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    आयतुल्लाह ख़ामनेई 5

    आयतुल्लाह ख़ामनेई 5
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    अमरीकी शोध संस्था RAND ने आध्यात्मिकता, रक्षक और आधार शीर्षक के अंतर्गत एक पुस्तक प्रकाशित की जिसमें इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाह हिल उज़मा सैयद अली ख़ामनेई को युक्ति से भरे प्रबंधक, ऐसी हस्ती जिसकी ओर लोग खिंचे चले आते हैं, सुदृढ़ और उच्च आत्मविश्वास का स्वामी व्यक्ति बताया गया है। अमरीका की सशस्त्र सेना को राजनैतिक सलाह देने वाली यह शोध संस्था अमरीकी अधिकारियों को सलाह देती है कि वह आयतुल्लाह ख़ामेनेई और ईरान में उनके प्रभाव के स्तर के बारे में सटीक जानकारियां एकत्रित करें।
    विदेश नीति में इस्लामी क्रांति के वरिष्ट नेता की शिक्षाओं और मार्गदर्शनों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों में ईरान के प्रभाव में वृद्धि है। वर्तमान समय में पश्चिम के बहुत से राजनेता और सैन्य अधिकारियों का यह मानना है कि ईरान मध्यपूर्व की एक ऐसी शक्ति है जिसमें कोई दो राय नहीं है। मिस्री समाचार पत्र अख़बारुल यौम से साक्षात्कार में इटली के पूर्व प्रधानमंत्री रोमानो प्रोदी ने कहा कि मध्यपूर्व की राजनीति में ईरान एक मुख्य देश है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति के पूर्व आयुक्त ख़ावियर सोलाना ने तो इससे बढ़कर बात कह दी। उनका मानना है कि राजनीति की खेल में ईरान के पास तुरूप का पत्ता होता है जो विश्व में प्रथम श्रेणी की शक्ति में परिवर्तित हो सकता हैं। यह बात स्पष्ट है कि यह प्रभाव ईरानी अधिकारियों के होशियारी भरे कूटनयिक प्रयासों और आध्यात्म विशेषकर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता की साहसी, न्याय प्रेम व अत्याचार विरोधी नीतियों का स्रोत हैं जिसने विश्व जनमत के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।
    ब्रिटेन के अंतर्राष्ट्रीय मामले की राजशाही संस्था ने मध्यपूर्व में ईरान की शक्ति के संबंध में एक रिपोर्ट पेश की जिसका शीर्षक है ईरान, पड़ोसी देश और क्षेत्रीय संकट। उक्त संस्था इस रिपोर्ट में लिखती है कि क्षेत्र में ईरान की बढ़ती हुई शक्ति को रोकने के लिए अमरीका ने ईरान के पड़ोसी देशों का सहारा लिया है किन्तु ईरान ने बड़ी सफलता से अपने उन अरब पड़ोसी देशों के साथ जो ईरान के प्रभाव से भयभीत थे, मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे हैं और क्षेत्र में एक बेहतरीन स्थान पर पहुंच गया है।
    वास्तव में इसी सच्चाई से प्रभावित होकर अमरीका ने पिछले वर्षों के दौरान कई बार अमरीका ने ईरान से वार्ता की इच्छा प्रकट की जिस पर ईरान की ओर से सदैव उसे तार्किक और न्यायप्रेम शर्तों का सामना करना पड़ा। ईरान ने अमरीका से वार्ता के लिए जो शर्तें रखी हैं वह इस प्रकार हैः वर्चस्ववादी नीतियों से दूर रहना, द्विपक्षीय संबंधों में समानता और वाशिंग्टन की ओर से सद्भावना दिखाना। ईरान का प्रभाव और दबदबा जो अरमीकी अधिकारियों की मांग पर षड्यंत्रकारी वार्ता के लिए तैयार नहीं है, इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के डटे रहने, दूरदर्शिता और बुद्धिमत्ता का परिणाम रही है।
