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    इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम का पाक सर कहां दफ़्न हुआ

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    सवालः.8इमाम ह़ुसैन (अ स) का सर कहाँ दफ़्न हुआ?
    ख़ास तौर पर इमाम ह़ुसैन (अ स) के मुबारक सर और आम तौर पर दूसरे कर्बला के शहीदों के मुबारक सरों के दफ़्न होने की जगह के बारे में शिया व अहले सुन्नत की इतिहास की किताबों तथा शियों की हदीसों की किताबों में अनगिनत मतभेद दिखाई देता है हालांकि बयान होने वाले नज़रियों में रिसर्च की ज़रूरत है।

    लेकिन इस समय सबसे अधिक मशहूर कथन (जिसे शियों ने क़बूल किया है।) यह है कि आपका मुबारक सर कुछ समय बाद आपके पाक जिस्म से जुड़ने के बाद कर्बला की ज़मीन पर दफ़्न हुआ।
    ज़्यादा जानकारी के लिए हम इन नज़रियों को बयान कर रहे हैः

    1, कर्बला
    यह नज़रिया मशहूर शिया उल्मा का नज़रिया है और अल्लामा मजलिसी नें इसके मशहूर होने की तरफ़ इशारा किया है। (बेह़ारुल अनवार जिल्द 45, पेज, 145)
    शैख़े सदूक़ ने फ़ातेमा बिनते इमाम अली अ. व इमाम ह़ुसैन (अ.स) की बहेन के हवाले से आपके मुबारक सर के पाक जिस्म से कर्बला में जोड़ने के बारे में एक रिवायत बयान की है। (अमाली सदूक़ पेज 231)
    लेकिन किस तरह आपका सर आपके जिस्म से जोड़ा गया इसके बारे में विभिन्न नज़रिये बयान किये गये हैं।
    कुछ लोग जैसे सय्यद इब्ने ताऊस उसे एक इलाही मामला मानते हैं कि अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत व शक्ति से चमत्कारिक रूप से अंजाम दिया है, उन्होंने इससे सम्बंधित सवाल जवाब करने से मना किया है (सय्यद इब्ने ताऊस इक़बालुल आमाल, पेज, 588)।
    कुछ ने यह कहा है कि इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने चेहलुम के (शहीद क़ाज़ी तबातबाई, रिसर्च आफ़ अव्वलीन अरबईन ह़ज़रत सय्यदुश शोहदा, जिल्द 3, पेज 304) दिन या किसी दूसरे दिन (कर्बला से) वापसी में इमाम के मुबारक सर को कर्बला में उनके पाक जिस्म के बग़ल में दफ़न किया। (लुहूफ़ पेज 232, साफ़ साफ़ इमाम सज्जाद (अ स) का नाम नहीं लिखा है)।
    लेकिन इस सिलसिले में कि क्या सच में इमाम का मुबारक सर आपके पाक जिस्म से जोड़ा गया या ज़रीह़ के बग़ल में बदन के क़रीब दफ़्न हुआ इस बारे में कोई साफ़ और स्पष्ट प्रमाण हमें नहीं मिलता है, और इस स्थान पर भी सय्यद इब्ने ताऊस ने सवाल जवाब से मना किया है। (इक़बालुल आमाल, पेज 324.. 325)
    कुछ का कहना है कि यज़ीद के ज़माने में इमाम के मुबारक सर को दमिश़्क़ के दरवाज़े पर तीन दिन लटकाये रखने के बाद उतारा गया और ह़ुकूमती ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाने में रखा गया और सुलैमान बिन अब्दुल मलिक के ज़माने तक उसी में रहा उसे निकाल कर कफ़न पहनाने के बाद दमिश्क के मुसलमानों के कब्रिस्तान में दफ़्न कर दिया उसके बाद उसके उत्तराधिकारी उमर इब्ने अबदुल अज़ीज़ ने (जिसकी ह़ुकूमत 99 से 101 तक रही) उसे कब्रिस्तान से निकाला और फ़िर मालूम न हो सका कि उसके साथ क्या किया। लेकिन उसकी दिखावे में दीन की पाबंदी के दृष्टिगत ज़्यादा सम्भावना यही है कि उसे कर्बला रवाना कर दिया। (अमीनी, मुहम्मद अमीन, मअर्रकबिल ह़ुसैनी, जिल्द 6, पेज 324)।
    हम आख़िर में बयान करेंगे कि कुछ सुन्नी उल्मा जैसे शबरावी, शबलंजी, और सिबते इब्ने हुवैज़ी ने संक्षेप में माना है कि इमाम का मुबारक सर कर्बला ही में दफ़्न हुआ है। (पिछला रिफ़्रेंस)।

