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    इस्लामी चेतना-3

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    विभिन्न विषयों पर वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई के विचारों पर आधारित एक नयी श्रंखला मार्गदर्शन आपकी सेवा में प्रस्तुत है।

     

    प्रस्तुत है इस्लामी चेतना के विषय पर इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के विचार जो उनके विभिन्न भाषणों से लिए गए हैं।

     

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    यह एक महत्वपूर्ण वास्तविकता है कि पश्चिमी जगत, अपनी सभी संसाधनों के बावजूद इस्लामी चेतना की लहर को नियंत्रित नहीं कर सका। इस्लाम विरोधी देशों में इस्लाम के विरुद्ध अत्याधिक प्रचार किया गया, इस्लाम को बुरा भला कहने उस पर आरोप लगाने और उसकी शिक्षाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाने सैनिक शैलियों का भी प्रयोग किया गया, आर्थिक हथकंडे भी अपनाए गये किंतु अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिल पायी है । इस्लामी देशों में युवाओं में इस्लाम और इस्लामी विचारधारा की ओर रूचि दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इन परिस्थितियों में इसलामी जगत को वर्तमान वास्तविकओं को समझना चाहिए इस समय इस्लामी जगत भी भलाई इसी में है कि वह एकजुट हो जाए और शत्रु और साम्राज्यवादी शक्तियों के अवैध उद्देश्यों के मार्ग में बाधा बनना है।

     

    आज विश्व भर में अमरीका की साख मलियामेट हो चुकी है अमरीकियों ने अपनी करतूतों से अपने भी लुभावने नारों को रौंद कर रख दिया है। इस समय इराक़ी राष्ट्र पर अमरीकियों का दबाव, इराक़ में व्याप्त अशांति, हत्यारी इस्राईली सरकार का भरपूर समर्थन, अफ़गानिस्तान में लज्जाजनक कृत्य, इस्लामी सरकारों पर दबाव  जैसी करतूतों से इस्लामी जगत में अमरीका का अत्याधिक घृणित रूप उभर कर सामने आया है इस समय इस्लामी जगत विस्तारवादी शक्तियों का डट कर मुक़ाबला कर सकता है और उसे एसा करना ही चाहिए क्योंकि इसके अतिरिक्त उसके पास कोई अन्य मार्ग नहीं है।

     

    साम्राज्यवादी शक्तियों ने हालिया वर्षों में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में जो बर्बरता दिखायी है वह वास्तव में राष्ट्रों की चेतना और साहस पर उनकी प्रतिक्रिया है। अपमान से थक चुके राष्ट्र जब अपने ऊपर से अपमान की धूल झाड़ने का प्रयास करती हैं तो उन्हें बहुत सतर्क रहना होता है। क्योंकि निश्चित रूप से उन्हें नुक़सान पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। एसा प्रयास किया भी गया और भविष्य में भी एसा ही होता रहेगा किंतु इस्लामी समाजों में धर्म की ओर झुकाव अब इतना शक्तिशाली हो चुका है कि इस प्रचंड लहर को रोकना किसी भी शक्ति के बस में नहीं है। निश्चित रूप से कड़ाई की जा रही है, अत्याचार हो रहे हैं, उन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है, शत्रु यह सारे काम कर रहा है किंतु जो वस्तु उसकी शक्ति व सामर्थ से बाहर है वह राष्ट्रों में मन में धर्म की ओर झुकाव को समाप्त करना है। वह यह काम नहीं कर सकते अब तक उन्हें इसमें विफलता मिली है और भविष्य में भी वे विफल रहेंगे।

     

    इस्लाम के विरुद्ध साम्राज्य का युद्ध, ईरान, ईरानी जनता और इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था के विरूद्ध जो कार्यवाहियां की गयीं वहीं तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस्लाम के प्रति शत्रुता इस से अधिक व्यापक दायरे में राजनीतिक व प्रचारिक धूर्तताओं द्वारा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में धावा इस व्यापक अभियान के उदाहरण हैं। इस समय अमरीका, ब्रिटेन और इन जैसे अन्य देशों की सरकारें, इस शत्रुता की राह में अत्याधिक धनराशि ख़र्च कर रही हैं। दुर्भाग्य से एसे लेखक, स्तंभकार और कलाकार भी उपलब्ध हैं जो व्यक्तिगत हितों के लिए अपने क़लम व कथन का अपनी कला के साथ सौदा कर लेते हैं, अपने विचार व अपनी कला व अंतरात्मा को कुचल कर बड़ी शक्तियों के अवैध हितों की पूर्ति में सहयोग करते हैं।

     

