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    कफ़्फ़ारे (जुर्माने) के अह़काम

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    सवालः उमरे को अंजाम देते वक़्त मैने दिन में साय में सफ़र किया जिसके कारण मुझ पर कफ़्फ़ारा वाजिब हो गया

    मैने अपने माँ बाप से कफ़्फारा देने के लिए कहा उन्होंने कफ़्फ़ारे के लिए एक जानवर ख़रीद कर

    उसे ज़िबह़ किया और उसेक गोश्त (मीट) का एक ह़िस्सा अपने परिवार के लिए और एक ख़ुद

    अपने लिए और एक ह़िस्सा ग़रीबों को दे दिया क्या यह काम सह़ी है।

    जवाबः कफ़्फ़ारे का पूरा गोश्त ग़रीबों को देना ज़रूरी है और उसको तक़सीम

    करना ज़रूरी नहीं है बल्कि पूरे ह़िस्से को किसी एक फ़क़ीर को दिया जा सकता है

    लेकिन उसमें से अपने या अपने परिवार के लिए निकालना सह़ी नहीं है।