    शत्रुओं से मुक़ाबले के मार्गों में देशों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में वृद्धि और स्वाधीनता को सुदृढ़ करना है। साम्राज्यवादी सदैव से इस प्रयास में रहे हैं कि अनेक और बहुआयामी प्रतिबंध लगाकर ईरानी राष्ट्र को ज्ञान और तकनीक की प्राप्ति से दूर रखें ताकि इस विशाल और महत्त्वपूर्ण देश पर वर्चस्व जमाने का मार्ग प्रशस्त हो सके किन्तु वरिष्ठ नेता की दूरदर्शिता और शत्रुओं की एक एक रग से अवगत नज़रों ने शत्रुओं की लालसी आंखों को अंधा और उन्हें पहले से अधिक निराश कर दिया। उदाहरण स्वरूप शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का विषय, अंतर्राष्ट्रीय दबावों के समक्ष वरिष्ठ नेता के डटे रहने और उनकी दूरदर्शी नीतियों युवा बुद्धिजीवियों और विचारकों को प्रेरित किया ताकि वैज्ञानिक प्रगतियों के शिखर को सर करें और ध्यानयोग्य प्रगतियां अर्जित करें। चूंकि पश्चिमी देश अंतर्राष्ट्रीय दबाव डाल कर ईरान की परमाणु गतिविधियों को रोकने का परिणामहीन प्रयास किया, वरिष्ठ नेता ने ईरानी राष्ट्र के इस मौलिक अधिकारों पर बल देते हुए धमकियों को अवसरों और कमज़ोरियों को शक्ति में परिवर्तित कर दिया। वरिष्ठ नेता ने बारम्बार इस बात पर बल दिया है कि ईरानी राष्ट्र भी विश्व के अन्य राष्ट्रों की भांति परमाणु बिजली घरों से अपनी आवश्यकता की ऊर्जा प्राप्त करना चाहता है। इस आधार पर परमाणु तकनीक और अन्य तकनीकों की प्राप्ति के लिए प्रयास जिसने ईरान को विज्ञान के शिखर पर पहुंचा दिया है, अनिवार्य और राष्ट्रीय दायित्व है और ईरानी राष्ट्र और सरकार विश्व साम्राज्यवाद के केन्द्रों के दबावओं के समक्ष डटकर इस मूल लक्ष्य को प्राप्त करके ही रहेगी।
    मुसलमानों के मध्य एकता, इस्लामी जगत के महत्त्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने पूरे विश्व में इस्लामी एकता के ध्वज को लहराया और वर्तमान समय में यह राह इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाह हिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई द्वारा जारी है। उनका इस बात पर बल कि अमरीका और ज़ायोनी मुसलमानों के शत्रु हैं चाहे वह शीया मुसलमान हों या सुन्नी मुसलमान और मुसलमानों को इस महत्त्वपूर्ण विषय को समझते हुए पवित्र क़ुरआन और इस्लामी परंपरा के गिर्द एकजुट होना चाहिए। यह बात उनके बहुत से भाषणों और वक्तव्यों में देखी जा सकती है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के अनुसार, मतभेद, संक्रीण दृष्टि, सांसारिक मायामोह और स्वार्थ, मुसलमानों के मध्य एकता में सबसे बड़ी रुकावटें हैं विशेषकर इस्लामी देशों के अधिकारियों और बुद्धिजीवियों को इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। शीया मुसलमानों और सुन्नी समुदाय के मध्य धार्मिक तनाव से मुक़ाबला करना जो एक धार्मिक और राजनैतिक विषय समझा जाता है, वह शैली है जिसे मतभेद और बिखराव पर नियंत्रण पाने के लिए वरिष्ठ नेता ने पेश किया है। मतभेद और बिखराव, इस्लामी जगत के विरुद्ध साम्राज्यवादियों के महत्त्वपूर्ण हथकंडे हैं और इसीलिए इस सीमा तक मुसलमानों के मध्य एकता और सहृदयता पर बल देते हैं। सुन्नी मुसलमान भाईयों की जमाअत की नमाज़ में शीया मुसलमानों की उपस्थिति की अनुमति और पैग़म्बरे इस्लाम की पत्नियों के अनदार के हराम होने पर आधारित उनका हालिया फ़त्वा, मुसलमानों के मध्य एकता और उनके मध्य सुदृढ़ता फैलाने के लिए उनकी कार्यवाहियों के भाग हैं। पैग़म्बरे इस्लाम की पत्नियों के अनादर के हराम अर्थात वर्जित होने पर आधारित उनके फ़त्वे का सुन्नी मुसलमानों के मध्य व्यापक स्वागत किया गया।
