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    आलिम के पीछे नमाज़ पढ़ना

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    सवालः हम कुछ जवान हैं जो मजलिसों और इमामबाड़ों में एक साथ बैठते हैं जब नमाज़ का

    वक़्त होता है तो अपने बीच में से किसी एक आदिल इंसान को नमाज़े जमाअत के लिए आगे बढ़ा देते हैं

    लेकिन कुछ लोग इस नमाज़ पर विरोध करते हैं और कहते हैं कि इमाम ख़ुमैनी ने ग़ैरे आलिम दीन के

    पीछे नमाज़ पढ़ने को ह़राम क़रार दिया है पस हमारी ज़िम्मेदारी क्या है?
    जवाबः यह जवान अगर आसानी से ऐसे आलिमे दीन के पीछे नमाज़ पढ़ सकते हैं जिसको वह इक़्तेदा

    (पीछे नमाज़ पढ़ना) के क़ाबिल समझते हों चाहे उन्हें गावँ या शहर की मस्जिद मे जाना पड़े तो इस सूरत में ग़ैर

    आलिम दीन की इक़्तेदा नहीं करनी चाहिए बल्कि ग़ैर आलिमे दीन की इक़्तेदा कुछ सूरतों में मुश्किल पैदा कर देती है।