    विश्व साम्राज्य की उद्दंडता पर अंकुश लगाने वाली एक ही वस्तु है और वह है राष्ट्रों का संकल्प और उनकी चेतना। यदि कोई राष्ट्र सचेत है, अपने अधिकारों से पूर्ण रूप से अवगत है, शत्रु को भी पहचानता है, इसके इरादों को समझता है और उसके बाद शत्रु से मुक़ाबले के लिए मैदान में उतरा है तो इस दशा में अमरीका और साम्राज्यवादियों के सारे साधन व हथियार धरे के धरे रह जाएगें और उनके बस में कुछ नहीं होगा। यह मूल मंत्र है जिसे इस्लामी क्रांति में आरंभ से ही दृष्टि में रखा गया।

     

    इस्लामी चेतना की पूरी प्रक्रिया में सब से अधिक खेदजनक स्थिति यह है कि इस्लामी देशों के शासक अपने राष्ट्र की क्षमताओं की अनदेखी करते हैं और इसी लिए विदेशी शक्तियों के सामने हीनभावना में ग्रस्त रहते हैं और यही कारण है कि यह शासक अमरीका व विदेशी शक्तियों के साथ अपमान जनक संबंधों पर पुनर्विचार करने के स्थान पर देश व राष्ट्र को सम्मान दिलाने वाली क्रांतियों के विरूद्ध ही षडयन्त्रों में व्यस्त हैं जिसके कारण इस्लामी देशों के यह शासक दिन प्रतिदिन अपनी जनता के मध्य घृणित होते जा रही हैं और अमरीका व साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा बिछाए जाल में फंसते ही जा रहे हैं। उन्होंने कुरआन की इस आयत को भूल कर कर सम्मान पूरा का पूरा ईश्वर के लिए है, अमरीका से सम्मान की भीख मांगने का मार्ग अपनाया। उनकी इस शैली के कारण उन्हें सदा सत्ता से हटाए जाने का भय सताता रहता है और यह भी उन पर दिन प्रतिदिन स्पष्ट होता जाएगा कि अमरीका और अन्य साम्राज्यवादी शक्तियां संकट के समय में उन्हें बचाने की शक्ति नहीं रखती।

     

    आज अमरीका के नेतृत्व में साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में मुसलमानों के विरुद्ध जो अभियान चलाया जा रहा है उसका एक मुख्य कारण, मुसलमानों में उठने वाली चेतना की लहर है। वास्तविकता यह है कि हालिया एक दो दशकों के दौरान इस्लामी जगत के पूरब व पश्चिम बल्कि गैर इस्लामी देशों में भी मुसलमानों में चेतना फैली है आज इस्लामी जगत के युवा, पढ़े लिखे हैं और आज जो पीढ़ी सामने आयी है वह अतीत की तुलना में अधिक गहरे विचारों वाली और जानकार तथा सचेत है किंतु इसके साथ ही धर्म की प्रतिबद्धता भी है और यही विषय पश्चिम के साम्राज्यवादी नेताओं की नींद उड़ाए है। पश्चिम के लगभग सभी बड़े नेताओं ने कम से कम एक बार अवश्य अपने बयानों में मुसलमानों में बढ़ती धार्मिक आस्था पर चिंता प्रकट की है। यही चिंता इस बात का कारण बनी है कि साम्रज्यवादी शक्तियां खुल कर सामने आ जाएं।

     

    इस्लामी जगत में फैलती चेतना को रोकने के लिए साम्राज्यवादी शक्तियों ने सब से प्रभावशाली साधन के रूप में मनोवैज्ञानिक युद्ध का सहारा लिया है। निराशा फैलाना, अपमान , अपनी शक्ति और संसाधनों की धौंस जमाना इसी प्रकार के मनोवैज्ञानिक युद्ध की रणनीतियां हैं। यह मनोवैज्ञानिक युद्ध साम्राज्यवाद के लिए हर युग में सब से अधिक प्रभावशाली शस्त्र रहा है। यह ज़हरीले तीर सब से पहले समाज के पढ़े लिखे लोगों पर बरसाए जाते हैं और जब वह उसके प्रभाव में आ जाते हैं तो फिर उनके सहयोग से पूरे समाज को शिंकजे में कसा जाता है। यह सदियों से होता चला आया है और अब भी हो रहा है। इस से छुटकारे का एकमात्र मार्ग, पश्चिमी संस्कृति से दूरी है। हर समाज के बुद्धिजीवियों और पढ़े लिखे लोगों द्वारा पश्चिमी संस्कृति पर चर्चा होनी चाहिए। उसकी व्याख्या की जानी चाहिए और यह देखना चाहिए कि पश्चिम संस्कृति क्या है, उसके प्रभाव क्या हैं? और वह देश के समाज के साथ क्या कर सकती है? अगर कोई समाज एसा करने में सफल हो गया तो उस समय में पश्चिमी संस्कृति की बुराइयां भी स्पष्ट होंगी जिससे पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव भी कम हो जाएंगे।   (http://hindi.irib.ir)