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    क़ुरआन मजीद पर हाथ रखके क़सम खाना

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    सवालः मेंने क़ुरआने मजीद पर हाथ रख कर किसी काम को न करने की क़सम खाई लेकिन फिर दोबारा उस काम को अंजाम दे दिया तो क्या मुझ पर कफ़्फ़ारा वाजिब होगा? अगर वाजिब होगा तो कितना?
    जवाबः अगर क़सम अल्लाह के नाम या सिफ़ात के साथ न हो तो कफ़्फ़ारा वाजिब नहीं है।