islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. ऊँची आवाज़ में नमाज़ पढ़ना

    ऊँची आवाज़ में नमाज़ पढ़ना

    Rate this post

    सवालः जिन नमाज़ो को ऊँची आवाज़

    में पढ़ना ज़रूरी है अगर उनकों ऊँची

    आवाज़ में न पढ़ा जाये तो उसका क्या ह़ुक्म है?
    जवाबः मर्दों पर वाजिब है कि सुबह़ मग़रिब और इशा

    की नामाज़ों को ऊँची आवाज़ में पढ़े लेकिल अगर भूले

    से या ह़ुक्म को न जानने के कारण धीमे से पढ़ ले तो

    नमाज़ सह़ी है लेकिल अगर जानबूझ कर ऐसा किया

    है तो नमाज़ बातिल है।