islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. अमर ज्योति-25

    अमर ज्योति-25

    Rate this post

    क़ुरआने मजीद मार्गदर्शन की किताब है अतः वह अपनी आयतों में मनुष्य को चिंतन के लिए प्रोत्साहित करता है और उसकी बुद्धि की शक्ति का इस प्रकार मार्गदर्शन करता है कि वांछित जीवन की प्राप्ति के मार्ग तक पहुंचने में उसका सहायक बन सके। यह ईश्वरीय किताब, अंधकारों से निकलने और प्रकाश की ओर जाने का मार्ग प्रशस्त करती है। सूरए माएदा की आयत क्रमांक 16 में कहा गया हैः ईश्वर इस (प्रकाश और स्पष्ट करने वाली किताब) के माध्यम से, उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने का प्रयास करने वालों को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित मार्गों की ओर ले जाता है और अपनी कृपा से उन्हें अंधकार से प्रकाश में लाता है और सीधे रास्ते की ओर उनका मार्गदर्शन करता है। क़ुरआन के संबंध में अध्ययन करने वालों के लिए एक ध्यान योग्य बिंदु इस किताब की मार्गदर्शन की शैलियां हैं। क़ुरआने मजीद ने क़िस्से, उपमा, तर्क व सौगंध जैसी विभिन्न शैलियों से मनुष्य के मार्गदर्शन के लिए लाभ उठाया है। इस समय हम में क़ुरआने मजीद में वर्णित क़िस्सों की कुछ विशेषताओं की चर्चा करेंगे।क़िस्से और कहानी बयान करना प्राचीन काल से ही मानव समाजों में प्रचलित रहा है। लोग बड़े उत्साह व जिज्ञासा के साथ क़िस्से और कहानियां सुनते थे और फिर उन्हें अपने बाद वाली पीढ़ियों तक पहुंचा देते थे। श्रोता पर कहानी के जादूई प्रभाव ने काल्पनिक कहानियां गढ़ कर सुनाने वालों को भी लोकप्रिय बना दिया। क़िस्से और कहानियों की असंख्य किताबें अतीत से अब तक लिखी जा चुकी हैं। यह बात भी उल्लेखनीय है कि क़िस्सों और कहानियों की रोचकता केवल समय बिताने या लोगों का मनोरंजन करने के कारण नहीं है बल्कि अनुभवों ने बताया है और मनोविज्ञान ने भी इसकी पुष्टि की है कि परोक्ष रूप से की जाने वाली नसीहत, मनुष्य को परिवर्तित करने में बहुत अधिक प्रभावी होती है। चूंकि कहानियां मनुष्य के मन में बाक़ी रहती हैं और वह स्वयं को उनके अनुसार ढालने का प्रयास करता है, अतः वे मनुष्य को शिक्षित करने का सबसे उचित माध्यम हैं।क़ुरआने मजीद के क़िस्से, इस ईश्वरीय किताब के सबसे रोचक भागों में से एक है। ईश्वर, अतीत के लोगों के जीवन के शिक्षा योग्य भागों का वर्णन करके उन्हें आगामी पीढ़ियों के लिए चेतना व जागरूकता का साधन बनाता है ताकि लोग, अपने से पहले वालों के जीवन से पाठ सीख कर, सफलता के रहस्यों को जानें और परिपूर्णता एवं मार्गदर्शन की राह को खोज सकें। क़ुरआने मजीद इस बात की ओर संकेत करता है कि उसने जिन क़िस्सों का वर्णन किया है वे लक्ष्यपूर्ण हैं। सूरए यूसुफ़ की आयत क्रमांक 111 में कहा गया है। निश्चित रूप से उनकी घटनाओं और वृत्तांतों में सोच-विचार करने वालों के लिए शिक्षा सामग्री है। इसी प्रकार सूरए इनआम की आयत संख्या 11 में कहा गया है कि हे पैग़म्बर! कह दीजिए कि धरती में घूमो-फिरो, फिर देखो कि उन लोगों का अंत कैसा हुआ जिन्होंने ईश्वरीय निशानियों को झुठलाया?