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    ईरान की हरित क्रांति-२

    ईरान की हरित क्रांति-२
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    मानव की आवश्यकता के खाद्ध पदार्थों को उपलब्ध करवाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के दृष्टिगत कृषि और प्राकृतिक स्रोतों को देशों की अर्थव्यवस्था का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।  इस संदर्भ में ईरान/कृषि की उपजाऊ भूमि, अच्छी एवं विविध जलवायु, वनों, बड़ी-बड़ी चरागाहों, समृद्ध आनुवंशिकी स्रोतों जैसे नवीनीकरण किये जाने योग्य प्राकृतिक स्रोतों के दृष्टिगत कृषि उत्पाद के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  गुणवत्ता, स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित और मानव प्रकृति से समनवित होने के कारण ईरान के कुछ कृषि उत्पाद बहुत ही महत्वपूर्ण और अद्वितीय हैं।  अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन फाओ की रिपोर्ट के अनुसार संसार में कृषि उत्पादों की मुख्य संरचना, ६६ कृषि उत्पादों पर निर्भर करती है।  इनमें ४१ फसलें और २५ बाग़ों के उत्पाद हैं।  अलबत्ता यह इस अर्थ में नहीं है कि संसार में केवल ६६ प्रकार की फसलों का ही उत्पादन होता है बल्कि कृषि उत्पादों की यह संख्या, संसार में कृषि की संरचना में मुख्य फसलों के रूप में प्रचलित है।

    रिपोर्ट के अनुसार संसार के बहुत ही कम देश कृषि उत्पाद में अग्रणी हैं।  इन देशों को एक या कुछ कृषि उत्पादों के उत्पादन में संसार में प्रथम से दसंवा स्थान प्राप्त है।  इस वर्गीकरण में ईरान को विश्व में कृषि उत्पादों में उचित स्थान प्राप्त है।  फाओ की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के मुख्य उत्पादों में एक तिहाई का उत्पादन करके ईरान, संसार में प्रथम से दसवें स्थान पर है।  ईरान ७ प्रकार की फ़सलों और १५ प्रकार के बाग़ के उत्पादों का उत्पादनकर्ता है।

    विश्व स्वास्थ संगठन फाओ के अनुसार विश्व के ६४ देश अपनी फ़सलों का निर्यात करते हैं और ५५ देश बाग़ों के उत्पादों का निर्यात करते हैं।  इस संदर्भ में ईरान बाग़ों के १५ उत्पादों के उत्पादन के साथ संसार में उच्च स्तर पर है।  बाग़ों के उत्पादों में विविधता की दृष्टि से चीन और अमरीका के पश्चात तुर्की के साथ संयुक्त रूप से ईरान, विश्व में तीसरे स्थान पर है।  फ़सलों के निर्यात की दृष्टि से भी ईरान, दस फ़सलों के निर्यात में प्रथम से दसवें स्थान पर है।

    ईरान में केसर, Barb erry या दारू हल्दी, ओनाब या एक प्रकार का बेर और ज़ीरे की पैदावार होती है किंतु चूंकि इन उत्पादों को फाओ की दृष्टि में मुख्य फ़स्लों के रूप में नहीं माना जाता अतः उन्हें इस वर्गीकरण में सम्मिलित नहीं किया गया है।  वास्तव में ईरान विश्व में इन वस्तुओं के उत्पाद में बड़े उत्पादनकर्ताओं की श्रेणी में आता है।

    ईरान के कृषि एवं खाद्ध उत्पादों की दूसरी विशेषता यह है कि इन उत्पादों के एक भाग को जैविक शैली से उत्पादित किया जाता है।  उत्पादों का जैविक होना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि कृषि एवं खाद्ध उत्पादों का प्रयोग करने वालों के स्वास्थ्य से इसका सीधा संपर्क होता है।  यहां पर यह प्रश्न उठता है कि जैविक उत्पादों का क्या महत्व है?  श्रोताओ इस कार्यक्रम में और आगामी कार्यक्रमों में हम ईरान में कुछ जैविक उत्पादों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

