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    उस लिबास के पहनने का बयान जो औरतों और काफ़िरों के लिये मख़सूस है

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    मर्दों के लिये औरतों का मख़सूस लिबास जैसे मक़ना, महरम (अंगिया) बुरक़ा वग़ैरह पहनना हराम है इसी तरह औरतों के लिये मर्दों का मख़सूस लिबास पहनना हराम है जैसे टोपी, अम्मामा, क़बा वग़ैरह और काफ़िरों का मख़सूस लिबास जैसे जुन्नार या अंग्रेज़ी टोपियाँ वग़ैरह मर्द औरत किसी के लिये जायज़ नही है।

    हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) से मंक़ूल है कि औरत के लिये मर्द की शबीह बनना जायज़ नही है क्यो कि जनाबे रसूले ख़ुदा (स) ने उन पर मर्दों पर जो औरतों की शबीह बने और उन औरतों पर जो मर्दों की शबीह बनें लानत की है।

    हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ) से रिवायत है कि ख़ुदा ए अज़्ज़ा व जल ने अपने पैग़म्बरों में से एक पैग़म्बर को वही भेजी कि मोमिनों से कह दो कि मेरे दुश्मनों के साथ खाना न खायें और मेरे दुश्मनों के से कपड़े न पहनें और मेरे दुश्मनों की रस्म व रिवाज को न बरतें वरनायह भी मेरे दुश्मनों के जैसे हो जायेगें।