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    क्या इमाम का हर जगह होना ज़रूरी है?

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    जवाबः इमाम, पैग़म्बर (स) का उत्तराधिकारी होता है और जो कर्तव्य और ज़िम्मेदारियां पैग़म्बर (स) पर होती हैं (वही यानी गॉड मैसेज को छोड़ कर) वही ज़िम्मेदारियां इमाम के लिए भी होती हैं।
    जिस तरह पैग़म्बर (स.अ) को अपने कर्तव्यों के पालन के लिए सभी जगहों पर शारीरिक तौर पर उपस्थित होना ज़रूरी नही है, उसी तरह इमामत की ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए, इमाम का शारीरिक रूप मे हर शहर मे उपस्थित होना ज़रूरी नही है। बल्कि किसी देश के प्रेसीडेन्ट या राष्ट्रपति के लिए भी यह आवश्यक नही है कि वह अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए देश के हर कोने मे हर समय उपस्थित रहे, और इस बात को थोड़ी भी अक़्ल रखने वाला समझ सकता है। इमामों की ज़िम्मेदारियां निम्नलिखित हैं:
    1. दीन-ए-इसलाम को ज़िंदा रखना और उसकी सुरक्षा करना।
    2. इस्लाम के आदेशों और नियमों को बयान करना और उनकी व्याख्या (explanation) करना।
    3. ऊंचाइयों तक पहुंचने और अल्लाह की दी हुई चीज़ों से फ़ायदा उठाने के लिए लोगों का मार्गदर्शन करना। स्पष्ट है कि इन ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मासूम इमाम के लिए शारीरिक तौर पर सभी जगहों पर मौजूद होना ज़रूरी नही है। इसलिए लीडर ( दीनी व पॉलीटिकल, पिछले ज़माने मे और आज) को अपने टॉर्गेट को पूरा करने के लिए हर जगह हर समय मौजूद होने की ज़रूरत नही है।
    4. इसके अलावा क़ुरान-ए-मजीद की आयतों के अनुसार पैग़म्बर-ए-अकरम (स) हर समय व हर जगह लोगों को देखने वाले हैं, आप (स.अ) के सच्चे उत्तराधिकारी भी सभी जगह और समय मे मौजूद और निगरानी करने वाले हो सकते हैं। लेकिन इस्लामी फ़्लास्फ़ी के अनुसार इंसान तरक़्क़ी के संदर्भ मे एक ऐसे स्थान पर पहुंच जाता है कि सभी जीव-जन्तु उसके अंग जान पड़ते हैं, इसी वजह से वह दुनिया के सभी जीवों के बारे मे जानता है और उनकी खबर देता है।