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    आख़री हज और उस के बाद की घटना

    आख़री हज और उस के बाद की घटना
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    सिपासः विधान के लिहाज़ से इस्लाम परिपूर्ण व समाप्त हुआ, रसूले ग़ेरामी हूज्जतूल विदा में हज्ज के समस्त प्रकार बिधान को मुस्लमानों के उद्देश्व तालीम दी, जिस समय आप आख़री हज करके वापस आरहे थें ग़दीरे ख़ुम के मैदान में हज़रत अली (अ) को अपना जानशीन निर्वाचन करके अपना हिदायेत को बर्क़रार रख़ा आयाते मुबारक नाज़िल हूईः

    اليوم اکملت لکم دينکم واتممت عليکم نعمتي ورضيت لکم الاسلام ديناً

    ((आज के दीन तुम सब के लिए तुमहारे दीन को परिपूर्ण क़रार दिया हूँ। और आपनी तेअमत को तुमहारे उपर समाप्त घोषणा की, और दीन इस्लाम को तुम सब के लिए पछन्द व भक्ति क़रार दिया हूँ। (9) ))

    ग़दीरे ख़ुम की घटना बेशि दीन अतीत नहीं हो पाया कि नबी करीम (स.) की पवित्र देह मुबारक पर व्याधि का प्रभाब शुरु हुआ और बिस्तरे मरीज़ में मश्गूल होगए. घन्टे की घन्टे आपकी मरीज़ी की सिद्दत बड़ती गई नतीजे में अल्लाह का भेजा हुआ रसूल पवित्र देह मुबारक लेकर ग्यारह हिजरी 28 सफ़र सोमवार को पृथ्वी को परित्याग करके अल्लाह से मुलाक़त की। और आपकी वसियत व निर्देश मुताबिक़ हज़रत अली (अ) पवित्र देह मुबारक को गुस्ल व कफ़न देकर नामाज़े जानाज़ा पड़ी।

    सिपासः पैग़म्बरे (स.) की सब दोस्त व बन्धू दल व दल बनकर आपके पवित्र व मुबारक देह पर नमाज़ पड़ते रहें. हत्ता शनिवार तक इस तरह चलती रहि लेकिन पवित्र देह उसि कमरे में पड़ा रहा आख़िर में मदीना मनौवरह में हज़रत अली (अ) आपने हाथ मुबारक से आप को दफ़न किया। (10)

    पैग़म्बरे ग़ेरामी हज़रत मुहम्मद (स.) आपने पवित्र ज़िन्दगी में कमाल का एक मज़हर थें उदाहरणः अमानतदारी, इख़लास, दोस्ती, सदाचार, ज्ञान, बूर्दबारी, क्षमा, बख़शिश, शूजाअत, परहेज़गारी,फज़ीलत व रादमर्दि, इफ्फ़ात व पाकदामन, अद्ल, ख़ूज़ु व ख़ूशु, जिहाद, और समस्त प्रकार कामों को अंजाम देने में एक वेनज़ीर थे…….आप देख़ने में भी चाँद दिखाई देते थें, और आसमान के तारा जैसे चमकते थें, ख़ूलासा यह हुआ की आख़री पैग़म्बरे (स.) में समस्त प्रकार सदाचार गुणावली उपस्थित थें आपके जैसा कोई उदाहरण नहीं था और न अएगा, ग्रन्थों में से आपकी अच्छी ग्रंथ थी, धर्मों में से अच्छा धर्म था, ((बातिल इस ग्रंथ में प्रवेश कर नहीं सकता और न करेगा क्योंकि यह अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुआ है))