islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. ईश्वर और उसके दूत : 2

    ईश्वर और उसके दूत : 2

    Rate this post

    अब हम जो चर्चा आरंभ करने जा रहे हैं उसका उद्देश्य इस बात को सिद्ध करना है कि सृष्टि की वास्तविकता और जीवन के सही मार्ग की पहचान के लिए बोध व बुद्धि के

    अतिरिक्त भी कुछ अन्य साधन मौजूद हैं जो इतने विश्वस्नीय हैं कि उनसे गलती करने की संभावना नहीं है। यहां पर यह भी बताते चलें कि आज के

    कार्यक्रम में हम जो भी चर्चा करेंगे वह वास्तव में भूमिका होगी इस लिए ध्यान से पढ़ें क्योंकि हो सकता है कि हमारी बात टुकड़े- टुकड़े में लगे किंतु अगली चर्चाओं में

    इन विषयों का ज्ञान आवश्यक है जिनका हम अपनी आज की चर्चा में वर्णन कर रहे हैं।

    वह साधन जो जिसमें गलती की कोई संभावना नहीं है ईश्वरीय संदेश है। ईश्वरीय संदेश अर्थात एक प्रकार से ईश्वरीय शिक्षा है जो ईश्वर के कुछ चुने हुए दासों से विशेष होती है

    और साधारण लोगों को उसकी वास्तविकता का ज्ञान नहीं होता क्योंकि इस प्रकार की ईश्वरीय शिक्षाओं का कोई

    चिन्ह उनके भीतर नहीं होता अलबत्ता साधारण लोग भी इस बात पर सक्षम होते हैं कि जब कोई यह दावा करे कि उसके पास ईश्वरीय संदेश आते हैं तो

    आवश्यक चिन्हों और लक्षणों से इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि ईश्वरीय संदेश का पात्र होने का दावा करने वाला सच बोल रहा है या नहीं।

    स्वाभाविक रूप से यदि साधारण लोगों के लिए यह सिद्ध हो जाए कि किसी के पास ईश्वरीय संदेश आते हैं और वह संदेश दूसरों तक भी पहुंचे तो

    फिर उस संदेश को स्वीकार करना आवश्यक होगा और उसका विरोध करना किसी के लिए सही नहीं होगा। इस प्रकार इस चर्चा के मूल विषय इस से प्रकार होंगेः

    ईश्वरीय दूतों के धरती पर आने की आवश्यकता क्यों है? ईश्वर से संदेश प्राप्त करने के बाद और लोगों तक उसे पहुंचाने से पूर्व ईश्वरीय संदेशों में फेर बदल नहीं हो सकती,

    अर्थात ईश्वरीय दूत ग़लती या भूल से सुरक्षित होता है और इसी प्रकार इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि यह कैसे सिद्ध होगा कि कौन ईश्वरीय दूत है और कौन झूठ बोल रहा है।

    जब हम इस बात पर चर्चा कर लेंगे कि ईश्वर के संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ईश्वरीय दूतों की आवश्यकता है तो

    फिर इस बात पर चर्चा करेंगें कि ईश्वरीय दूत इतिहास में कौन लोग रहे हैं और अंतिम दूत है? और अंतिम दूत के बाद लोगों के मार्गदर्शन का दायित्व किस पर है?

    इन सब बातों को लेकर हमारी चर्चा आरंभ हो चुकी है किंतु आज की चर्चा अगली चर्चाओं की भूमिका थी।