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    इमाम हुसैन अ. और अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर

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    सवाल 13- अम्र बिल मारुफ़ और नही अनिल मुनकर (नेकियों का हुक्म देने और बुराईयों से रोकने) के लिये आया हूँ, इमाम हुसैन अ. के इस जुमले का क्या मतलब है?
    यह जुमला अम्र बिल मारुफ़ और नही अनिल मुनकर की बेसिक और असली स्थान को उजागर करता है।

    इमाम हुसैन अ. इस जुमले द्वारा अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर के मेन और एक्सियल रोल को इस तरह बयान करना चाहते हैं कि इस काम को अमली बनाने को अपने क़याम (आंदोलन) का फ़ाइनल टार्गेट बता रहे हैं।
    अगर अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की अस्ल तमाम इब्राहीमी अदियान में मौजूद और तमाम अम्बिया व मुरसलीन और अइम्मा व मोमिनीन की ज़िम्मेदारी रही, यह मुद्दा केवल एक शरई और फ़िक़्ही ज़िम्मेदारी नहीं है बल्कि वास्तव में पैग़म्बरे इलाही के भेजने की कसौटी और फ़लसफ़ा है इस लिये कि भौतिक दुनिया, अच्छाई व बुराई, हक़ व बातिल, अंधेरा और रौशनी के मिक्स हो जाने की दुनिया है, और यह बातें कभी इस तरह एक साथ मिल जाती हैं कि उनका पहचानना और फिर उनका मानना और उन पर अमल करना सख़्त हो जाता है, इलाही अदयान इन्सानों को मारूफ़ व मुनकिर और वास्तव में नेकी व बदी, हक़ व बातिल, रौशनी व अंधेरा और अच्छाईयों व बुराईयों की पहचान हासिल करके उसके बाद फिर नेकियों के बजा लाने और बुराइयों से बाज़ रखने का हुक्म देकर इन्सानों को इलाही हिदायत की शिक्षा देते और उन्हे सिराते मुस्तक़ीम (सीधे और सही रास्ते) की रहनुमाई करते हैं।
    रसूले ख़ुदा स. अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की ख़ास महत्व व स्थान के बारे में फ़रमाते हैं: जो आदमी अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर करता है वह ज़मीन पर ख़ुदा, किताबे ख़ुदा और रसूले ख़ुदा स. का जानशीन (उत्तराधिकारी) है।
    हज़रत अली अ. फ़रमाते हैं, दीन व शरीयत की स्थिरता, अम्रबिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर से हैं।
    क़ुरआने करीम नें ईमान वालों में अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की सिफ़त व विशेषता को नमाज़ क़ायम करने, ज़कात देने और ख़ुदा और रसूल की बात मानने पर प्राथमिकता रखी है।
    इमाम बाक़िर अ. भी एक हदीस में फ़रमाते हैं कि अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर, अम्बिया का रास्ता और नेक व अच्छे लोगों का मेथेड और ऐसा वाजिब है कि तमाम वाजिबों का बाक़ी रहना इसी के कारण है, रास्तों की सिक्योरिटी इसी की वजह से है इसी के बदौलत कारोबार की वैधता है और अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की छाया में दुश्मनों को इन्साफ़ बरतने पर मजबूर और तमाम कामों को इसी के द्वारा संगठित किया जा सकता है।
    इस आधार पर, अस्ल अम्र बिल मारूफ़ व नहीं अनिल मुनकर, हज़रत इमाम हुसैन अ. से मख़सूस नहीं है बल्कि यह तमाम अम्बिया व मुरसलीन, अइम्मा, सालेहीन और मोमेनीन की ज़िम्मेदारी है, लेकिन चूँकि सय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन अ. के ज़माने में मारूफ़ व मुनकिर पूरी तरह से मिक्स हो गए थे और दूसरी तरफ़ से मुनकर चारों तरफ़ में प्रचलित और मारूफ़ सभी दिशाओं में छोड़ा जा चुका था और यह सूरतेहाल, दीने इस्लाम की ख़ामोशी और सुन्नते नबवी व अलवी की फ़रामोशी का कारण बन रही थी, इसलिये इमाम हुसैन अ. नें मौजूदा हालात पर ऐतराज़ और रसूले ख़ुदा स. के चरित्र व सीरत व इस्लाम दोबारा ज़िन्दा करने और उसके बचाव को केवल अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की छाया में सम्भव जाना, इसी वजह से आपने अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर के द्वारा समाज के सुधार को अपने इंक़ेलाब का मक़सद बताया,
    ” انی لم اخرج اشرا و لا بطرا و لا مفسدا و لا ظالما و انما خرجت لطلب الاصلاح فی امة جدی ارید ان امر بالمعروف و انہی عن المنکر ”
    मैं न तो बलवा खड़ा करने और न सीमोल्घंन करने के मक़सद से निकला हूँ और नाहि फ़साद और ज़ुल्म बरपा करना चाहता हूँ, मैं तो केवल अपने जद की उम्मत की इस्लाह के मक़सद से निकला हूँ, मैं अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर का इरादा रखता हूँ।)