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    क़िला नौख़रक़ान गांव

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    आज हम सेमनान प्रांत के प्राचीन गावों में से एक क़िला नौख़रक़ान का परिचय कराएंगे। यह वह गांव है जहां चौथी और पांचवी हिजरी क़मरी के महान आध्यात्मिक गुरु शैख़ अबुल हसन ख़रक़ानी का मज़ार है जिससे इस गांव की ऐतिहासिक पृष्ठिभूमि का पता चलता है और ईरान के सांस्कृतिक केन्द्र और गृह मंत्रालय ने पर्यटन की दृष्टि से इसे दर्शनीय स्थलों की सूचि में रखा है।

    क़िले नौख़रक़ान, शाहरूद ज़िले के बस्ताम क़स्बे के अंतर्गत आता है जो पूर्वी शाहरूद से चौबीस किलोमीटर दूरी पर स्थित है। क़िले नौख़रक़ान गांव जो ख़रक़ान के नाम से भी विख्यात है, समुद्र तल से एक हज़ार चार सौ साठ मीटर ऊंचाई पर पर्वतांचल में स्थित है। क़िले नौख़रक़ान गांव उत्तर में अलबुर्ज़ पर्वत श्रृंख्ला की मुख्य चोटी के ठीक नीचे है और इसके पूरब में सियाह कूश और पूर्वोत्तर में ज़र्रीन कूह और पश्चिमोत्तर में कूह बीदर नामक पहाड़ स्थित है। वसंत और ग्रीष्म ऋतु में इसकी जलवायु संतुलित और शीत ऋतु में ठंडी रहती है। क़िले नौख़रक़ान की लगभग तीन हज़ार की आबादी है जो फ़ारसी भाषा और स्थानीय बोली में बात करते हैं और शीया मुसलमान हैं।

    क़िले नौख़रक़ान काफ़ी पुराने समय से आध्यात्म में रूचि रखने वालों के ध्यान का केन्द्र रहा है। इसी गांव में आध्यात्मिक गुरु शैख अबुल हसन ख़रक़ानी का जन्म हुआ और इसी गांव में उन्होंने अपना जीवन बिताया है। इस गांव में रहने के कारण शैख़ अबुल हसन ख़रक़ानी के पास आध्यात्मिक गुरु एकत्रित रहते थे।

    आमदनी के स्रोत

    क़िले नौख़रक़ान के अधिकांश लोगों की आय का स्रोत, कृषि, पशुपालन, बाग़बानी, मज़दूरी, मधुमक्खी पालन, दरी और क़ालीन की बुनाई है। गांव में पायी जाने वाली जड़ी बूटियों में बॉरिज, गुजख़ैरा, इस्फ़ंद और ऐस्ट्रगल उल्लेखनीय हैं। गांव के चारों ओर हरी भरी चारागाहें भी हैं। गांव के कृषि उत्पादों में गेंहूं, जौ, मकई, चुक़न्दर और आलू उल्लेखनीय हैं। इसी प्रकार क़िले नौख़रक़ान में चेरी, अंगूर और ख़ूबानी के बाग़ भी पाए जाते हैं। गांव की खेतिहर भूमि की सिंचाई भूमिगत जलस्रोत से होती है। ग्रीष्म ऋतु में ग्रामवासी अपने पशुओं को ब्रून ब्रून, बीदर और चश्मे मर्यम नामक ठंडे क्षेत्र की ओर ले जाते हैं।

    क़िले नौख़रक़ान गांव हलकी ढलान वाले क्षेत्र में स्थित है और इसकी आबादी घनी है। गांव के घरों की दीवारें मिट्टी और भूसे की और छतें ढलुवा हैं। हरे भरे मैदान में ये घर बड़ा ही रमणीक दृष्य उत्पन्न करते हैं। गांव के घर प्राकृतिक स्थिति और ग्रामवासियों के व्यवसाय के दृष्टिगत बनाए जाते हैं। पुराने घर मिट्टी, पत्थर, कच्ची पक्की ईंटों और लकड़ी के मसाले से बने हैं जबकि नए घरों के निर्माण में सिमेंट, ईंट, चूना और लोहे के गाटर का प्रयोग किया जाता है।

