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    आस पास और उसकी साज सज्जा

    आस पास और उसकी साज सज्जा
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    एक क्षण के लिए आप अपनी आंखों को बंद करें और अपने मन में एक सुन्दर और मनोरम दृश्य कल्पना करें। उदाहरण स्वरूप हरा भरा बाग़, ऊंचे ऊंचे पर्वत और झर झर करते प्रकृति के आंचल में बहते हुए झरने और शांति से बहने वाली नदियां, नील गगन में उड़ते व इठलाते पक्षी, विभिन्न वृक्ष जिनमें रंगबिरंगे फले लगे हुए हों और अनेक प्रकार के फल जिनका अपना अलग ही रंग व सुगंध हो। इस प्रकार के वातावरण से मनुष्य की आत्मा प्रफुल्लित हो उठती है। थोड़ा सा ध्यान देने पर हमको समझ में आ जाता है कि इन सारी सुन्दरता में जो वस्तु चार चांद लगा रही है वह इसकी सुन्दरत, इसका समन्वय और व्यवस्था है। यह सब इस बात को दर्शाती हैं कि सुष्टि को सुन्दरता प्रदान करने वाला ईश्वर सर्वसमर्थ, तत्वदर्शी व ज्ञानी है। सुन्दर व मनोरम वातावरण में उपस्थिति, मनुष्य को आकर्षक आनंद प्रदान करता है क्योंकि ईश्वर ने मनुष्य के भीतर सुन्दरता की रुझान पैदा किया है। मनुष्य अपनी प्रवृत्ति की मांग के अनुसार, सुन्दरता और स्वच्छता को पसंद करता है और उसे अव्यवस्था और गंदगी से चिढ़ है।

    सत्य यह है कि हम अपने आस पास के वातावरण को सुन्दर बनाने में किस सीमा तक प्रयास करते हैं? वह वातावरण जिसमें हम अधिकतर समय व्यतीत करते हैं और जो हमारे मस्तिष्क व शरीर को प्रभावित करते हैं। आज विश्व के बहुत से देशों में नगरों की डिज़ाइनिंग और काम के वातावरण को अच्छा बनाने के लिए मनोवैज्ञानिकों की सहायता लेते हैं, क्योंकि नगरों व गली कूचों का साज सज्जा व पूरे नगर में उचित रंगों का प्रयोग, मनुष्य की मानसिकता पर प्रभाव डालता है।

    कूड़ों से भरी हुई सड़कें, ख़राब व गिरी हुई दीवारें, सूखे हुए वृक्ष, तथा अलग अलग रंग, उन कारकों में से हैं जो मनुष्य के मन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं और जो भी प्रयास करता है कि इस प्रकार के दृश्यों का कम से कम सामना हो। इसके मुक़ाबले में, सुन्दर वातावरण, साज सज्जा और शांति, एक चुंबक की भांति है जो आत्मा को आपनी ओर खींचता है। आस पास के वातावरण की साज सज्जा, शांति और मन की केन्द्रियता पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि आत्मिक बिखराव और परेशानियों को दूर करने के मार्गों में से एक सफ़ाई, सुथराई, जीवन में काम आने वाली चीज़ों को व्यवस्थित करना और घर से अनावश्यक चीज़ों को बाहर निकालना है।

    एक बार अपने घर और आस पास पर एक नज़र डालें, छोटा या बड़ा घर होन या उचित वित्तीय स्थिति की अनदेखी करते हुए क्या हम अपने घर को अपने और अपने परिवार के विश्राम और शांति के लिए उचित घर बनाने में सफल रहे हैं। क्या घर का वातावरण इतना अच्छा और दिल को भाने वाला है जिसके लिए परिवार के सदस्य परेशान हों, वह गलि कूचा, मोहल्ला और नगर जिसमें हम रहते हैं और हमारी संतान का जिसमें प्रशिक्षण होता है, क्या उचित प्रकाश, हरियाली, रंग और साफ़ सफ़ाई रखता है?

