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    अमर ज्योति-17

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    इस्लाम का पवित्र ग्रंथ क़ुरआने मजीद सभी मनुष्यों के मार्गदर्शन व कल्याण के लिए भेजा गया है। इस किताब ने ईश्वर की पहचान तथा बौद्धिक शिक्षाओं के बारे में बात की है और इसकी आयतों में ब्रह्मांड सृष्टि तथा प्रलय के दिन की चर्चा की गई है। अनेक आयतों में अतीत के लोगों के इतिहास, शिष्टाचार, नैतिकता, परिवार के अधिकार तथा शासन के नियमों की ओर संकेत किया गया है जबकि बहुत सी आयतों में सामाजिक संबंधों और आर्थिक विषयों पर ध्यान दिया गया है। क़ुरआने मजीद ने इन बातों को प्रस्तुत करते हुए मनुष्य के समक्ष ऐसे तथ्य प्रस्तुत किए हैं जो कभी भी ग़लत, अनुचित एवं पुराने सिद्ध नहीं हो सकते तथा चौदह शताब्दियां बीत जाने के बावजूद क़ुरआन की शिक्षाओं एवं नियमों को मामूली सी चुनौती भी नहीं दी जा सकी है। इस ईश्वरीय ग्रंथ ने भविष्यवाणी की है कि भविष्य में मानव ज्ञान, आकाशगंगाओं की गहराइयों तक पहुंच जाएगा और वह अपने अस्तित्व की गहराई को पहचान लेगा। सूरए फ़ुस्सेलत की 53वीं आयत में कहा गया है कि शीघ्र ही हम अपनी निशानियां संसार के आस-पास और स्वयं उनके अस्तित्व में उन्हें दिखाएंगे यहां तक कि उनके लिए यह बात स्पष्ट हो जाए कि यह सत्य है। श्रोता मित्रो! पिछले कार्यक्रमों में हमने पश्चिम के कुछ वैज्ञानिकों एवं बुद्धिजीवियों के बारे में बात की थी जो क़ुरआने मजीद के वैज्ञानिक चमत्कारों से प्रभावित हो कर मुसलमान हो गए थे। जिस समय कनाडा के गणितज्ञ और पादरी डाक्टर गैरी मिलर, क़ुरआने मजीद में ग़लतियां खोजने के लिए इस ईश्वरीय ग्रंथ का गहराई से अध्ययन कर रहे थे तो उन्हें अपनी ग़लती का आभास हुआ। उन्होंने क़ुरआन को सबसे अधिक आश्चर्यजनक पुस्तक कहा और इस्लाम स्वीकार कर लिया। एक दिन उनके एक पुराने मित्र ने उनसे पूछा कि क्या तुम्हें विश्वास है कि इस किताब पर ईमान ला कर तुमने सही मार्ग का चयन किया है? मिलर उत्तर में कहते हैं कि मेरे मित्र का विचार, चौदह सौ वर्ष पूर्व के अज्ञानियों के विचारों के समान है जो दावा करते थे कि क़ुरआन, शैतानों के उकसावे का परिणाम और जादू-टोना है। ईश्वर ने उनके उत्तर में सूरए शोअरा की 210वीं से 212वीं आयतों में कहा कि इस (क़ुरआन) को शैतान लेकर नहीं उतरे हैं। न यह उनके लिए उचित है और न ही वे इसका सामर्थ्य रखते हैं। वे तो इसे चोरी-छिपे सुनने से भी दूर रखे गए हैं। गैरी मिलर कहते हैं कि वास्तविकता यह है कि क़ुरआन को सही ढंग से समझने के बाद मुझे पता चला कि कोई भी मनुष्य इसके समान पुस्तक प्रस्तुत करने की क्षमता नहीं रखता बल्कि क़ुरआने मजीद निश्चित रूप से ईश्वरीय कथन है। इस किताब में हर संदेह और शंका का तर्कसंगत उत्तर दिया गया है और यह पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का ईश्वरीय चमत्कार है।हमने इससे पूर्व बताया था कि क़ुरआने मजीद में जो गुप्त सूचनाएं दी गई हैं, वे उसके ईश्वरीय चमत्कार का एक आयाम हैं और अतीत, वर्तमान तथा भविष्य से संबंधित हैं। यह ईश्वरीय किताब अपनी विशेष शैली में कभी कभी अतीत की घटनाओं की सूचना देती है। इस संबंध में सूरए हूद की 49वीं आयत में कहा गया है कि (हे पैग़म्बर!) ये ईश्वर के गुप्त ज्ञान की सूचनाएं हैं जिन्हें हम अपने विशेष संदेश वहि द्वारा आपके पास भेजते हैं, इससे पूर्व न तो आप और न ही आपकी जाति के लोग इनसे अवगत थे। गैरी मिलर क़ुरआन की इस शैली को अद्वितीय बताते हुए कहते हैं कि वस्तुतः क़ुरआन के अतिरिक्त कोई भी ईश्वरीय ग्रंथ इस शैली में बात नहीं करता। क़ुरआन में ऐसी बातें हैं जो हमें अतीत