    हालिया दशकों के दौरान कीटनाशक तथा रासायनिक पदार्थों के अनियंत्रित प्रयोग के कारण मानव के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं।  वैज्ञानिक शोध यह दर्शाते हैं कि हालिया कुछ दशकों के दौरान कृषि के क्षेत्र में रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग में वृद्धि से बहुत क्षति पहुंची है।  इन पदार्थों से प्रदूशण के स्तर में वृद्धि हुई और इन्होंने उत्पादन प्रक्रिया को गंभीर समस्याओं में डाल दिया है।  विश्व खाद्ध संगठन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले ५० वर्षों के दौरान विश्व में रासायनिक पदार्थों के प्रयोग में दस गुना वृद्धि हुई है जिसके कारण कीटों से होने वाली क्षति घटकर आधी रह गई है।  यह प्रक्रिया, औद्योगिक देशों में १९५० के दशक के अन्तिम वर्षो के परिवर्तनों के कारण है क्योंकि इस दौरान तकनीक बहुत तेज़ी से आगे बढ़ी थी।  तीव्र गति से होने वाले इस विकास और खेतों में वनस्पतियों की कृषि के तकनीकी करण के कारण रासायनिक पदार्थों तथा कीट नाशकों की आवश्यकता में तेज़ी से वृद्धि हुई।  इस तीव्र विकास के दृष्टिगत खेली के लिए यंत्रों तथा ट्रैक्टरतं के प्रयोग के कारण श्रमबल की कमी भी समाप्त हो गई।  इन सब बातों के बावजूद नए-नए कीटों का अस्तित्व तथा नई-नई बीमारियों का जन्म लेना, ६०० से अधिक प्रकार के कीटों का सशक्त होना, रासायनिक कीट नाशकों के कारण खेतों को होने वाली बीमारियां, और मनुष्य से स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरे उत्पन्न हो गए हैं।  यह विभीषिका अपने साथ चर्म रोग, विभिन्न प्रकार के कैंसर, मृत्यु तक पहुचांने वाली विषाक्तता और पर्यावरण को क्षति जैसी समस्याओं को मानव के लिए उपहार स्वरूप लाई है।  प्रकृति में होने वाले असंतुलन के कारण उत्पादन की गुणवत्ता को भी गंभीर ख़तरों का सामना है।  इस प्रकार खेती या कृषि के क्षेत्र में रासायनिक पदार्थों और नई तकनीक के प्रवेष ने रासायनिक पदार्थों के अनियंत्रित प्रयोग के परिणाम स्वरूप होने वाले क्षति ने इसके मुख्य लक्ष्य को अर्थात रासायनिक पदार्थों के अनियंत्रित प्रयोग के कारण स्वस्थ्य खाद्ध पदार्थों के उत्पादन को ख़तरे में डाल दिया है।

    कृषि उत्पादों में कृत्रिम रूप में वृद्धि की लालच में रासायनिक पदार्थों और कीटनाशकों के अनियमित प्रयोग ने पर्यावरण और स्वस्थ्य खाद्ध पदार्थों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।  यही कारण है कि हालिया कुछ दशकों के दौरान जैविक कृषि पर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  रासायनिक पदार्थ युक्त उत्पादों का विचार वर्ष १९४० में “लार्ड नार्थबर्न” ने पहली बार प्रस्तुत किया था।  वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जैविक कृषि शब्द का प्रयोग किया।  इस प्रकार उन्होंने जैविक कृषि की शैली को परिचित करवाया।  १९४० के अंत तथा १९५० के दशक के आरंभ में जैविक कृषि के बारे में वैज्ञानिक ढंग से बहुत कुछ लिखा गया।

    जैविक कृषि वास्तव में उत्पादन की एक प्रकार की एसी व्यापक व्यवस्था है जो जैविक दृष्टि से अच्छी फ़सलों में वृद्धि, खाद्ध तत्वों के प्राकृतिक चक्र और धरती की जैविक एवं पर्यावरण गतिविधि का कारण बनती है।  जैविक शैली पर कृषि में फ़सलों के उत्पादन में धरती के उपजाऊपन की सुरक्षा और वनस्पतियों का पोषण, किसी सीमा तक फ़सलों का परिक्रमण, खेतों में बची हुई वनस्पतियों के प्रयोग तथा पशुओं की खाद, फलीदार पौधों, पत्तों की खाद, खेतों के बाहर बचे हुए जैविक कूड़े के प्रयोग और स्वयं ही खेतों में निकल आने वाले पौधों और घासफूस की तकनीकी ढंग से निराई पर निर्भर है।  अन्तर्राष्ट्रीय फड्रेशन आईएफओएएम की परिभाषा के अनुसार जैविक शैली पर उत्पादन एक एसी कृषि प्रणाली है जिसमें पर्यावरण, सामाजि, आर्थिक, खाद्ध पदार्थों के उत्पादन, परिधान या वस्त्र और लकड़ी के उत्पादन, आदि के आयामों में सुधार एवं विस्तार होता है।  इस प्रणाली में धरती के उपजाऊ होने की क्षमता को बनाए रखने को उत्पादन में सफलता की कुंजी की दृष्टि से देखा जाता है।  जैविक खेती में वनस्पतियों, पशुधन और पर्यावरण, कृषि व्यवस्था की गुणवत्ता आदि की प्राकृतिक विशेषताओं से लाभ उठाने के कारण कृषि प्रणाली और पर्यावरण की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है और उसमें निरंतर सुधार आता रहता है।  इस शैली में अधिक उत्पादन के स्थान पर कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को सुधारने पर अधिक बल दिया जाता है।  फसलों की पैदावार में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक दवाइयों जैसे हानिकारक पदार्थों के प्रयोग के स्थान पर पर्यावरणीय कृषि विज्ञान और अरसायनिक तकनीक से लाभ उठाया जाता है।

    वर्तमान समय में ईरान में १४ हज़ार हेक्टेयर पर जैविक कृषि की जाती है।  जिन चीजों की जैविक शैली पर ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में खेती की जाती हैं वे हैं बादाम, पिस्ता, खजूर, अंजीर, अनार, केसर तथा वनस्पति आदि।  कृषि के क्षेत्र में ईरान की मुख्य स्ट्रैटेजी, स्वस्थ्य और जैविक कृषि के उत्पादन की ओर क़दम बढ़ाना है।