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    आलस्य का फल!

    आलस्य का फल!
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    पुराने समय की बात है हज़रत दाऊद नबी के काल में एक व्यक्ति रहता था जो आलस्य और सुस्ती के लिए बहुत बदनाम था। यह आलसी व्यक्ति किसी काम को हाथ नहीं लगाता था और दिन रात दुआ करता है कि हे ईश्वर बिना परिश्रम और कठिनाई के मुझे बहुत दौलत प्रदान कर। लोग उसका उपहास करते थे और कहते थे कि शर्म करो कब तक घर में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहोगे और दुआ मांगते रहोगे और ईश्वर से बिना परिश्रम की आजीविका की प्रार्थना करते रहोगे। जाओ काम धाम करो क्या तुमने यह नहीं सुना कि तुम कर्म करो कृपा करना ईश्वर का काम है। कब तक इस प्रकार से जीवन व्यतीत करते रहोगे। जाओ काम करो और किसी पर निर्भर न रहो। आलसी व्यक्ति ने लोगों के उपदेशों को एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया और वह दिन रात उसी प्रकार ईश्वर के समक्ष गिड़गिड़ा रहता था और दुआएं करता रहता था। वह लोगों के इस प्रश्न के उत्तर में कि काम क्यों नहीं करते, कहता था कि ज़मीन के तो पैर नहीं है कि वह चले किन्तु ईश्वर बादलों को वर्षा के लिए भेजता है। क्या ऐसा हो सकता है कि वह मुझे अपनी विभूतियों से वंचित रखे। लोग उससे कहते थे कि क्या तुम नहीं देखते कि हज़रत दाऊद की पवित्रता, उनकी सुन्दर आवाज़ और लोगों के निकट उनके सम्मान के बावजूद वह भी काम करते हैं और ईश्वर से बिना परिश्रम की आजीविका ईश्वर से नहीं मांगते और तुम हो कि ईश्वर से बिना हिले डुले और निठल्ली आजीविका मांगते हो किन्तु व्यक्ति ने वही किया और उसने लोगों की बात अनसुनी कर दी। दिन इसी प्रकार गुज़रते रहे। एक दिन अचानक एक गाय उस सुस्त व्यक्ति के घर में घुस गयी और इधर उधर कूदने फांदने लगी। सुस्त व्यक्ति ने इधर उधर देखा और उसने समय को हाथ से गंवाए बिना उसे ज़िब्ह कर लिया। उसने गाय का थोड़ा मांस खाया और शेष को ईश्वर के मार्ग में ख़र्च कर दिया क्योंकि उसने उसकी दुआएं स्वीकार की और बिना किसी परिश्रम के उसे आजीविका प्रदान की। गाय का मालिक गाय को ढूंढते हुए उस सुस्त व्यक्ति के पास आया और उससे अपनी गाय मांगने लगा और उसने कहा कि किस की अनुमति से तुमने मेरी गाय को ज़िब्ह किया और लोगों को उसका मांस बांटा। व्यक्ति ने ठंडे स्वर में कहाः क्या कहा तुमने? तुम्हारी गाय कहा थी, उस गाय को ईश्वर ने अनदेखे संसार अर्थात ग़ैब से मुझे प्रदान की। मैंने लंबे समय तक ईश्वर से दुआ मांगी और उसने मेरी प्रार्थना स्वीकार की, जाओ अपना काम करो और अल्लाह से अपनी आजीविका मांगो न कि बंदों से। गाय का मालिक क्रोधित हुआ और उसने उस सुस्त व्यक्ति के गरेबान को पकड़ा और दो चार घूंसे रसीद किये और खींचता हुआ ईश्वर के नबी दाऊद के पास ले गया ताकि वह उसके बारे में फ़ैसला करें। गाय के मालिक ने आरंभ से अंत तक सभी बात हज़रत दाऊद से बयान की। जो लोग वहां एकत्रित हुए थे उन सभी ने गवाही दी कि यह सही कह रहा है और यह सुस्त और निठल्ला है और दुआ व प्रार्थना करने के अतिरिक्त वह कुछ नहीं करता। हज़रत दाऊद ने जब गाय के मालिक और लोगों की गवाही सुनी तो उन्होंने आलसी व्यक्ति से पूछा, हे व्यक्ति तुमने ऐसा क्यों किया? क्यों उस गाय को ज़िब्ह किया जो तुम्हारी नहीं थी? इधर उधर की बात न करो और सही सही विस्तार पूर्वक मुझे सब कुछ बताओ। आलसी व्यक्ति ने जिसने आज तक एक चींटी को भी परेशान नहीं किया, सिर झुका कर कहने लगा कि सभी लोग जानते हैं कि मैं सात वर्षों से यही प्रार्थना कर रहा हूं, जब मैंने गाय को देखा तो मुझे विश्वास हो गया कि यह गाय ईश्वर ने मुझे अनदेखे संसार से भेजी है। मैं अब भी इस बारे में पूरा विश्वास रखता हूं। मैं चोर नहीं हूं। मेरे दादा बहुत धनी, स्वाभिमानी और कल्याणकारी व्यक्ति थे और सदैव ही निर्धन और पिछड़े लोगों की सहायता करते थे। मेरे दादा इसी नगर में रहते थे और मैं अपने माता पिता के साथ दूसरे नगर में रहता था, उनका देहान्त हो गया तो मैं इस नगर में आ गया ताकि अपने दादा के साथ रहूं। मुझे दादा के बारे में कुछ पता नहीं चला, उनकी धन दौलत का कोई चिन्ह मुझे नहीं मिला, जैसे अचानक सब कुछ पानी होकर ज़मीन पर बह गया। अब मैं वर्षों से इस नगर में अकेला और बेचारा हूं और प्रार्थना के अतिरिक्त मेरा पास कोई कार्य नहीं है। मैंने उस गाय को क़ुर्बानी के रुप में ज़िब्ह किया।दाऊद नबी ने कहा कि इन बातों को औचित्य के रुप में पेश नहीं किया जा सकता। कोई ठोस तर्क दो। तुमने धर्म के अनुसार पाप किया है और उसका दंड तुम्हें मिलेगा और इस व्यक्ति को हुई हानि की भरपाई करो।आलसी व्यक्ति ने कहाः हे दाऊद नबी, आप तो वही बातें कर रहे हैं जो यह अत्याचारी लोग कर रहे हैं, आप भी मेरी बातों पर विश्वास नहीं कर रहे हैं? मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।हज़रत दाऊद नबी की समझ में कुछ नहीं आया उन्होंने गाय के मालिक से कहा कि हे व्यक्ति, इस मामले का फ़ैसला करना बहुत कठिन है। अभी तक इस प्रकार का मामला मेरे सामने कभी नहीं आया। इस मामले के बारे में फ़ैसला करने के लिए मुझे ईश्वर से एकांत में प्रार्थना करनी होगी। तुम विश्वास रखो कि यदि तुम सत्य पर हो तो तुम्हें तुम्हारा अधिकार अवश्य मिलेगा। यह जान लो कि हक़दार को उसका हक़ अवश्य मिलेगा।…जारी…