    2, नजफ़े अशरफ़ ह़ज़रत अली अलैहिस्सलाम की क़ब्र के बग़ल मेः
    अल्लामा मजलिसी की इबारत तथा रिवायात की जांच पड़ताल से मालूम होता है कि इमाम का मुबारक सर नजफ़े अशरफ़ में ह़ज़रत अली (अ स) की क़ब्र के बग़ल में दफ़न हुआ है। (बेह़ारुल अनवार, जिल्द 45, पेज 145)।
    इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम अपने बेटे इस्माईल के साथ नजफ़ में अपने दादा ह़ज़रत अली (अ स) पर नमाज़ पढ़ने के बाद इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम पर सलाम भेजने वाली रिवायतें साफ़ साफ़ व स्पष्ट रूप से इमाम सादिक़ (अ.स) के ज़माने तक नजफ़ अशरफ़ में इमाम के मुबारक सर के मौजूद होने को साबित करती हैं। (पिछला रिफ़्रेंस)
    दूसरी रिवातें भी इसी बात को साबित करती हैं, यहाँ तक कि शियों की किताबों में ह़ज़रत अली (अ स) की क़ब्र के पास एक ज़ियारत, इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम के सरे मुबारक के लिए ज़िक्र हुई है। (पिछला रिफ़्रेंस)
    इमाम अ. का मुबारक सर किस तरह इस जगह पर स्थांतरित हुए इसके बारे में इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम से यह रिवायत बयान हुई है कि अहलेबैत अ. के चाहने वालों में से एक इंसान ने उसे सीरिया से हड़प लिया और ह़ज़रत अली (अ.स) के बग़ल में दफ़्न कर दिया। (बेह़ारुल अनवार, जिल्द 45, पेज 145)
    हालांकि इस नज़रिये पर एक आपत्ति यह है कि इमाम सादिक़ (अ स) के ज़माने तक ह़ज़रत अली (अ स) की क़ब्र पब्लिक के लिए अपरिचित थी।
    एक दूसरी रिवायत में आया है कि आपका मुबारक सर कुछ समय तक दमिश्क में रहने के बाद कूफ़े में इब्ने ज़ियाद के यहाँ वापस भेज दिया गया। उसने लोगों के विद्रोह के डर से ह़ुक़्म दिया कि उसे कूफ़े से बाहर पहुंचा कर ह़ज़रत अली (अ.स) की क़ब्र के पास दफ़्न कर दिया जाये। (पिछला रिफ्रेंस पेज 178)
    इस नज़रिये के लिये भी वही पिछली वाली मुश्किल है।

    3. कूफ़ा
    इस कथन को सिब्ते इब्ने जौज़ी ने बयान किया है, वह कहते हैं कि उमर इब्ने हुरैस मख़ज़ूमी ने इमाम के मुबारक सर को इब्ने ज़ियाद से लिया और उसे ग़ुस्ल व कफ़न देने और ख़ुशबू लगाने के बाद अपने घर में दफ़्न कर दिया। (तज़केरतुल ख़वास, पेज 259)