अधिकतर साहित्यिक कहानियों में काल्पनिकता का तत्व हावी होता है। यह तत्व कहानी में जितनी अधिक पैठ बनाता है, श्रोता या पाठक पर उसका प्रभाव उतना ही अधिक होता है किंतु क़ुरआने मजीद इन काल्पनिक कहानियों के विपरीत वास्तविकताओं का वर्णन करता है। क़ुरआन वास्तविक क़िस्से बयान करता है तथा उसमें किसी भी प्रकार की झूठी व काल्पनिक बातों का समावेश नहीं है। उदाहरण स्वरूप हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के रोचक क़िस्से के वर्णन के पश्चात, क़ुरआने मजीद इस घटना और अन्य क़िस्सों के बारे में कहता है कि यह झूठा वृत्तांत नहीं (बल्कि ईश्वरीय संदेश) और इससे पहले (की आसमानी किताबों) से समन्वित है। इसके अतिरिक्त क़ुरआने मजीद में वर्णित घटनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील हैं जिनमें से प्रत्येक का मानव जाति के प्रशिक्षण में विशेष स्थान है। क़ुरआन मजीद इन क़िस्सों के माध्यम से एक ओर तो परिपूर्णता की चाहत रखने वालों के लिए उच्च आदर्श प्रस्तुत करता है दूसरी ओर बड़े ही रोचक ढंग से मनुष्य की ग़लतियों और पथभ्रष्टताओं को रेखांकित करता है।वस्तुतः क़ुरआने मजीद के क़िस्से, मनुष्य और उसके अस्तित्व की मान्यताओं का एक सुंद्र चित्र प्रस्तुत करता है। एक ऐसा मनुष्य जो इतना ऊंचा उठे कि धरती में ईश्वर का उत्तराधिकारी बन जाए या फिर ऐसा मनुष्य जो अपने मायामोह और आत्ममुग्धता के कारण पथभ्रष्टता व बर्बादी की घाटी में गिर जाए। ये क़िस्से जीवन व सृष्टि के संबंध में पढ़ने व सुनने वालों के दृष्टिकोण को परिवर्तित कर देते हैं और उसे इस बात के लिए प्रोत्साहित करते हैं कि वह जीवन के संबंध में हल्का व विदित दृष्टिकोण न रखे बल्कि उसके गहरे अर्थों के बारे में सोचे। उदाहरण स्वरूप हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की घटना में यह यह शैली बड़े ही सुंदर ढंग से चित्रित की गई है। हज़रत इब्राहीम ने आकाशों पर गहरी दृष्टि डाल कर और जीवन के संबंध में अपने विचारों के क्षितिज को विस्तृत करके सृष्टि के वैभव व सौंदर्य का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी कि वे केवल उसी ईश्वर की उपासना करते हैं जो आकाश व धरती का रचयिता एवं सृष्टि का संचालनकर्ता है। इस प्रकार के क़ुरआनी क़िस्सों में मनुष्य के मन व हृदय के सौंदर्य को बड़ी निपुणता के साथ प्रदर्शित किया गया और उनके आधार पर ईमान व नैतिकता रहित मनुष्य का ईश्वर के दरबार में कोई स्थान नहीं है। अपनी सुंदर कथाओं में क़ुरआने मजीद इस बात पर बल देता है कि अध्यात्म व नैतिकता से दूरी मनुष्य को निरंकुशता व बर्बादी की ओर ले जाती है। क़ुरआन में फ़िरऔन, नमरूद और पैग़म्बर के शत्रुओं की घटनाओं का वर्णन इसी वास्तविकता को स्पष्ट करता है।क़ुरआने मजीद के क़िस्सों में घटना के चरित्रों के सकारात्मक व नकारात्मक व्यवहार को स्पष्ट किया जाता है ताकि लोग पूरी चेतना के साथ सर्वोत्तम आदर्शों का चयन कर सकें। ईश्वर ने अपने पैग़म्बरों के पवित्र एवं प्रकाशमान चेहरे को उचित आदर्श के रूप में चुना है और उन्हें सभी काल व वंश के लोगों के लिए मार्गदर्शन का साधन बनाया है। सृष्टि के रचयिता ने पैग़म्बरों की उच्च विशेषताओं का वर्णन करके हृदयों को उनकी महानता व वैभव की भावनाओं से भर दिया है तथा सभी को उनके समक्ष विनम्र बना दिया है। उदाहरण स्वरूप हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की