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    आप पैग़म्बर होने का दावा क्यों नहीं कर देते

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    बहमनयार अबू अली सीना के प्रसिद्ध शिष्य थे, एक बार उन्होने अपने गुरू के सामने यह प्रस्ताव रखा कि वह पैगम्बर होने का दावा कर दें। अबू अली सीना ने कोई उत्तर नहीं दिया। कुछ समय बीता, एक रात गुरू और शिष्य दोनों गहरी नींद सो रहे थे, रात भी बहुत ठंङी थी कि तभी अबू अली सीना को बहुत प्यास  लगने लगी। उन्होने बहमनयार से पुकार कर कहः मैं बहुत प्यासा हूं मेरे लिये थोङा पानी ले आओ ,शिष्य जिसका मन गर्म बिस्तर से उठने को तय्यार नहीं था बहाना बनाते हुए कहाः गुरू जी ऐसे समय में पानी पीना आपकी छाती के लिये अच्छा नहीं है। बू अली ने कहाः चिकित्सा विज्ञान में मैं तुम्हारा गुरू हूं, अब तुम मुझे सिखाने चले हो? बहमनयार ने उत्तर दियाः वास्तविकता यह है कि इस कङी ठंङ में मैं बिस्तर से निकलना नहीं चाहता। उसी समय किसी मस्जिद से अजान की आवाज आने लगी—अल्लाहो अकबर , अबू अली ने अपने शिष्य से कहाः पैगम्बरी के लायक वह है जिसे इस संसार से गए कई सौ वर्ष बीत चुके हैं परंतु अजान देने वाला उसके प्रेम में आज भी इतना डूबा हुआ है कि उसकी दी हुई सीख के अनुसार  मस्जिद में जाकर अजान दे रहा है, न कि मैं जो ऐसा गुरू हूं कि उसका शिष्य उसे पानी पिलाने पर भी तय्यार नहीं।