    अत्याचार ग्रस्त फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन और हिजब़ुल्लाह और हमास जैसे मुस्लिम आंदोलनों का समर्थन करके वरिष्ठ नेता ने यह सिद्ध कर दिया कि ईरान और ईरान की सरकार साम्राज्यवादियों के मुक़ाबले में सदैव से मुसलमानों के साथ रही है। हिज़बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ज़ायोनी शासन से मुक़ाबला करने के संबंध में वरिष्ठ नेता की दूरदर्शिता के संबंध में एक रोचक बिन्दु की ओर संकेत करते हैं। सैयद हसन नसरुल्लाह दक्षिणी लेबनान के अतिग्रहण के दौरान इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने हमसे बल देकर कहा कि इस्राईल लेबनान में असमंजस का शिकार है, न उसमें भाग खड़े होने का साहस है और न ही बाक़ी रहने का साहस और न उसमें आगे बढ़ने का ही साहस है। थोड़ा सा धैर्य करो और मामले के गुज़रने की थोड़ी प्रतीक्षा करो। सैयद हसन नसरुल्लाह वरिष्ठ नेता से अपनी भेंट के बारे में कहते हैं कि उन्होंने हमसे बल देकर कहा कि लेबनान में आपकी विजय निकट है, इतनी निकट कि आप स्वयं भी इसकी कल्पना नहीं कर सकते। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने यह बात उस समय कही जब दक्षिणी लेबनान पर छाया वातावरण पूर्ण रूप से हिज़बुल्लाह के विरुद्ध था और ज़ायोनियों पर विजय की कल्पना लगभग धूमिल हो गयी थी। सैयद हसन नसरुल्लाह कहते हैं कि हम प्रतीक्षा करने लगे और हमने देखा तो भाग्य ने वही लिखा और प्रधानमंत्री बनने के बाद एहूद बराक ने जुलाई वर्ष 1999 में दक्षिणी लेबनान से निकल भागने का निर्णय कर लिया।
    सैयद हसन नसरुल्लाह ने वर्ष 2006 के 33 दिवसीय युद्ध के बारे में वरिष्ठ नेता के पूर्वाग्रह के बारे में कहा कि उस समय इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने हिज़बुल्लाह के विरुद्ध अमरीका और कुछ अरब तथा पश्चिमी सरकारों के खुले समर्थन से ज़ायोनी सैनिकों के आक्रमण को इस्लाम के आरंभिक काल में अहज़ाब नामक युद्ध की भांति बताया था और यह परिणाम निकाला था कि अंततः विजय हिज़बुल्लाह के संघर्षकर्ताओं की होगी और हुआ भी वही।
    वरिष्ठ नेता के विरोधियों की ज़बान से उनके कुशल प्रबंधन की विशेषताओं के बारे में सुनना उनके अद्वितीय नेतत्व को दर्शाता है। बीबीसी टीवी चैनल जिसका वित्तपोषण ब्रिटिश सरकार की ओर से होता है और इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता और इस्लामी व्यवस्था के विरुद्ध ब्रिटेन की नीतियों को आगे बढ़ाता है, 11 सितंबर वर्ष 2011 को एक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता के बारे में इस प्रकार स्वीकार्य करता है। जो चीज़ वरिष्ठ नेता को ईरान के इतिहास के अन्य नेताओं से अलग करती है वह राजनीति पर उनका व्यवहारिक व तार्किक दष्टिकोण है। बीबीसी आगे कहता है कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता कभी भी सत्ता हथियाने के प्रयास में नहीं रहे और शत्रुओं के मुक़ाबले में उतावले पन की कार्यवाही नहीं करते।
    रोज़नेट वेबसाइट भी जो सदैव इस्लामी क्रांति और वरिष्ठ नेता के संबंध में अपशब्द कहती रहती है, वरिष्ठ नेता के बारे में एक अप्रत्याशित क़दम उठाते हुए लिखती है कि आप चाहे ईरान के वरिष्ठ नेता के धुर विरोधी हों या सबसे पक्के शत्रु, या सबसे बड़े समर्थक या बीच की चीज़ हों, आपको संतुलित होना चाहिए, वरिष्ठ नेता की तीव्र होशीयारी और उनकी क्षमताओं का आप इन्कार नहीं कर सकते। ईरान की राजनीति के मंच पर श्रेष्ठतम स्थान पर उनकी तीस वर्षों से अधिक की उपस्थिति और इस्लामी क्रांति के दौरान की परिस्थितियों से लेकर आठ वर्षीय थोपे गये युद्ध तक के उनके अद्वितीय अनुभवों से वह राजनीति, सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय और सामाजिक क्षेत्रों में सभी के लोकप्रिय राजनेता में परिवर्तित हो गये। निसंदेह राजनीति के लंबे अंतराल में उनके द्वारा प्राप्त इन्हीं मूल्यवान अनुभवों और क्षमताओं के कारण वह ईरान के वरिष्ठ नेतृत्व में इमाम ख़ुमैनी की करिशमाई छवि का विकल्प बन सके।

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