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    आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी – 3

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    आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी उन बुद्धिजीवियों में शामिल हैं जिन्होंने विभिन्न विषयों पर अत्यन्त मूल्यवान पुस्तकें लिखी हैं। उनकी लगभग सभी किताबें अत्याधिक लाभदायक और उपयोगी हैं और उनके भाषणों की भी समाज के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके २०० से भी अधिक भाषणों को १६ किताबों में संकलित किया गया है।
    दुआए मकारेमुल अखलाख पैगम्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम ज़ैनुलआबेदीन की प्रार्थनाओं का संकलन है जिनमें नैतिकता व शिष्टाचार के बहुमूल्य सिद्धान्तों का बड़े अच्छे अंदाज़ में वर्णन किया गया है। नैतिकता के प्रचारक दुआओं के इस संकलन को मानव की नैतिकता की रचना का एक कार्यक्रम समझते हैं और अब तक प्रार्थनाओं के इस संकलन की कई समीक्षाएं लिखी गयी हैं। आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी ने भी इस पर अत्याधिक स्पष्ट और विस्तृत समीक्षा लिखी है और उसे तीन किताबों में छापा भी गया है। शरहे व तफसीरे दुआए मकारेमुल अखलाक़ उनकी इसी व्याख्या का नाम है जो पढ़ने वालों का मन मोह लेती है। आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी ने वर्षों तक पैगम्बरे इस्लाम के परिजनों के कथनों का अध्ययन किया और उनकी कई आयामों से समीक्षा की इसी लिए उनकी इस किताब में दुआ के वाक्यों की व्याख्या के साथ ही उसी उपलक्ष्य में पैगम्बरे इस्लाम के परिजनों के किसी न किसी कथन का भी वर्णन किया गया है।

    आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी की यह रचना, भाषण के बजाए कोई शोध लगती है। आयातुल्लाह फलसफी ने अपनी इस किताब में जटिल नैतिक सिद्धान्तों के वर्णन के लिए सच्ची कहानियों, एतिहासिक घटनाओं और रोचक तथ्यों का सहारा लिया है तथा इसके साथ ही उन्होंने कविता और कहावतों का भी प्रयोग किया है। इस किताब में हर अध्याय का अत्यन्त सुव्यस्थित रूप में वर्णन भी इस किताब के महत्व को बढ़ाता है।

    जवान अज़ नज़रे अक्ल व एहसासात अर्थात युवा बुद्धि व भावना की दृष्टि से नामक किताब भी आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी की एक अन्य महत्वपूर्ण रचना है जिसे दो जिल्दों में छापा गया है। इस किताब का विषय युवा पीढ़ी है और इसमें कुरआने मजीद की आयतों और ईश्वरीय मार्गदर्शकों के कथनों के साथ ही साथ मनोवैज्ञानिकों के शोधों और आलेखों पर भी ध्यान दिया गया है। आयतुल्लाह फलसफी की दृष्टि में मनुष्य के बारे में अधिकांश मनोवैज्ञानिकों के विचार, भौतिकता पर आधारित हैं इसी लिए वे मनुष्य के विश्लेषण विषय कर युवाओं के विश्लेषण के दौरान उसकी आत्मा तथा ईश्वर की खोजी उसकी प्रवृत्ति पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। इसी के साथ यह भी याद दिलाना आवश्यक है कि मनोवैज्ञानिकों के अध्ययन, युवाओं की आवश्यकताओं, योग्यताओं, व्यवहारों और भावनाओं के बारे में हमे बहुत सी एसी बातों से अवगत कराते हैं जिनका जानना हर माता पिता के लिए आवश्यक होता है और इन परिणामों को अभिभावकों और राष्ट्रध्यक्षों के लिए योजना बनाने हेतु आवश्यक समझा जाता है।

    युवा बुद्धि और भावना की दृष्टि में नामक किताब में बहुत से मूल्यवान और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गयी है। उसके विषयों में, युवास्था का मूल्य, युवास्था, युवा की रूचियां, युवाओं की भावनाओं में संतुलन बनाना, युवाओं में धर्म की भावना तथा युवाओं से संबंधित अन्य बहुत से विषय शामिल हैं।

    स्वर्गीय आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी ने अपनी इस किताब में युवास्था को जीवन की उच्च चोटियों तक पहुंचने का सब से अच्छा अवसर समझते हैं और युवा के मन को आंकाक्षाओं, कामनाओं, प्रेम व आशा का भंडार कहते हैं। इस रचना को अत्यन्त तार्किक रूप से संकलित किया गया है और उसमें अत्यन्त लाभदायक विषयों पर चर्चा की गयी है।

    इस किताब में कहा गया है कि, पवित्र इस्लाम धर्म ने १४०० वर्ष पूर्व अपने कल्याणकारी व व्यापक कार्यक्रमों द्वारा युवाओं पर विशष रूप से ध्यान दिया है और इस धर्म ने युवाओं पर भौतिक, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक, सांसारिक और परलोकिक दृष्टि से नज़र रखी है। पैगम्बरे इस्लाम स्वंय भी युवाओं पर विशेष ध्यान देते थे। उन्होंने विभिन्न अवसरों पर अत्याधिक महत्वपूर्ण काम युवाओं के हवाले किये और खुले शब्दों में तथा अपनी कथनी व करनी द्वारा युवाओं का समर्थन किया है किंतु अज्ञानता के उस काल में यह काम इतना सरल भी नहीं था क्योंकि उस काल के बूढ़े लोग किसी भी दशा में युवाओं को अगुवा बनाने और उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व दिये जाने के पक्ष में नहीं थे किंतु पैगम्बरे इस्लाम न अपनी शैली पर डटे रहे और इस प्रकार के सभी विचारों का निवारण किया और अन्ततः उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता पूर्ण कथनों से अपने समाज के वृद्धि लोगों को युवाओं के पीछे चलने पर तैयार भी किया या कम से कम उन्हें चुप करा दिया।

    आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी अपनी किताब , बच्चा, विरासत और प्रशिक्षण की दृष्टि से में लिखते हैं एसी बहुत सी माताएं हैं जिन्हें अपने बच्चों को बचपन में बुरी बातें सिखायी हैं और इस प्रकार से उनका पूरा जीवन तबाह कर दिया। एसे बहुत से पिता हैं जिन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा व दीक्षा में लापरवाही बरती और बचपन से ही उन्हें पाप की सभाओं में ले गये तथा अपने बच्चों की जिज्ञासापूर्ण आंखों क सामने पाप किये और इसप्रकार से उन्होंने अपने बच्चे के पवित्र ह्रदय को पापों से भरे वातावरण में प्रदूषित किया और कुछ ने तो अधिक दुस्साहस दिखाते हुए अपने बच्चे को पापों पर प्रोत्साहित भी किया। पैगम्बरे इस्लाम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम से कहा है कि ईश्वर की धिक्कार हो उस पिता और माता पर जो अपनी संतान का गलत ढंग से प्रशिक्षण करता है। जो माता पिता पवित्र और धर्म के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं वही योग्य व पवित्र संतान का प्रशिक्षण कर सकते हैं और उन्हें भी अपनी ही भांति ईश्वर पर भरोसा करने वाला बनाते हैं।

    यह किताब दो जिल्दों में संकलित की गयी है और यह भी उनकी अत्याधिक उपयोगी और महत्वपूर्ण पुस्तकों में से एक है। इस पुस्तकों में इस्लाम और पश्चिमी बुद्धिजीवियों के दृष्टिकोणों के अनुसार एसे महत्वपूर्ण कारकों की समीक्षा की गयी जो संतान के पालन पोषण में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं और इन कारकों का वर्णन उन्होंने ३० विभिन्न अध्यायों में किया है। उन्होंने पाप और संतान के जन्म में उसके प्रभाव, गर्भाशय में संतान के कल्याण व विनाश की शैली, ईमान के आधार पर पालन पोषण, न्याय व स्वतंत्रता के वातावरण में पालन पोषण, प्रशिक्षण के लिए माता पिता के दायित्व, बच्चे में सच्चाई , मनुष्य के मार्गदर्शन में ईश्वरीय दूतों की भूमिका और बच्चे के प्रशिक्षण में घराने की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की है। आयातुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी ने अपनी इस किताब में बच्चों की प्रवृत्ति उनके प्रशिक्षण और विरासत के बारे में चर्चा की है और इस संदर्भ में उन्होंने महान बुद्धिजीवियों के कथनों का उल्लेख किया है तथा कुछ मतों पर आलोचनात्मक दृष्टि डालते हुए इसलाम की विचारधारा का विस्तार से वर्णन किया है।
    आयतुलकुर्सी पयामे आसेमानिए तौहीद अर्थात आयतुल कुर्सी , एकेश्वरवाद का आसमानी संदेश भी आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी की प्रसिद्ध रचनाओं में से है। इस किताब में कुरआने मजीद की आयतुल कुर्सी कही जाने वाली आयमों की सरल व्याख्या की गयी है। वे इन आयतों का उद्देश्य का वर्णन इस प्रकार करते हैः उद्देश्य यह है कि केवल वास्तविक ईश्वर का ही लोगों से परिचय कराया जाए और उनमें एकेश्वरवाद की भावना पैदा की जाए तथा उन्हें अनेकेश्वरवाद और अन्य लोगों की दासता से मुक्ति प्रदान की जाए।

    आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी ने अपनी इस किताब में उपासना और पूजने में मनुष्य की स्वतंत्रता का उल्लेख किया है और ईश्वर की उपासना को स्वीकार करने को, सामाजिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में न्यापूर्ण नियमों को स्वीकारने की भांति समझते हैं। वह ईश्वर के जीवित होने के गुण पर चर्चा करते हुए कहते हैं कि आयतुलकुर्सी में ईश्वर का सब से पहला जो गुण बताया गया है वह जीवित होने का गुण है अर्थात वह ईश्वर जो उपासना योग्य है जीवित है और पर्वत व नदी व आग व सूर्य व चंद्रमा की भांति नहीं है।

    आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी ने प्रलय के बारे में भी एक किताब लिखी है जिसका अत्याधिक महत्व है क्योंकि इस किताब का विषय, इस्लाम के मूल नियमों में से है और उस पर ईमान मनुष्य को पापों से दूर रखता है। प्रलय शरीर व आत्मा की दृष्टि से नामक किताब वास्तव में आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी के उन भाषणों का संकलन है जो उन्होंने वर्ष १९७१ के रमज़ान के महीने में दिये थे। उनके इन भाषणों का तीन जिल्दों में संकलन किया गया है। उन्होंने अपनी इस किताब में एक मुसलमान के लिए अत्याधिक महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख किया है। इस किताब में पैगम्बरों और क़यामत का मत, कयामत पर ईमान, दायित्यबोध, मृत्यु और परलोक के जीवन का आरंभ, मध्यकाल और पुर्नजन्म का खंडन, प्रलय और हिसाब का दिन, स्वर्ग व नर्क जैसे विषयों पर अत्याधिक विस्तार के साथ चर्चा की गयी है
    आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी फलसफी के भाषण और उनकी रचनाएं इतनी अधिक हैं कि उनका एक या कुछ कार्यक्रमों में वर्णन संभव नहीं है इसी लिए हम ने उसकी एक झलक आप की सेवा में पेश की है अगले कार्यक्रम तक के लिए अनुमति दें।

     

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