    4. मदीना
    तबक़ाते कुबरा के लेखक इब्ने सअद, ने इस नज़रिये को माना है वह बयान करते हैं कि यज़ीद ने इमाम अ. के मुबारक सर को मदीने के हाकिम अम्र इब्ने सईद के पास भेजा और उसने क़ब्रिस्तान बक़ी में आपकी माँ ह़ज़रत फ़ातेमा सलामुल्लाहे अलैहा की पाक क़ब्र के बग़ल में दफ़्न कर दिया। (इब्ने सअद, तबक़ात, जिल्द 5, पेज 112)
    इस नज़रिये को कुछ दूसरे अहले सुन्नत के उल्मा (जैसे ख़्वारज़मी ने मक़तलुल ह़ुसैन में और इब्ने एमाद ह़म्बली ने शुज़ूज़ातुज़्ज़हब में) ने क़ुबूल किया है। (मअर रकबिल ह़ुसैन,जिल्द 6, पेज 320, 321)

    5, सीरिया
    शायद कहा जा सकता है कि अहले सुन्नत की अधिकांश रिवायतें सीरिया में इमाम के मुबारक सर के दफ़्न किए जाने को बयान करती हैं इस नज़रिये के मानने वाले लोगों के बीच भी मतभेद है और विभिन्न नज़रिये बयान हुए हैं। जैसेः
    1) दरवाज़ए फरादीस के बग़ल में, जहाँ बाद में मस्जिद अर-रास बनाई गई।
    2) मस्जिदे जामेअ अमवी के पास एक बाग़ में
    3) दारुल इमारा (महेल) में
    4) दमिश्क़ के एक क़ब्रिस्तान में
    5) दरवाज़ए तूमा के बग़ल में (मअर रकबिल ह़ुसैन,जिल्द 6, पेज 321, 335)

    6, रिक़्क़ा
    रिक़्क़ा फ़ुरात के तट पर एक शहर था, कहा जाता है कि यज़ीद ने इमाम (अ स) का मुबारक सर आले अबी मुह़ीत के लिए (जो ह़ज़रत उसमान रिश्तेदार और उस समय उसी शहर में रह रहे थे) भेजा और उन लोगों ने उसे एक घर में दफ़्न कर दिया जो घर बाद में मस्जिद में तबदील कर दिया गया। (पिछला रिफ़्रेंस)

    7, मिस्र (क़ाहेरा)
    बयान हुआ है कि फ़ातमी ख़ुल्फ़ा (जो चौथी शताब्दी के आख़िर से सातवीं शताब्दी तक मिस्र पर हुकूमत करते रहे और यह लोग इस्माईली समुदाय के मानने वाले थे) इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम का मुबारक सर सीरिया के दरवाज़ए फ़रादीस से, असक़लान, फ़िर क़ाहेरा ले गये और उसके ऊपर “ताजुल ह़ुसैन” के नाम से मशहूर मक़बरा 500 हिजरी के बाद तामीर कराया। (अलबिदाया वन्निहाया, जिल्द 8, पेज 205)
    मेक़रीज़ी ने इमाम के मुबारक सर के असक़लान से क़ाहेरा स्थांतरित होने का सटीक सन 548 हिजरी बताया है और कहा है कि असक़लान से मुबारक सर लाते समय यह देखा गया कि ख़ून अभी ताज़ा है, सूख़ा नहीं है और उससे अम्बर की सी सुगंध आ रही है। (मअर रकबिल ह़ुसैन, जिल्द 6, पेज 337)
    अल्लामा सय्यद मोह़सिन अमीन आमुली (मौजूदा ज़माने के शिया आलिमे दीन) लिख़ते हैं कि इमाम अ. के मुबारक सर के असक़लान से मिस्र लाये जाने के बाद सर के दफ़्न की जगह पर एक महान बारगाह बनाई गई और उसके बग़ल में एक बड़ी मस्जिद भी बनाई गई मैने 1321 हिजरी में वहाँ की ज़ियारत की और अनगिनत मर्दों व औरतों को वहाँ ज़ियारत और रोते बिलकते देखा, फ़िर वह कहते हैं कि सर के असक़लान से मिस्र लाये जाने के सम्बंध में कोई शक व संदेह नहीं है, लेकिन क्या वह इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम का सर था या किसी और आदमी का? इस बारे में संदेह पाया जाता है।
    अल्लामा मजलिसी ने भी मिस्रियों के एक गुट के ह़वाले से मिस्र में मशहदुल करीम नाम की एक महान बारगाह होने की तरफ़ इशारा किया है।