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    कुमैल की प्रार्थना की प्रमाणकता – 2

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    पुस्तक का नामः दुआए कुमैल का वर्णन

    लेखकः आयतुल्लाह अनसारीयान

    इस से पहले वाले लेख मे हमने बताया था कि कुमैल ने अमीरुल मोमेनीन को सजदे मे इस दुआ को पढते हुए देखा था इस लेख मे जिस बात का वर्णन अमीरुल मोमेनीन ने कुमैल को किया है उसको आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है ताकि आप भी इस से लाभ उठा सके।

    2. सैय्यद पुत्र ताऊस ने इक़बालुल आमाल नामी पुस्तक मे रिवायत की है कि कुमैल ने कहाः एक दिन बसरे कि मस्जिद मे अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) के साथ बैठा हुआ था, 14 शाबान से समबंधित अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) ने कहाः जो व्यक्ति इस रात्रि को पूजा करने मे गुजारे और हजरते ख़िज़्र अलैहिस्सलाम कि प्रार्थना को इस रात्रि मे पढ़े, तो उस व्यक्ति की प्रार्थना स्वीकार होगी। जैसे ही अमीरुल मोमेनीन घर आये तो मै रात्रि मे उनके घर गया, मुझे देखकर अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) ने प्रश्न किया हे कुमैल किस लिए आये है? मैने उत्तर दिया कि हजरते ख़िज़्र की प्रार्थना (दुआए हजरते ख़िज़्र) के लिए आया हूँ।

    अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) ने कहाः बैठ जाओ।

    हे कुमैल, इस प्रार्थना को कंठित करो तथा प्रत्येक गुरूवार रात्रि को एक बार अथवा महीने मे एक बार अथवा वर्ष मे एक बार अथवा पूरे जीवन मे एक बार पढ़ो, शत्रुओ की बुराईयो से छुटकारा प्राप्त होगा तथा ईश्वर तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारी जीविका मे वृद्धि करेगा तथा तुम्हारे पापो को क्षमा कर देगा।

    (http://www.erfan.ir/)

    जारी