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    गन्दगी से आजीविका कम होती है

    गन्दगी से आजीविका कम होती है
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    प्राकृतिक रूप से मनुष्य स्वच्छता और सुन्दरता को पसंद करता है। वह स्वच्छ घर, सुन्दर परिधान और अच्छी सुगंध से आन्दित होता है और इसके मुक़ाबले में गंदगी से दूर रहना चाहता है। इस्लामी शिक्षाओं में भी स्वच्छता की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। इस्लाम पवित्र मन और आत्मा को सम्मान देता है। इसी कारण उसने कुछ गंदगियों को नजिस अर्थात अपवित्र बताया है और उनको पवित्र करने के लिए कुछ चीज़ों का उल्लेख किया है। पवित्र करने वाली चीज़ों में जल, वर्षा, सूर्य का प्रकाश और धरती का उल्लेख किया गया है। इस्लाम में अपवित्रता और गंदगी को निर्धनता और बीमारी का कारण बताया गया है। इस्लामी शिक्षाओं में बहुत से स्थानों पर गंदगी या अपवित्रता को शैतान के नाम से याद किया गया है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) का एक कथन है कि कूड़े को घर में न रखो बल्कि उसे बाहर फेंक दो क्योंकि वह शैतान का स्थान है, बर्तनों के धोना और घर की सफाई, आजीविका में वृद्धि का कारण बनती है। स्वास्थ्य से संबन्धित इस्लाम के आदेश बहुत ही सुदृढ़ हैं और किसी अन्य धर्म में इन जैसे आदेश देखने को नहीं मिलते। इस्लाम, स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए स्वस्थ रहने, स्वच्छता की सुरक्षा तथा खाने में फ़िज़ुलख़र्जी से बचने जैसी बातों को स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु आवश्यक मानता है। इसके अतिरिक्त इस्लाम चाहता है कि मदिया और मादक पदार्थों सहित हर उस चीज़ से जो शारीरिक और मानसिक स्थास्थ्य को क्षति पहुंचाए, मनुष्य को बचना चाहिए। मनुष्य के स्वास्थ्य को सही रखने में पौष्टिक खाद्य पदार्थों और विभिन्न खाद्य पदार्थों के प्रयोग की महत्वूपूर्ण भूमिका है। अनुचित और प्रदूषित भोजन के विभिन्न दुष्प्रभाव सामने आते हैं। पवित्र क़ुरआन में भी ईश्वर ने मनुष्यों को पवित्र आहार के प्रयोग का निमंत्रण दिया है। सूरए ताहा की आयत संख्या ८१ में ईश्वर कहता है कि हमने तुमको जो पवित्र खाने दिये हैं उनको खाओ। वर्तमान समय में चिकित्सक भी लोगों से स्वच्छ और प्राकृतिक खानों के प्रयोग का आह्वान करते हैं। सब्ज़ी और फल जैसे पौष्टिक भोजन शरीर के सेल्स तक उचित पदार्थों को पहुंचाते हैं। किसी भी स्थिति में पौष्टिक रहित एवं चटपटी चीज़ें, पौष्टिक पदार्थों का स्थान नहीं ले सकतीं। फलों को साफ रखने के संबन्ध में इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम का कथन है कि हर फल पर विष होता है अतः जब भी फल लाओ तो उन्हें धो लो या फिर पानी में डाल दो अर्थात उनको उचित प्रकार से धो लिया करो। ऐसे समय में कि जब व्यक्ति अतिसूक्ष्म वस्तुओं को नहीं जानता था और माइक्रोस्कोप से देखी जाने वाली चीज़ों से अवगत नहीं था पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके परिजन गंदगी या माइक्रोव को शैतान या विष की संज्ञा देते थे। वे अपने इस कार्य से लोगों को प्रदूषित और बीमार करने वाले तत्वों से रोका करते थे।इस्लाम की स्वास्थ्य से संबन्धित शिक्षाओं में कुछ फलों के छिलकों को न उतारने की भी बात कही गई है। वर्तमान समय में चिकित्सक, लोगों से कुछ फलों को उनके छिलके के साथ खाने की सिफ़ारिश करते हैं। सेब और शीफल जैसे फल यदि उनके छिलकों के साथ खाए जाएं तो ऐसे में शरीर में अधिक विटमिन पहुंचते हैं। इसका कारण यह है कि इन फलों के पौष्टिक तत्व, इन फलों के छिलकों के नीचे पाए जाते हैं। खाद्य पदार्थों को धोने और साफ़ करने के अतिरिक्त, स्वास्थ्य के लिए उनका ताज़ा होना भी महत्व रखता है। ताज़े फल, सब्जियों और मांस का प्रयोग न केवल यह कि चिकित्सकों की सिफ़ारिश है बल्कि पवित्र क़ुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम (स) एवं उनके परिजनों के कथनों में भी इस