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    इमाम (अ) का निर्वाचन करना किस का दायित्व है?

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    मुस्लमान के दर्मियान गल्त फह्मि के कारण से शिया और सुन्नी में दो प्रकार भाग हो गये। शियों के अक़ीदा व यक़ीन है, कि पवित्र क़ुराने मजीद और अहले बैत (अ) की हदीस के मुताबिक़ इमामत रिसालत की समस्त प्रकार की दायित्व सम्पूर्ण करेगें। पैग़म्बरे अकरम (स.) अल्लाह के निर्देश से आपने स्थान पर किसी को बैठाके गये और समाज व इस्लाम की समस्त प्रकार दायित्व उन के उपर छोढ़ गये । ताकि इस्लाम की समस्या और उस के कठिन विषय को समाधान करे, इस विनापर शिया हज़रात इमामत के बहस को अपना अस्ल अक़ीदा समझते है। और मसाएले नबूवत को आपने जीवन का एक हिस्सा क़रार देते है। इमाम और नबूवत की बहस तक़्लीद जैसा नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति पर वाजिब है की उस विषय को दलील और प्रमाण के साथ क़बूल करे।

    हाँ! नबूवत और इमामत एक अपर से पृथक नहीं हो सकती। बल्के यही दो चीज़ इस्लाम के गुरुत्व और मोहिम बर्नामे में शरीक है, सिपासः इन दोनों में पार्तक यही हैं कि पैग़म्बरे अकरम (स.) अल्लाह के निर्देश और वही के माध्यम से इस्लाम की बुनयाद रखा है. और इमाम मासूम (अ) उस इस्लाम को पूरे तरीके से बयान और उस के समस्त प्रकार के अध्याय को तफ़सीर के साथ बयान किया है। चूकिं पैग़म्बरे अकरम (स.) का ज़माना और शरायेत निर्देश नहीं दिया था की आप इस्लाम को बयान करें।

    इमाम मासूम (अ) इस्लामी रह्बरी के व्यतीत, इस्लाम के क़ावानीन और मक्तब के नेता भी है। ताकि लोगों को पथभ्रष्ट और गुमराही फ़िक्र से परित्राण दिलाएं, समाज के समस्त प्रकार मद्दि व मानबी को परिपूर्न करे, यह समस्त गूणावली प्रमाण करता है कि पैग़म्बरे अकरम (स.)की जान्शीन समाज के समस्त प्रकार दायित्व और रह्बरी उन के हाथों में है। मिसालः जिस तरह पैग़म्बरे अकरम (स.) समस्त प्रकार गुणावली में एक व्यक्तित्व रखते थें, और समस्त प्रकार की गुनाह व भूल चूक से पाक व पवित्र थें, और इस्मत व तहारत के मालिक थें, इल्म व ज्ञान में दीन व दुनियावी में वेनज़ीर थे, उचित यही हैं कि समस्त प्रकार की आलूदगी से पवित्र रहे ताकि इस्लाम को मज़बूत करें उसी तरह इमामत का स्थान भी है।