    प्राकृतिक सुंदरता

    क़िले गांव अलबुर्ज़ पर्वत श्रृंख्ला के दक्षिणी छोर के जंगलों के निकट स्थित है इसलिए बहुत ही सुंदर दृष्यों से संपन्न है। इसके अतिरिक्त मूल्यवान ऐतिहासिक अवशेषों ने भी पर्यटन की दृष्टि से इस गांव के आकर्षण व महत्व को बढ़ा दिया है। वसंत और ग्रीष्म ऋतुओं में तो इस गांव की हरियाली और ठंडी हवा का आनंद ही कुछ और है। गांव के पांच किलोमीटर उत्तर में अब्र नामक जंगल, क़िले नौख़रक़ान के इकोटूरिज़्म के आकर्षणों में हैं। वर्ष के अधिकांश समय हीरकानी वृक्ष समूह के इस जंगल के ऊपर बादल छाए रहते हैं इसलिए इसे अब्र जंगल कहा जाता है। फ़ारसी भाषा में अब्र का अर्थ बादल होता है। इस जंगल में बादल वृक्षों के इतने निकट होते हैं मानो जंगल बादल पर सवार है और उसके बीच से आ जा सकते हैं। बहुत से पर्यटक ईरान के सबसे सुंदर प्राकृतिक दृष्यों में इसकी गणना करते हैं।

    चारागाहों, विभिन्न प्रकार के जंगली पुष्पों और सुंदर पौधों से संपन्न ब्रून ब्रून नामक घाटी भी क़िले नौख़रक़ान के प्राकृतिक आकर्षणों में है। क़िले नौख़रेक़ान के क़बीले ग्रीष्म ऋतु में अनेक सोतों और पर्याप्त चारागाहों से संपन्न इस घाटी की ओर पलायन कर जाते हैं जो ग्रीष्म ऋतु में ठंडी रहती है। इस गांव से लोगों का एक समूह हर वर्ष अपने पशुओं के चारे के लिए इस अच्छी जलवायु वाले क्षेत्र की ओर पलायन करते हैं और चार महीने तक डेरा डालते हैं। इस पर्यटन क्षेत्र का भ्रमण करने वाले क़बायली जीवन से परिचित होने और मनोरंजन के साथ साथ, दुग्ध उत्पाद और ताज़ा रोटी और मांस का भी मज़ा लेते हैं। ब्रून ब्रून घाटी के थोड़ा नीचे क़िले नौख़रक़ान गांव के चार किलोमीटर पश्चिमोत्तर में बीदर नामक पहाड़ और घाटी स्थित है। यह क्षेत्र अपनी असमतल प्रकृति के अतिरिक्त ब्रून ब्रून घाटी की विशेषताओं से संपन्न है।

    ऐतिहासिक अवशेष

    शैख़ अबुल हसन ख़रक़ानी के मज़ार की ऐतिहासिक इमारत, इस्लाम पूर्व के अवशेष में शामिल क़ुहने क़िले नामक दुर्ग के खंडहर, कूली नामक ऐतिहासिक टीला, बर्फ़ रखने के लिए विशेष गढ़ा, क़ाजारी शासन काल की वास्तुकला का पानी का हौज़, गांव का पुराना हम्माम, और कुछ अन्य ऐतिहासिक इमारतें क़िले नौख़रक़ान गांव के पर्यटन आकर्षण हैं।

    चौथी व पांचवी हिजरी शताब्दी के विख्यात आध्यात्मिक गुरू शैख़ अबुल हसन ख़रक़ानी का मज़ार, गांव के उत्तरी छोर पर एक टीले पर स्थित है। मज़ार के चारों ओर हरे भरे टीलों से इस मज़ार के आकर्षण में चार चांद लग गए हैं। मज़ार की इमारत ईंटों की है जो वर्ष 1352 हिजरी शम्सी में ईरान के राष्ट्रीय अवशेष संस्था के तत्वाधान में बनी है। शैख़ अबुल हसन ख़रक़ानी की क़ब्र पर संगमरमर का एक पत्थर लगा है जिस पर कुछ शेर उकेरे गए हैं। विगत में मज़ार के पास सुंदर टाइलों से सुसज्जित एक मस्जिद थी जिसका अब केवल मेहराब बचा है। यह मस्जिद ईलख़ानी काल की थी। ईरान के बड़े आध्यात्मिक गरुओं में से एक शैख़ अबुल हसन ख़रक़ानी भी हैं जो अपने विचारों और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए विख्यात रहे हैं। उनकी जीवन शैली व विचार पर ईरान के शायरों और आध्यात्मिक गरुओं के एक गुट ने अपनाया है। पांचवी हिजरी शताब्दी के ख़ाजा अब्दुल्लाह अंसारी, शैख़ ख़रक़ानी के विख्यात शिष्यों में हैं जिन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के लिए वर्षों ख़रक़ान में जीवन बिताया।