islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. कफ़्फ़ारे (जुर्माने) के अह़काम

    कफ़्फ़ारे (जुर्माने) के अह़काम

    Rate this post

    सवालः उमरे को अंजाम देते वक़्त मैने दिन में साय में सफ़र किया जिसके कारण मुझ पर कफ़्फ़ारा वाजिब हो

    गया मैने अपने माँ बाप से कफ़्फारा देने के लिए कहा उन्होंने कफ़्फ़ारे के लिए एक

    जानवर ख़रीद कर उसे ज़िबह़ किया और उसेक गोश्त (मीट) का एक ह़िस्सा अपने

    परिवार के लिए और एक ख़ुद अपने लिए और एक ह़िस्सा ग़रीबों को दे दिया क्या यह काम सह़ी है।

    जवाबः कफ़्फ़ारे का पूरा गोश्त ग़रीबों को देना ज़रूरी है और उसको तक़सीम करना ज़रूरी नहीं है

    बल्कि पूरे ह़िस्से को किसी एक फ़क़ीर को दिया जा सकता है लेकिन उसमें से अपने या अपने

    परिवार के लिए निकालना सह़ी नहीं है।