घटना एक ऐसे युवा का वृत्तांत है जिसे ईमान की सबल भावना, ईश्वर से प्रेम और उसके सामिप्य के मार्ग में जान न्योछावर करने के लिए तैयार कर देती है। हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम के जीवन में धैर्य एवं ईश्वर पर भरोसे की मूल्यवान निशानियों को रेखांकित किया गया है। हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की कथा में भी बड़ी ही दक्षता से बनाया गया पवित्रता, ज्ञान व तत्वदर्शिता का चित्र देखने को मिलता है। इन क़िस्सों को जितनी बार पढ़ा जाए, उतनी बार पाठक को एक नया संदेश मिलता है।जैसा कि हमने कहा, क़ुरआने मजीद का वास्तविक लक्ष्य मनुष्य का मार्गदर्शन है। मूल रूप से क़ुरआन की सभी आयतें एक ऐसे बिंदु तक पहुंचती हैं जिसका लक्ष्य मार्गदर्शन है। अतः इस ईश्वरीय किताब में कोई भी ऐसा बिंदु, उदाहरण, घटना या क़िस्सा ऐसा नहीं है जो अकारण प्रस्तुत किया गया हो। क़ुरआने मजीद के प्रख्यात व्याख्याकार अल्लामा तबातबाई अपनी तफ़सीर अलमीज़ान के 13वें खंड में इस बात का उल्लेख करते हुए लिखते हैं कि क़िस्सों के वर्णन में ईश्वर की शैली यह है कि वह उन उल्लेखनीय एवं महत्वपूर्ण बिंदुओं के वर्णन को पर्याप्त समझता है जो लक्ष्य तक पहुंचा देते हैं और वह घटना के पूरे ब्योरे का उल्लेख नहीं करता। क़ुरआने मजीद की पद्धति यह है कि वह आरंभ से लेकर अंत तक घटना का वर्णन नहीं करता या मूल घटना के साथ सामने आने वाली अन्य बातों को बयान नहीं करता। इसका कारण स्पष्ट है क्योंकि क़ुरआने मजीद इतिहास या क़िस्से-कहानी की किताब नहीं है बल्कि वह मार्गदर्शन की किताब है। मूल रूप से पिछले काल की घटनाओं के संबंध में क़ुरआन का दृष्टिकोण एक निर्धारित व चयनित दृष्टिकोण है। वह उस बात का उल्लेख करता है जिसमें धर्म का संदेश और उपदेश, पाठ व शिक्षा हो। क़िस्सों के वर्णन में क़ुरआने मजीद की शैली यह है कि वह ऐतिहास घटनाओं को प्रस्तुत करने में केवल जीवंत व मूल भूमिका वाले भाग का चयन करता है और पाठक व श्रोता को घटना के ब्योरे में नहीं उलझाता ताकि उसकी सोच, घटना से पाठ लेने में चूक न जाए।क़ुरआने मजीद के क़िस्सों का एक रोचक तथ्य यह है कि इनमें किसी भी प्रकार की अशिष्ट या अश्लील बात देखने में नहीं आती। वह क़िस्सों के संवेदनशील दृष्यों के चित्रण के दौरान आश्चर्यजनक ढंग से नैतिकता व पवित्रता का पालन करता है। क़ुरआने मजीद घटनाओं के वर्णन की अनदेखी किए बिना, उन्हें शिष्टाचार और नैतिकता के सिद्धांतों का पालन करते हुए बयान करता है। उदाहरण स्वरूप हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और मिस्र के शासक की पत्नी ज़ुलैख़ा की घटना के वर्णन की शैली की ओर संकेत किया जा सकता है। अल्लामा तबातबाई इस संबंध में लिखते हैं कि क़ुरआने मजीद ऐसी ठोस किताब है जिसमें किसी प्रकार की किसी ग़लत बात का अस्तित्व नहीं है और षड्यंत्रकारी हाथ उसमें किसी भी ग़लत बात का समावेश नहीं कर सकते। इस प्रकार क़ुरआने मजीद में क़िस्सों विशेष कर पैग़म्बरों की घटनाओं का वर्णन एक अद्भुत शैली में किया गया है और यह अपने स्थान पर स्वयं एक चमत्कार है। नवीन एवं अद्वितीय शैलियों के प्रयोग ने क़ुरआन के क़िस्सों को एक विशेष रोचकता एवं वैभव प्रदान कर दिया है। http://hindi.irib.ir/