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    कूरआन परिवर्तन होने से पवित्र है

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    हाँ, पवित्र क़ुरअन मजीद परिवर्तन से पाक व पवित्र रहने के बहूत सारे कारण है, जिस में से एक कारण बयान किया जा चूका हैं. क्योंकि पवित्र क़ुरअने मजीद रसूले अकरम (स.) की रह्बरी में एकत्रीत किया गया है। और इस कूरआन पर मुस्लमानों को एक विशेष यक़ीन व ईमान है और कूरआन ऊन मुस्लमानों के इख़तियार में है, यह पवित्र आसमानी पुल्तक हक़ीक़त में हमेंशा के लिए मोज़ेज़ा है. क्योंकी तौरात हूदुदान दोहज़ार साल, इंज़िल तीन सौ साल तक जनसाधारण व्यक्तियों के दर्मियान उपस्थित नहीं था, और विभिन्न प्रकार सियासी व राजनिती उस पुल्तक में प्रवेश करने के बाद जमा किया गया था. लेकिन क़ुरअने मजीद नाज़िल होने के समय से लेकर आज तक उसी तरह बाक़ी है और किसी प्रकार के नुक़्च व ऐब, कम व बेशि नहीं है. पैग़म्बरे अकरम (स.) के यूग में भी इस तरह एकत्रीत किया गया है. उलमाएं शीया हज़रात इस अतीत इतिहास में सम्पूर्ण यक़ीन के साथ परिष्कार भाषा में बयान किया है. की पवित्र कूरआन किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हूई है. मिसालः मुहद्दिस बुज़ुर्ग शैख सुदूक़, आपने यूग के बुज़ुर्ग मर्जए तक़्लीद शैख मूफ़ीद, और अपर बुज़र्गान जैसे सैय्यद मूर्तज़ा, शैखूत्ताएफा शैख तुसी,मूफस्सिरे कबीर शैख ताबर्सी, और अपर शिया सम्प्रदाय के उलामाएं बुज़ुर्ग सम्पूर्ण यक़ीन के साथ बयान किया है कि पवित्र कूरआन तह्रीफ़ नहीं हुई है।