या भविष्य के बारे में सूचना देती हैं किंतु बाइबल में यदि हम किसी विषय या घटना के बारे में अधिक सूचना प्राप्त करना चाहें तो वह दूसरे स्रोतों की ओर संकेत करती है। यदि कोई क़ुरआने मजीद की आयतों की सत्यता में संदेह करे तो क़ुरआन उससे कहता है कि वह उसमें अधिक चिंतन करे। इसके अतिरिक्त क़ुरआने मजीद ने जो सूचनाएं दी हैं, उनका कोई भी इन्कार नहीं कर सकता क्योंकि ये सूचनाएं मानवीय शिक्षाओं पर आधारित नहीं हैं बल्कि ईश्वर की ओर से हैं जो अतीत, वर्तमान और भविष्य से पूर्ण रूप से अवगत है। सूरए आले इमरान की आयत क्रमांक 44 में ईश्वर कहता है कि (हे पैग़म्बर!) ये ग़ैब अर्थात ईश्वर के विशेष ज्ञान पर आधारित समाचार हैं जो हम आपको वहि अर्थात अपने विशेष संदेश द्वारा बता रहे हैं। और आप उनके पास नहीं थे जब यहूदियों के बड़े-बड़े मुखिया मरयम की अभिभावक्ता प्राप्त करने के लिए अपना-अपना क़लम गिरा रहे थे ताकि स्पष्ट हो जाए कि कौन मरयम का अभिभावक होगा? और आप उनके पास नहीं थे जब वे इस विशिष्टता को प्राप्त करने के लिए आपस में भिड़ रहे थे। क़ुरआने मजीद ने इस प्रकार की अपनी गुप्त सूचनाओं के माध्यम से मिथ्याचारियों और उनके साथी अनेकेश्वरवादियों एवं यहूदियों के षड्यंत्रों से पर्दा उठा कर उन्हें अपमानित कर दिया।क़ुरआने मजीद की कुछ सूचनाएं उन घटनाओं से संबंधित हैं जो भविष्य या निकट भविष्य में घटने वाली थीं, विशेष कर वे घटनाएं जिनका शीघ्र ही मुसलमानों को सामना करना था। उदाहरण स्वरूप उनकी विजय, इस्लाम का प्रसार तथा शत्रुओं की पराजय जो इन भविष्यवाणियों के बाद व्यवहारिक हुई। इन्हीं आयतों में सूरए अनफ़ाल की सातवीं और आठवीं आयतें भी जिनमें कहा गया है कि हे ईमान वालो! याद करो उस समय को जब ईश्वर ने तुम्हें वचन दिया कि तुम्हें (क़ुरैश के व्यापारिक कारवां या उनकी सशस्त्र सेना) दोनों में से एक गुट का सामना अवश्य ही करना है और तुम चाहते थे कि तुम्हें (व्यापारिक) कारवां का सामना करना पड़े। (और तुम विजयी हो जाओ) किंतु ईश्वर अपने कथनों के माध्यम से सत्य को मज़बूत करना और काफ़िरों की जड़ काट देना चाहता है ताकि सत्य सिद्ध हो जाए चाहे अपराधियों को बुरा ही क्यों न लगे।उल्लेखनीय है कि यह आयतें बद्र नामक युद्ध से पहले आई हैं और इनमें काफ़िरों की जड़ काटने का वचन दिया गया है जबकि उनके मुक़ाबले में मुसलमानों की संख्या बहुत कम थी। संभावनाओं की दृष्टि से भी मुसलमान अत्यंत कठिनाई में थे, जैसा कि इतिहास में वर्णित है, मुसलमानों की पूरी सेना में केवल दो घुड़ सवार थे और अन्य सभी पैदल ही युद्ध करते थे जबकि अनेकेश्वरवादियों की सेना के पास अत्यधिक सैन्य संभावनाएं थीं। इसके बावजूद, क़ुरआने मजीद की भविष्यवाणी के अनुसार मुसलमानों को काफ़िरों पर विजय प्राप्त हुई।जिन आयतों ने डाक्टर मिलर को बहुत अधिक आश्चर्यचकित किया उनमें सूरए मसद की आयतें भी शामिल हैं जिनमें बाद में घटित होने वाली एक घटना की सूचना दी गई है। डाक्टर मिलर कहते हैं। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम तथा उनके अनेकेश्वरवादी चाचा अबू लहब की घटना मेरे लिए बहुत आश्चर्यजनक थी क्योंकि अबू लहब इस्लाम का कट्टर विरोधी था और पैग़म्बरे इस्लाम जहां कहीं भी जाते वह उनका पीछा करता और अपनी अज्ञानतापूर्ण बातों से उन्हें अपमानित करने का प्रयास करता था। वह लोगों से कहता था कि यदि मुहम्मद कहें यह वस्तु सफ़ेद है तो निश्चित रूप से यह वस्तु काली है और यदि वे कहें कि इस समय रात है तो जान लो कि इस समय अवश्य ही दिन है। वह हर संभव मार्ग से पैग़म्बरे इस्लाम का विरोध करता था और उन्हें झूठा कहता था ताकि उनके प्रति लोगों के मन में संदेह उत्पन्न