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    ईश्वरीय आतिथ्य-3 रोज़ और स्वास्थ्य

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    पैग़म्बरे इस्लाम का कथन हैः रोज़ा रखो, स्वस्थ रहो।

    वह ईश्वर जिसने मनुष्य की रचना की है और साथ ही यह भी वचन दिया है कि वह जिसे धरती पर भेजेगा उसके लिए पेट भरने का भी प्रबंध करेगा, वही ईश्वर मनुष्य को एक महीने तक विशेष समय में खाना-पानी छोड़ने का आदेश भी देता है।  हमारी यह बात सुनकर आपके मन में अवश्य ही यह विचार आया होगा कि यदि ईश्वर ने सबका पेट भरने के लिए खाद्ध सामग्री देने का वचन दिया है तो फिर धरती पर इतने लोग भूखे क्यों हैं?  इसका उत्तर यह है कि खाद्ध पदार्थों का अत्याचारपूर्ण भण्डारण, कई देशों की सरकारों द्वारा अतिरिक्त अनाज का समुद्र में फेंक दिया जाना ताकि विश्व स्तर पर अनाज का मूल्य गिरने न पाए और इसी प्रकार विभिन्न समाजों एवं अत्याचारी देशों में हर स्तर पर फैला हुआ अपव्यय व अन्याय, लोगों की भूख का मुख्य कारण है।  अन्यथा आप देखें तो ईश्वर ने अपनी अनुकंपाएं एवं विभूतियां प्रदान करने में किसी प्रकार की कमी नहीं की है।  अब आते हैं कि जब ईश्वर ने मनुष्य की शारीरिक आवश्यकता के दृष्टिगत उसके खाने का प्रबंध किया है तो फिर उसने खाने से क्यों रोका है और रोज़ा रखने का आदेश क्यों दिया है?

    सृष्टि के रचयिता तथा मनुष्य के जन्मदाता ने मनुष्य की आत्मा तथा शरीर दोनों को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से पवित्र रखने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम निर्धारित किया है जिसपर चलकर मनुष्य अपनी आत्मा तथा शरीर दोनों को विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्त कर सकता है।  रोज़ा ही वह ईश्वरीय कार्यक्रम है जिसके माध्यम से हम शरीर एवं आत्मा की बहुत सी बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं।  रोज़ा रखने के बहुत से शारीरिक लाभ हैं जिनकी पुष्टि आधुनिक विज्ञान भी करता है।  हो सकता है कि कुछ लोग यह सोचते हों कि एक महीने तक एक निर्धारित समय तक भूखे और प्यासे रहने से बहुत कष्ट होता होगा किंतु यही भूख और प्यास सहन करना हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है।  चिकित्सकों का यह कहना है कि रोज़े के बहुत से शारीरिक लाभ हैं।  बहुत से चिकित्सक अपने मरीज़ों को कई बीमारियों में कुछ दिनों तक खाने-पीने को सीमित करने की सलाह देते हैं।  डाक्टरों का कहना है कि रोज़ा रखने से शरीर के सभी ऊतकों की धुलाई हो जाती है और उनमें ताज़गी आ जाती है।  रोज़ा रखने से मनुष्य का पाचनतंत्र व्यवस्थित हो जाता है।  इससे अपेंडिक्स का ख़तरा बहुत कम हो जाता है।  अतिरिक्त वसा समाप्त हो जाती है।  रोज़े से मूत्र तंत्र की सफाई होती है और पेशाब बंद होने जैसी बीमारी का ख़तरा घट जाता है।  मोटापा दूर करने और अल्सर जैसी बीमारियों में रोज़ा बहुत ही सहायक सिद्ध होता है।  रोज़ा मनुष्य के समस्त अंगों, ऊतकों, इन्द्रियों तथा आंतों की थकान को दूर कर देता है। चिकित्सकों का मानना है कि रोज़ा/ गुर्दे तथा यकृत की बीमारियों और साथ ही यूरिक एसिड को नियंत्रित करता है।  बहुत से डाक्टरों ने जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने में भी रोज़े को महत्वपूर्ण बताया है। आज विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया है कि रोज़ा रखने से शरीर की अतिरिक्त वसा घुल जाती है और इससे हानिकारक और अनियंत्रित मोटापा भी कम  होता है। कमर और उसके नीचे के भागों पर दबाव कम हो जाता है तथा पाचनतंत्र, हृदय और हृदय से संबन्धित तंत्र संतुलित हो जाते हैं। शरीर के अत्यधिक कार्य करने वाले अंगों में से एक, पाचनतंत्र विशेषकर अमाशय है। सामान्य रूप से लोग दिन में तीन बार खाना खाते हैं इसलिए पाचनतंत्र लगभग  हर समय भोजन को पचाने तथा खाद्य पदार्थों का अवशोषण करने और अतिरिक्त पदार्थों  को निकालने जैसे कार्यों में व्यस्त रहता है। रोज़ा इस बात का कारण बनता है  कि शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग विश्राम कर सके और बीमारियों से बचा रहे तथा शरीर ऊर्जा प्राप्ति के लिए अपने भीतर एकत्रित हुई वसा को घुला कर कम कर दे।  इस्लामी महापुरूषों के अन्य कथनों में  मिलता है कि मनुष्य का पाचनतंत्र बीमारियों का घर है और खाने से बचना ही उसका  उपचार है।  इसी प्रकार से रोज़ा  शरीर की प्रतिरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ करता है।  चिकित्सा  विज्ञान के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए रोज़ा बहुत लाभदायक है। रोज़ा वास्तव में शरीर के लिए पूर्ण विश्राम और पूरे शरीर की सफ़ाई-सुथराई के अर्थ में है।  इस  प्रकार कहा जा सकता है कि रोज़ा सम्पूर्ण शरीर की सफाई करके उसके स्वास्थ्य का कारण बनता है  और यह मनुष्य को बहुत सी शारीरिक बीमारियों और ख़तरों से निपटने के लिए तैयार करता  है।