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    अमर ज्योति-16

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    क़ुरआने मजीद का एक चमत्कारिक आयाम, वर्षों बाद घटने वाली घटनाओं के बारे में भविष्यवाणी है। उदाहरण स्वरूप वर्ष 615 ईसवी में ईरान के सासानी शासन को रोम द्वारा पराजित करने की घटना की भविष्यवाणी क़ुरआने मजीद ने बड़े स्पष्ट शब्दों में की थी। क़ुरआन ने कहा है कि कुछ वर्षों बाद रोम, ईरान को पराजित कर देगा और इतिहास साक्षी है कि वैसा ही हुआ जैसा क़ुरआने मजीद ने भविष्यवाणी की थी। सूरए रूम की दूसरी, तीसरी और चौथी आयतों में कहा गया है रोम वाले पराजित हो गए और यह (पराजय) निकट स्थान पर हुई और वे (इस) पराजय के कुछ ही वर्षों बाद शीघ्र ही विजयी हो जाएंगे। हर मामला ईश्वर के ही हाथ में है, चाहे पहले का हो या बाद का और उस दिन ईमान वाले प्रसन्न होंगे।क़ुरआने मजीद की भविष्यवाणियों का एक अन्य उदाहरण, सूरए कौसर में ईश्वर द्वारा किए गए वादे का पूरा होना है। चूंकि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पुत्र का निधन हो चुका था और उनका कोई दूसरा पुत्र नहीं था, अतः कुछ दुष्ट अनेकेश्वरवादी, उन्हें अबतर अर्थात निसंतान व निर्वंश कहते थे। क़ुरआने मजीद ने, पैग़म्बरे इस्लाम को अबतर कहने वाले को ही अबतर कहा और उसकी यह भविष्यवाणी पूर्ण रूप से सही सिद्ध हुई क्योंकि यद्यपि उस समय उस व्यक्ति के कई बच्चे थे किंतु धीरे धीरे दो या तीन पीढ़ियों के बाद ही उसका वंश समाप्त हो गया जबकि पैग़म्बरे इस्लाम का पवित्र वंश उनकी सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा अलैहस्सलाम के माध्यम से चलता रहा और आज तक बाक़ी है। इस सूरे में कहा गया है कि हे पैग़म्बर! निश्चित रूप से हमने आपको कौसर अर्थात बहुत अधिक भलाई प्रदान की है तो आप अपने पालनहार के लिए नमाज़ पढ़िए और क़ुरबानी कीजिए। निश्चित रूप से आपका शत्रु ही निर्वंश है।आपने फ़्रान्सीसी विद्वान मॉरिस ब्यूकेल का नाम अवश्य ही सुना होगा। वे चिकित्सा व शल्य चिकित्सा में दक्ष थे और ईसाई घराने में पले बढ़े थे किंतु एक वैज्ञानिक कार्य के दौरान उनके साथ एक रोचक घटना घटी जिसने उनके जीवन के मार्ग को बदल दिया और उन्हें सत्य के मार्ग दिखा दिया। फ़्रान्स उन देशों में से है जहां के लोग पुरातन अवशेषों में बहुत अधिक रुचि रखते हैं। वर्ष 1981 में फ़्रान्स के तत्कालीन राष्ट्रपति फ़्रान्सवा मित्रां ने मिस्र से अपील की कि वह फ़िरऔन के परिरक्षित शव को कुछ परीक्षणों एवं अनुसंधानों के लिए फ़्रान्स भेज दे। जब मिस्र के प्राचीन अत्याचारी शासक फ़िरऔन का शव लेकर एक विमान फ़्रान्स के हवाई अड्डे पर उतरा तो तत्कालीन राष्ट्रपति और अनेक मंत्रियों सहित कई गणमान्य हस्तियां वहां उपस्थित थीं जिन्होंने फ़िरऔन के शव का स्वागत किया। मानो वे लोग यह सोच रहे थे कि फ़िरऔन जीवित है और मिस्र पर शासन कर रहा है। इस स्वागत समारोह की समाप्ति के बाद फ़िरऔन के शव को पहले से निर्धारित एक विशेष स्थान पर ले जाया गया ताकि फ़्रान्स के अनुसंधानकर्ता और पुरातन विशेषज्ञ, इस देश के सबसे दक्ष शल्य चिकित्सकों एवं पोस्ट मार्टम विशेषज्ञों की सहायता से उस शव का परीक्षण करें और उसके रहस्यों को जानने का प्रयास करें।