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    कुमैल का स्वर्गवास

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    कुमैल महान एवं माननीय चरित्र की योग्यता के कारण हज्जाज पुत्र युसुफ़े सक़फ़ि के हाथोशहीद हुए, ऐसी शहादत कि जिसकी सूचना से उसके प्रमी अली (अ.स.) ने उसे सूचितकिया था।

    अमवी अत्याचारी शासक की ओर से जिस समय हज्जाज पुत्र युसुफ़ सक़फ़ि इराक काराज्यपाल नियुक्त हुआ, तो उसने कुमैल को खोजा ताकि उसे अहलेबैत (अलैहेमुस्सलाम) केप्रम के अपराध तथा शिया होने के दोष मे – जो कि बनि उमय्या की संस्कृति मे सबसेबड़ा पाप था – कत्ल करे।

    कुमैल ने ख़ुद को हज्जाज से गुप्त रखा था, हज्जाज ने कुमैल की जाति के लोगो कोराजकोष से मिलने वाले हक़ूक़ बंद कर दिये थे। जिस समय कुमैल अपनी जाति के लोगोके हक़ूक़ बंद होने से सूचित हुए तो कुमैल ने कहाः

    “मेरे जीवन मे कुच्छ शेष नही बचा है, यह बात शोभा नही देती कि मेरा अस्तित्व एक समूह की रोजी रोटी के बंद होने का कारण बने”।

    कुमैल अपने गुप्त स्थान से बाहर निकल कर हज्जाज के पास गये। हज्जाज ने कहाः ( तुझे सज़ा देने के लिए मै तेरी खोज मे था)।

    कुमैल ने उत्तर दियाः

    जो तेरी इच्छा है उसे पूरा कर, मेरे जीवन का थोड़ा समय शेष बचा है, अति शीघ्र मै और तुम ईश्वर की ओर वापस हो जाएगे, मेरे मोला (मालिक) ने मुझे सुचित किया है कि तू मेरा हत्यारा (क़ातिल) है।

    हज्जाज ने आदेश पारित किया, कुमैल का सर उसके शरीर से काट दिया।[1]

    इराक के दो शहर नजफ़ और कुफ़ा के बीच सविय्या क्षेत्र मे कुमैल की समाधी श्रद्धालुओ की ज़ियारतगाह है।


    [1] अलइसाबा, भाग 5, पेज 486; अलबिदाया वननिहाया, भाग 9, पेज 47

     

    رَوَی جَرِیر عَنِ المُغَیرَۃِ قَالَ: لَمَّا وَلِیَ الحَجَّاجُ طَلَبَ کُمَیلَ بنَ زِیَاد فَھَرَبَ مِنہُ فَحَرَمَ قَومَہُ عَطَاھُم فَلَمَّا رَأَی کُمَیل ذَلِکَ قَال: أَنَا شَیخ کَبِیر وَ قَد نَفَدَ عُمُرِی لَا یَنبَغِی أَن أَحرِمَ قَومِی عَطَاھُم۔ فَخَرَجَ فَدَفَعَ بِیَدِہِ إِلَی الحُجَّاجِ فَلَمَّا رَآَہُ قَالَ لَہُ: لَقَد کُنتُ أُحِبُّ أَن أَجِدَ عَلَیکَ سَبِیلاً۔ فَقَالَ لَہُ کُمَیل: لَا تَصرِف عَلَیَّ أَنیَابکَ وَ لَا تَھدِم عَلَیِّ فَو أللہِ مَا بَقِیَ مِن عُمُرِی إِلَّا مِثلُ کَوَاھِلِ الغُبَارِ فَاقضِ مَا أَنتَ قَاض فَإِنَّ مَوعِدَ لِلَّہِ وَ بَعدَ قَتلِ الحِسَابُ وَ لَقَد خَبَّرَنِی أَمِیرُالمُؤمِنِینَ عَلَیہِ السَّلَامُ أَنَّکَ قَاتِلِی فَقَالَ لَہُ حَجَّاجُ: الحُجَّۃُ عَلَیکَ إذاً۔ فَقَالَ لَہُ کُمَیل: ذَاکَ إِذَا کَانَ القَضَاءُ إِلَیکَ۔ قَالَ: بَلَی قَد کُنتَ فِیمَن قَتَلَ عُثمَانَ بنَ عَفَّانَ إِضرِبُوا عُنُقَہُ فَضُرِبَت عُنُقُہُ

     

    “ रवा जरीरुन अनिल मुग़ैरते क़ालाः लम्मा वलेयल हज्जाजो तलबा कुमैलब्ना ज़ियादिन फ़हरबा मिन्हो फ़हरमा क़ौमहू अताहुम फ़लम्मा राआ कुमैलुन ज़ालेका क़ालाः अना शैख़ुन कबीरुन वक़द नफ़दा ओमोरि ला यनबग़ी अन अहरेमा क़ौमी अताहुम। फ़ख़रजा फ़दफ़आ बेयदेही एलल हुज्जाजे फ़लम्मा रआहो क़ाला लहूः लक़द कुन्तो ओहिब्बो अन अजेदा अलैएका सबीला। फ़क़ाला लहू कुमैलुनः ला तसरिफ़ अलय्या अनयाबका वला तहदिम अलय्या फ़वल्लाहे मा बक़ेया मिन ओमोरि इल्ला मिसलो कवाहेलिल ग़ुबारे फ़क़्ज़े मा अनता क़ाज़िन फ़इन्ना मौएदा लिल्लाहे व बादा क़त्लिल हिसाबो वलक़द ख़ब्बरनि अमीरुल मोमेनीना (अलैहिस्सलाम) अन्नका क़ातेली फ़क़ाला लहु हज्जाजोः अलहुज्जतो अलैएका एज़न। फ़क़ाला लहु कुमैलुनः ज़ाका एज़ा कानलक़ज़ाओ इलैएका। क़ालाः बला क़द कुन्ता फ़ीमन क़तला उसमानब्ना अफ़वाना इज़रेबू ओनोक़हु फ़ज़ोरेबत ओनोक़ोहु ”