कर दे। अबू लहब के मरने से दस वर्ष पूर्व ईश्वर ने क़ुरआने मजीद के सूरए मसद को भेजा जिसमें कहा गया था कि अबू लहब आग में जलेगा अर्थात काफ़िर रहते हुए ही इस संसार से जाएगा। इस सूरे का अनुवाद है। ईश्वर के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। टूट जाएं अबू लहब के दोनों हाथ! उसका माल और जो कुछ उसने कमाया वह कदापि उसके काम न आया और शीघ्र ही वह धधकती हुई आग में जाएगा और उसकी पत्नी भी, ऐसी स्थिति में कि वह नरक की आग का ईंधन ढोने वाली होगी और उसकी गर्दन में खजूर के पेड़ की बटी हुई रस्सी है।इस सूरे को सुनने के बाद अबू लहब ने लोगों के सामने पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम से कहा कि मैं अब तक तो मुसलमान नहीं हुआ था किंतु मैं आज मुसलमान हो जाता हूं। क्या तुम फिर भी कह सकते हो कि मैं नरक में जाऊंगा? यह कैसा ईश्वरीय संदेश है जो तुम्हारे पास आया है? इतिहास के अनुसार अबू लहब ने जो कहा था वह कदापि किया नहीं और कभी भी मुसलमान नहीं हुआ। वह सदैव पैग़्मबरे इस्लाम तथा इस्लाम से संघर्षरत रहा और बिना ईमान लाए ही काफ़िर की मौत मरा। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम को ईश्वर के वचन पर पूरा भरोसा था और इसी कारण वे सदैव अबू लहब की कार्यवाहियों के समक्ष डटे रहते थे।क़ुरआने मजीद का एक अन्य चमत्कार संसार के भविष्य तथा उसके अंजाम के बारे में सूचना देना है। सूरए अंबिया की आयत क्रमांक 104 में ईश्वर ने कहा है कि यह संसार जिस प्रकार से आरंभ हुआ था, उसी प्रकार से समाप्त भी हो जाएगा। आयत में कहा गया है कि उस दिन जब हम आकाश को काग़ज़ की भांति लपेट देंगे फिर जिस प्रकार से हमने सृष्टि की रचना की थी उसी प्रकार उसे लौटा देंगे, यह हमारा वचन है और निश्चित रूप से हम इसे पूरा करके रहेंगे।ईश्वर इस आयत में कहता है कि संसार के अंत में सभी आकाशों को एक साथ लपेट दिया जाएगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के आधार पर विद्वानों का मानना है कि इस प्रकार का अंजाम संसार की प्रतीक्षा में है। विद्वानों व वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस प्रकार से विश्व निरंतर फैलता जा रहा है उसी प्रकार एक विशेष प्रक्रिया के अंतर्गत सिकुड़ कर तबाह हो जाएगा। संसार में पाए जाने वाले तत्वों की सीमतता के कारण, विश्व में अधिक फैलाव में सक्षम नहीं होगा और ये तत्व सिकुड़ते जाएंगे। क़ुरआने मजीद कहता है कि यह बात ईश्वर का वचन एवं संकल्प है जो असीम ज्ञान का स्वामी है। इस घटना का समय भी वह स्वयं ही निर्धारित करेगा और कोई भी इस घटना के समय के बारे में नहीं जानता।डाक्टर गैरी मिलर, क़ुरआने मजीद की सच्चाई और महानता के दृष्टिगत कहते हैं कि मैं मुसलमानों से कहता हूं कि वे क़ुरआन की आयतों पर अधिक गहराई से विचार करें। मैंने उस समय क़ुरआन में चिंतन किया जब पश्चिम में कम ही लोग क़ुरआन की आयतों पर विचार करते थे। मैं आप मुसलमानों से कहता हूं कि सूरए अनकबूत की 51वीं और 52वीं आयतों पर ध्यान दीजिए। इन आयतों में, जिन्होंने मुझे बहुत अधिक प्रभावित किया, कहा गया है कि क्या इनके लिए यह पर्याप्त नहीं है कि यह किताब हमने आपके पास भेजी है जो निरंतर इन्हें पढ़ कर सुनाई जाती है? निश्चित रूप से इसमें उन लोगों के दया व पाठ सामग्री है जो ईमान लाते हैं। तो (हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि मेरे और तुम्हारे बीच गवाही के लिए ईश्वर पर्याप्त है। जो कुछ आकाशों और धरती के बीच में है वह उसका ज्ञानी है और जो लोग ग़लत (आस्था) पर ईमान लाए और ईश्वर का इन्कार किया तो ऐसे ही लोग वास्तविक घाटा उठाने वाले हैं। http://hindi.irib.ir