फ़िरऔन के शव का परीक्षण करने वाली टीम के प्रमुख, फ़्रान्स के प्रख्यात वैज्ञानिक एवं चिकित्सक प्रोफ़ेसर मॉरिस ब्यूकेल थे। अन्य लोगों के विपरीत जो शव की चीर फाड़ करना चाहते थे, ब्योकेल, फ़िरऔन की मृत्यु के कारण का पता चलाना चाहते थे। उन्होंने देर रात तक अपना काम जारी रखा। फ़िरऔन के शव पर अत्यधिक अनुसंधान करने के बाद उन्हें उसके शव में से नमक के कुछ कण मिले जिनसे पता चलता था कि उसकी मृत्यु समुद्र में डूबने से हुई थी और मरने के बाद उसके शव को समुद्र से निकाल कर परिरक्षित कर दिया गया था। किंतु प्रोफ़ेसर ब्यूकेल को जो बात सबसे अधिक आश्चर्य में डाल रही थी वह यह थी कि किस प्रकार फ़िरऔन का शव, अन्य शवों की तुलन में अधिक सुरक्षित रह गया है? वे फ़िरऔन की मृत्यु के कारण के बारे में अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप रेखा दे रहे थे। उनके अनुसंधान से पता चला था कि फ़िरऔन समुद्र में डूब कर मरा था। उसी समय एक व्यक्ति ने चुपके से उनके कान में कहा कि बेहतर होगा कि तुम अपने अनुसंधान के परिणाम को जारी करने में जल्दी न करो क्योंकि ये परिणाम, फ़िरऔन के समुद्र में डूबने संबंधी मुसलमानों की राय से पूर्णतः समन्वित हैं। ब्यूकेल ने कहा कि यह बात संभव नहीं है और मुसलमानों को इस बात का पता किस प्रकार चल सकता है? उनका विचार था कि इतने बड़े परिणाम तक पहुंचने के लिए विज्ञान की अत्यधिक प्रगति और अत्यंत विकसित एवं सटीक उपकरणों तथा कंप्युटर की आवश्यकता है। उनके उत्तर में कहा गया कि मुसलमानों के ग्रंथ क़ुरआन ने फ़िरऔन के समुद्र में डूबने और मरने के बाद उसके शव के सुरक्षित रहने की सूचना दी है। यह सुन कर प्रोफ़ेसर ब्यूकेल के आश्चर्य में और अधिक वृद्धि हो गई। उन्होंने अपने आपसे पूछा कि यह कैसे संभव है और किस प्रकार यह बात बुद्धि स्वीकार कर सकती है जबकि प्राचीन काल के मुसलमानों व अन्य लोगों को मिस्रियों द्वारा फ़िरऔन के शव को परिरक्षित किए जाने के बारे में कोई ज्ञान नहीं था।मॉरिस ब्यूकेल, रात भर फ़िरऔन के शव को देखते और अपने मित्र की बात के बारे में सोचते रहे कि किस प्रकार क़ुरआन, समुद्र में डूबने के बाद फ़िरऔन के शव को सुरक्षित रखने के बारे सूचना दे सकता है? जबकि ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ इंजील या बाइबल में इस घटना के वर्णन के दौरान, शव को सुरक्षित रखने के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। उन्होंने अपने आपसे कहा कि क्या यह संभव है कि यह परिरक्षित शव उसी फ़िरऔन का हो जिसने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का पीछा किया था? क्या इस बात पर विश्वास किया जा सकता है कि हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम) को एक हज़ार वर्ष से पहले इस मामले की जानकारी थी?डाक्टर ब्यूकेल को चैन नहीं मिल रहा था, उन्होंने उसी रात तौरैत व इंजील की एक एक प्रति मंगवाई और उनका पुनः अध्ययन किया। तौरैत में लिखा था कि पानी पलट आया और उसने घोड़ों तथा फ़िरऔन की समस्त सेना को जो उनके पीछे समुद्र में प्रविष्ट हुई थी, घेर लिया तथा उनमें से कोई भी बाक़ी नहीं बचा। फ़्रान्स के इस वैज्ञानिक को बहुत आश्चर्य हुआ। इंजील में भी फ़िरऔन के शव के सुरक्षित रहने के बारे में कोई संकेत नहीं किया गया था। कुछ समय के बाद फ़्रान्स की सरकार ने, फ़िरऔन के परिरक्षित शव को शीशे के एक सुंदर ताबूत में रख कर मिस्र को वापस लौटा दिया किंतु डाक्टर ब्यूकेल का मन व्याकुल ही रहा। अंततः उन्होंने इस्लामी देशों की यात्रा का निर्णय किया ताकि क़ुरआन द्वारा फ़िरऔन के शव को सुरक्षित रखे जाने की सूचना के सही होने के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने चिकित्सा संबंधी एक कान्फ़्रेंस में भाग लेने के लिए सऊदी अरब की यात्रा की। उस कान्फ़्रेंस में पोस्ट मार्टम के विशेषज्ञ कई मुस्लिम चिकित्सक भी उपस्थित थे। ब्यूकेल ने उस सम्मेलन में फ़िरऔन के समुद्र में डूबने के बाद उसके शव के सुरक्षित रह जाने के बारे में अपने जांच के परिणामों के बारे में भाषण दिया। एक मुस्लिम चिकित्सक ने खड़े हो कर सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 92 की तिलावत की जिसमें कहा गया है कि तो (हे फ़िरऔन!) आज हम तेरे शरीर को (पानी से) मुक्ति देंगे ताकि तू आने वालों के लिए पाठ बने। और निश्चित रूप से लोगों में से अधिकांश हमारी निशानियों की ओर से निश्चेत हैं। क़ुरआने मजीद की इन स्पष्ट आयतों ने ब्यूकेल को बहुत अधिक प्रभावित किया और उनके शरीर में कंपन्न उत्पन्न हो गया। उनका दिल तेज़ी से धड़कने लगा और उन्होंने सभी उपस्थित लोगों के समक्ष खड़े हो कर ऊंची आवाज़ में कहा कि मैं मुसलमान हो गया और क़ुरआन पर ईमान ले आया। क़ुरआन की सत्यता इस प्रकार स्पष्ट हो गई थी कि वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे।इस प्रकार मॉरिस ब्यूकेल ऐसी स्थिति में फ़्रान्स वापस लौटे कि विचारों की दृष्टि से वे पूर्ण रूप से बदल चुके थे। वे अपने अनुसंधानों के परिणामों के बारे में लिखते हैं कि हां, क़ुरआन ने फ़िरऔन के शव को सुरक्षित रखे जाने के बारे में बताया है। यह शव और अन्य फ़िरऔनों के शव नील नदी के उस पार शासकों की घाटी की क़ब्रों में रखे हुए थे किंतु लोगों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। बाद में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के काल के फ़िरऔन का शव वहां से प्राप्त हुआ और आज यह शव क़ाहेरा के संग्रहालय में मिस्री शासकों के परिरक्षित शवों के हॉल में दर्शकों के निरीक्षण के लिए रखा हुआ है। प्रोफ़ेसर ब्यूकेल ने वर्षों तक नवीन वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा क़ुरआने मजीद की आयतों के बीच समन्वय के बारे में अनुसंधान किया किंतु उन्हें ऐसी एक भी आयत नहीं मिली कि जो ठोस वैज्ञानिक तथ्यों से विरोधाभास रखती हो अतः हर दिन ईश्वर के प्रति उनके ईमान में वृद्धि होने लगी और उन्हें हृदय से इस बात पर विश्वास हो गया कि क़ुरआने मजीद में किसी भी प्रकार की कोई ग़लत बात नहीं है। उन्होंने वर्षों तक जो अनुसंधान किए, उन्हें क़ुरआन, बाइबल और विज्ञान नामक एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया है। वे अपनी इस पुस्तक की भूमिका में लिखते हैं कि क़ुरआने मजीद के वैज्ञानिक आयामों ने मुझे बहुत अधिक आश्चर्यचकित किया। मैं कभी इस बात की कल्पना नहीं कर सकता था कि क़ुरआने मजीद ने विभिन्न विषयों के बारे में इस सीमा तक सटीक बात कही होगी और ये विषय पूर्ण रूप से वैज्ञानिक प्रगति और नई नई खोजों से समन्वित हैं तथा क़ुरआन आज से चौदह शताब्दियां पूर्व इस संसार में भेजा गया है।ब्यूकेल की किताब ने पश्चिमी देशों को हिला कर रख दिया और विद्वानों एवं वैज्ञानिकों को अचरज में डाल दिया। पहले ही प्रकाशन में इस पुस्तक की सभी प्रतियां हाथों हाथ बिक गईं जिसके बाद इसका कई बार पुनः प्रकाशन किया गया। इसी प्रकार आगे चल कर इस किताब का अंग्रेज़ी, अरबी, इंडोनेशियाई, फ़ारसी, सर्ब, यूक्रेनी, तुर्की, उर्दू तथा जर्मन भाषाओं में अनुवाद किया गया। पश्चिम के कुछ लोगों ने ब्यूकेल की किताब को रद्द करने का प्रयास किया किंतु जब उन्होंने पुस्तक की विषय वस्तु पर ध्यान दिया और वे क़ुरआने मजीद के वैज्ञानिक चमत्कारों से अवगत हुए तो उन्होंने इस ईश्वरीय ग्रंथ के वैभव व महानता के समक्ष शीश नवा दिए और इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लिया।प्रोफ़ेसर मॉरिस ब्यूकेल ने एक कान्फ़्रेंस में मिस्र के अत्याचारी शासक फ़िरऔन के परिरक्षित शव पर अपने अनुसंधान के परिणामों के संबंध में बात करते हुए कहा कि वे फ़िरऔन के शव के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते बल्कि केवल अनन्य ईश्वर के उस कथन को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं जो उसने सूरए निसा की आयत क्रमांक 82 में सभी मनुष्यों को संबोधित करते हुए कहा है कि क्या वे क़ुरआन में चिंतन नहीं करते कि यदि यह ईश्वर के अतिरिक्त किसी अन्य की ओर से (आया) होता तो उन्हें इसमें ढेरों विरोधाभास मिलते।निश्चित रूप से फ़िरऔन का शव, ईश्वरीय शक्ति का चिन्ह है जिसने क़ुरआने मजीद के चमत्कार को दर्शाने के साथ ही, प्रोफ़ेसर मॉरिस ब्यूकेल के हृदय में इस्लाम को स्थापित कर दिया।