने के लिए कुछ कीड़े मकोड़े उन फूलों के भीतर जाते हैं और फिर एक फूल से दूसरे फूल की ओर उड़ते समय, अपने शरीर पर चिपके हुए पराग को फूलों के स्टिगमा पर छोड़ देते हैं जिससे उन फूलों में बीजारोपण की प्रक्रिया पूरी होती है।क़ुरआने मजीद के वैज्ञानिक चमत्कारों में से एक अन्य, सृष्टि में संतुलन के विषय को प्रस्तुत करना है। यह संतुलन वनस्पतियों में भी देखा जा सकता है। सूरए हिज्र की 19वीं आयत में कहा गया है कि हमने धरती में हर पौधे को संतुलित उगाया है। यह आयत इस बिंदु की ओर संकेत करती है कि जिन तत्वों से मिलकर पौधा अस्तित्व में आता है और जो उसके ढांचे का आधार होते हैं वे मात्रा व गुणवत्ता की दृष्टि से संतुलित व निर्धारित होते हैं। धरती पर उगने वाले हर पौधे या वसंतु ऋतु में उगने वाले हर फूल का एक विशेष वज़्न और संयोजन होता है और संतुलन का नियम उनमें पूर्ण रूप से क्रियान्वित होता है। हाल ही में वनस्पति विज्ञान में यह बात सिद्ध हुई है कि हर वनस्पति निर्धारित मात्रा में विशेष तत्व से मिल कर बना है, इस प्रकार से कि यदि उसके तत्वों में से कुछ को कम या कुछ को अधिक कर दिया जाए तो फिर वह किसी दूसरे पौधे में परिवर्तित हो जाता है।क़ुरआने मजीद के वैज्ञानिक चमत्कार, संसार के बहुत से रहस्यों पर से पर्दा उठाते हैं। इसी के साथ इस बात पर भी ध्यान रहना चाहिए कि क़ुरआने मजीद मार्गदर्शन की किताब है और उसका मुख्य लक्ष्य मानव जीवन को अर्थपूर्ण बनाना तथा मनुष्य को सौभाग्य व कल्याण का मार्ग दिखाना है। कुल मिला कर यह कि विज्ञान के संबंध में क़ुरआन के संकेत इस बात के परिचायक हैं कि यह कथन ईश्वर के असीम व अनंत ज्ञान एवं तत्वदर्शिता के स्रोत से प्रवाहित हुआ है। ईश्वर सबसे अधिक ज्ञानी, तत्वदर्शी, युक्तिकर्ता और उपासना योग्य है। क़ुरआने मजीद के सूरए फ़ुरक़ान की छठी आयत में वह स्वयं कहता है कि हे पैग़म्बर! कह दीजिए कि इस क़ुरआन को उसने भेजा है जो आकाशों और धरती के रहस्य जानने वाला है।