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    3. क़ुरआन मजीद मे अहले बैत – 3

    क़ुरआन मजीद मे अहले बैत – 3

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    18- “وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَيَسْتَخْلِفَنَّهُم فِي الْأَرْضِ”(नूर 56)
    इन हज़रात से मुराद अहले बैते ताहेरीन हैं।(अब्दुल्लाह इब्ने मुहम्मद अल हनफ़ीया)( शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज 413)
    19- “وَالَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا”(फ़ुरक़ान 74)
    अज़वाज ख़दीजा, ज़ुर्रियत फ़ातेमा, क़र्रातुलऐन हसनैन और इमाम हज़रत अली है।(शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज 416)
    20- “وَنُرِيدُ أَن نَّمُنَّ عَلَى الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا فِي الْأَرْضِ وَنَجْعَلَهُمْ أَئِمَّةً وَنَجْعَلَهُمُ الْوَارِثِينَ”(क़सस 6) यह सिलसिला ए इमामत है जो ता क़यामत बाक़ी रहने वाला है।(इमाम जाफ़रे सादिक़)( शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज 430)
    21- “وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ”(सजदा 25)
    अल्लाह ने औलादे हारून में 12 क़ाएद क़रार दिये थे और औलादे अली(अ) में 11 इमाम बनाये हैं। जिससे कुल 12 हो गये।(इब्ने अब्बास)( शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज 455)
    22- “إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا”(अहज़ाब 34)
    यह आयत अली व फ़ातेमा व हसनैन और रसूले अकरम की शान में नाज़िल हुई है।(उम्मे सलमा)(फ़ज़ाएलुल ख़मसा जिल्द 2 पेज 219)
    23- “إِنَّ اللَّهَ وَمَلَائِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى النَّبِيِّ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْلِيمًا”(अहज़ाब 57)
    मेरे साथ अहलेबैत पर सलावात ज़रूरी है।(रसूले अकरम)(तफ़सीरे मराग़ी जिल्द 22 पेज 34)
    24- “قُلْ مَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْ”(सबा 48)
    अजरे रिसालत से मुराद मुहब्बते अहले बैत है जिससे तमाम अवलिया ए ख़ुदा की मुहब्बत पैदा होती है।(इमाम मुहम्मद बाक़िर(अ)(यनाबीऊल मवद्दत 512)
    25- “وَقِفُوهُمْ إِنَّهُم مَّسْئُولُونَ”(साफ़ात 25)
    रोज़े क़यामत सबसे पहले मरहले पर मुहब्बते अहलेबैत के बारे में सवाल किया जायेगा।(रसूले अकरम)(ग़ायतुल मराम पेज 259)
    26- “سَلَامٌ عَلَى إِلْ يَاسِينَ”(साफ़ात 131)
    (إِلْ يَاسِينَ) आले मुहम्मद हैं।(इब्ने अब्बास)( ग़ायतुल मराम पेज 382)
    27- “إِلَى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ”(साद 82)
    (يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُوم) रोज़े ज़हूरे क़ाएमे आले मुहम्मद है।(इमाम जाफ़र सादिक़(अ)( यनाबीऊल मवद्दत पेज 509)
    28- “قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَى”(शूरा 24)
    (الْقُرْبَى) मुरसले आज़म के क़राबत दार हैं।(सईद इब्ने जबीर)(फ़ी ज़िलालिल क़ुरआन जिल्द 7 और दूसरी बहुत सा किताबें)
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