    मनोचिकित्सकों के अनुसार घर और जीवन में प्रफुल्लता, उत्साह और स्वास्थ्य का वातावरण उत्पन्न करना, घर की स्थिति और वहां पर चीज़ों को सही ढंग से रखे जाने पर निर्भर होता है। वास्तव में उनका यह मानना है कि जिस घर में व्यवस्था का ध्यान न दिया जाए और चीज़ें इधर उधर पड़ी हुई हों तो वह घर कभी भी परिवार के सदस्यों को शांति और प्रफुल्लता नहीं दिला सकता। हो सकता है कि पहली नज़र में इन बिन्दुओं का महत्त्व समझ में न आये किन्तु जब गहन समीक्षा की जाएगी तो समझ में आयेगा कि साज सज्जा का मानसिक स्वास्थ्य से सीधा है।

    मनोचिकित्सकों के अनुसार मनुष्य की सृष्टि इस प्रकार की गयी है कि वह सदैव एक ढर्रे पर चलने से बचता है और जीवन में नये नये परिवर्तनों का स्वागत करता है क्योंकि विविधता और सही परिवर्तन, मनुष्य के जीवन के विदित रूप को आनंदमयी बना देते हैं। मनुष्य और उसके आस पास की साज सज्जा, उसकी आंतरिक प्रफुल्लता, भीतरी व्यवस्था और उसके सुख्खड़पन का परिणाम है। जैस कि हमने बताया कि विदित श्रंगार और साफ़ सफ़ाई, व्यक्ति को आकर्षित करने और उसकी लोकप्रियता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मानसिक शांति का कारक बनते हैं। इस्लाम की दृष्टि में मनुष्य की प्रवृत्ति की मांग यह होती है कि वह सदैव सुन्दरता और समन्वय की खोज में रहता है और गंदगी से घृणा करता है। चूंकि इस्लाम धर्म प्रकृति का धर्म है इसीलिए वह मनुष्य से मांग करता है कि वह अपने विदित बुरे रंग रूप को स्वयं से और अपने जीवन से दूर रखें और विदित साज सज्जा के साथ समाज में उपस्थित रहें। इस्लाम धर्म लोगों से मांग करता है कि वह अपने भीतर पायी जाने वाली साज सज्जा से अनभिज्ञ न रहें और अधिक से अधिक स्वयं को सुन्दर बनाये रखने पर ध्यान दें और इस सुन्दरता आत्मिक परिपूर्णता तक पहुंचने के लिए लाभ उठाएं।

    सूरए आराफ़ की आयत संख्या 32 में आया है कि (हे पैग़म्बर! ईमान वालों से) कह दीजिए कि किस ने उस शोभा को, जिसे ईश्वर ने अपने बंदों के लिए पैदा किया था और पवित्र रोज़ी को वर्जित कर दिया है? कह दीजिए कि ये अनुकंपाएं प्रलय में केवल उन लोगों के लिए हैं जो संसार के जीवन में ईमान लाए। हम इसी प्रकार, ज्ञान वालों के लिए अपनी आयतों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं।

    इस्लाम धर्म की शिक्षाओं की समीक्षा से हम इस वास्तविकता तक पहुंचते हैं कि यह धर्म साज सज्जा और शोभा पर सकारात्मक दृष्टि रखता है और मानसिक स्वास्थ्य के लिए इससे भी लाभ उठाता है। पवित्र क़ुरआन ने बारम्बार सृष्टि में पायी जाने वाली सुन्दरता को बयान किया है और अपनी सुन्दर सृष्टि की बोलती तस्वीर पेश की है। पवित्र क़ुरआन की आयतें मनुष्य को प्रकृति में पायी जाने वाली व्यवस्था,श्रंगार और समन्वय की ओर ध्यान आकर्षित कराती हैं। मनुष्य अपनी सृष्टि पर ध्यान देने की छत्रछाया में अपने सृष्टिकर्ता को ओर झुकाव पैदा करता है और इस हतप्रभ करने वाले समन्वय से अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में प्रेरणा प्राप्त करता है। जब हम इस्लाम धर्म के महापुरुषों की करनी व कथनी पर ध्यान देते हैं तो हमें समझ में आता है कि आस पास और व्यक्तिगत साज सज्जा, उनके निकट बहुत आवश्यक चीज़ थी। उदाहरण स्वरूप साज सज्जा के महत्त्व पर हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के हवाले से एक कथन बयान हुआ कि जब भी ईश्वर अपने बंदे को कोई अनुकंपा देता है तो चाहता है कि उसका प्रभाव उसमें देखे। उनसे पूछा गया कि कैसे? इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम ने कहा साफ़ सुथरे कपड़े पहनो, सुगंध का प्रयोग करो, अपने घरों को सुव्यवस्थित करो और गंदगी को अपने घर से दूर करें।

    जब स्थान की साज सज्जा का ध्यान रखा जाए वहां से अनावश्यक वस्तुओं को निकाल दें और बहुत ही अच्छे ढंग से आवश्यक वस्तुओं को सजाएं। अनावश्यक वस्तुएं सामान्य रूप से लाभहीन नहीं होतीं किन्तु रहने के स्थान पर उनके पाये जाने का कोई तर्क नहीं है। इस आधार पर हर वस्तु के बारे में उनके उपयोग और लाभ के अनुसार फ़ैसला किया जाए। संभव है कि यह फ़ैसला वस्तु को दूसरों को दिए जाने, बेचने, पुनः प्रयोग में लाने हेतु बनाने या किसी अन्य स्थान पर उसके भंडारण पर आधारित हो। अनावश्यक वस्तुओं को हटाने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और इसके बाद से आप के रहने का वातावरण शांत, उत्साह वर्धक और अच्छा होगा। संभव है कि आप अपने घर की डिज़ाइनिंग से पूर्ण रूप से राज़ी हों किन्तु छोटी छोटी वस्तुओं के सुधार से वांछित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

    पूर्ण रूप से प्रदूषण के कारकों से संघर्ष करना, टूटे फूटे स्थानों का पुनर्निमाण करना तथा रहने के स्थान की साफ़ सफ़ाई करना, रहने के वातावरण की साज सज्जा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनावश्यक वस्तुओं से आवश्यक वस्तुओं को अलग करना और अनावश्यक वस्तुओं को काम के स्थान से अलग करना और जो वस्तु बचे उन्हें सही ढंग से सजाना और रखना बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

    वस्तुओं को सुव्यवस्थित करने के लिए आवश्यक है कि उनके लिए उचित स्थान दृष्टिगत रखा जाए। वस्तुओं को सही स्थान पर रखने के लिए सबसे उचित मार्ग यह है कि उनको श्रेणीबद्ध करना और उनको सही स्थान पर रखना है। अब जबकि अनावश्यक वस्तुएं घर से बाहर निकल गयी हैं तो आवश्यक वस्तुएं स्वयं ही उनके स्थान पर आ जाएंगी और फिर उनकी साफ़ सफ़ाई और उनको साफ़ सुथरा रखने की बारी होती है। इस बिन्दु की अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि समस्त स्थानों को साफ़ सुथरा रखना है न केवल उन स्थानों की जहां अधिकतर नज़र पड़ती है। रहने के स्थान से धूल व मिट्टी की सफ़ाई पूर्ण रूप से होनी चाहिए। सफ़ाई सुथराई एक प्रकार की पुनर्निरिक्षण भी समझा जाता है। साफ़ सफ़ाई के समय, छोटी छोटी समस्याएं सामने आती हैं, ग़ायब हुई वस्तुएं मिलती हैं और उनकी छोटी छोटी कमियां सामने आती हैं।

    घर की साज सज्जा में जो वस्तुए बयान की गयी हैं, उन्हें कार्यक्षेत्र की साफ़ सफ़ाई में प्रयोग किया जा सकता है। स्पष्ट है कि आदर्श व सुसज्जित वातावरण को पाने के लिए निर्धारित कार्यक्रम की आवश्यकता होती है ताकि कार्यक्षेत्र और घर के वातावरण में पाज़ेटिव ऊर्जा प्राप्त हो। घर में फूल और गुलदस्तों और आकर्षक व सुन्दर रंगों का प्रयोग और इसी प्रकार प्राकृतिक प्रकाश से लाभ उठना, कार्यक्षेत्र की सुन्दरता और मन की शांति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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