विषय का उल्लेख मिलता है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) हर फ़सल के फलों के प्रयोग को उचित बताते हैं। उनका एक कथन है कि तुमको प्रत्येक फ़स्ल के आरंभ में उसके फलों का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि यह स्वास्थय का कारण और दुखों के निवारण का कारक बनता है। उनको फस्ल के जाते समय छोड़ दो क्योंकि इस समय यह शरीर के लिए समस्या का कारण बनते हैं। ताज़े खाद्य पदार्थ युवा बने रहने का कारण बनते हैं। इस समय इस बात की पुष्टि वैज्ञानिकों ने भी की है। ताज़े फल और सब्जियां तव्चा को समय से पूर्व ख़राब होने से बचाते हैं। इसका कारण यह है कि इनमें अधिक मात्रा में एंटी एक्सीदान पाया जाता है। अधिकांश सब्ज़ियों में यह विशेषता पाई जाती है। इस्लाम में स्वास्थ्य से संबन्धित शिक्षाओं में मांस को धो कर खाने पर बल दिया गया है। इस संबन्ध में पैग़म्बरे इस्लाम (स) का एक रोचक कथन इस प्रकार है। वे कहते हैं कि मेरे भाई ईसा एक बस्ती से गुज़र रहे थे। उन्होंने देखा कि उस बस्ती के लोगों के चेहरे पीले और उनकी आंखें नीली हैं। उन लोगों ने उनसे अपनी बीमारी की शिकायत की। इस पर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने कहा कि तुम्हारा उपचार तुम्हारे ही पास है। तुम लोग मांस को बिना धोए पकाते हो। जान लो कि कोई भी प्राणी बिना किसी संक्रमण के नहीं मरता। उस दिन से उन लोगों ने गोश्त को धोकर पकाना आरंभ किया जिसके परिणाम में उनको इस बीमारी से मुक्ति मिल गई।रूस के विद्धान मेचेन्कोफ़ का कहना है कि बीमारियां और शीघ्र बुढ़ापा ऐसी स्थिति में उत्पन्न होता है जब विषैले भोजन के माध्यम से विषाक्त माइक्रोब, आंतों में पहुंचकर गतिशील हो जाते हैं और अपने विष को शरीर की रगों तक पहुंचाते हैं। क्योंकि पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके परिजन सृष्टि के रहस्यों से पूर्ण रूप से अवगत थे इसीलिए उन्होंने अपने वचनों में कहीं-कहीं पर इसके कुछ रहस्यों से पर्दा उठाया है। इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के एक साथी जुरजानी ने इमाम रज़ा से पूछा कि इस बात से क्या तात्पर्य है कि ईश्वर बहुत ही सुनने वाला और देखने वाला है। इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम ने इसके उत्तर में कहा कि ईश्वर को सृष्टि का पूर्ण ज्ञान है। क्या तुम उसकी शक्ति की निशानियों को वनस्पतियों और मच्छर जैसे छोटे जीवों या फिर उससे भी छोटे जीवों में नहीं पाते जिन्हें हमारी आंखें नहीं देख सकतीं। यह जीव इतने सूक्ष्म होते हैं कि इनकी सूक्ष्मता के कारण ही इनके लिंग का पता लगाना संभव नहीं होता और इसी प्रकार यह भी जानना असंभव होता है कि कौन बच्चा है और कौन बड़ा है? यह प्रांणी समुद्रों की लहरों, वृक्षों की छालों के बीच और मरूस्थलों में जीवन व्यतीत करते हैं। क्योंकि यह बहुत ही छोटे होते हैं अतः न तो इनको देखा जा सकता है और न ही इन्हें छुआ जा सकता है। इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम ने माइक्रोस्कोप के आविष्कार से शताब्दियों पूर्व इस बिंदु की ओर संकेत किया था। स्वभाविक रूप से मनुष्य का हाथ विभिन्न चीज़ों के संपर्क में रहता है जिसके कारण वह संक्रमित हो जाता है इसलिए उसका साफ रखना विशेषकर खाना खाते समय विशेष महत्व रखता है।स्वास्थ्य से संबन्धित इस्लामी शिक्षा में पवित्रता विशेषकर हाथों को धोने को दीर्घायु का कारण बताया गया है। इमाम अली अलैहिस्सलाम का कहना है कि खाना खाने से पहले और उसके पश्चात हाथों का धोना, दीर्घायु का कारण बनता है। हाथों की सफाई के संदर्भ में इस्लामी शिक्षाओं में नाख़ूनों को साफ रखने और उनके काटने पर विशेष बल दिया गया है। नाख़ून बैक्टीरिया तथा अन्य कीटाणुओं के एकत्रित होने का स्थल बनता है जो संक्रमण का कारण भी बन सकता है। इसीलिए नाख़ूनों को नियमित रूप से काटते रहना चाहिए। हज़रत मुहम्मद (स) कहते हैं “नाख़ूनों का काटना असाध्य रोगों जैसी बीमारियों को रोकता है और आजीविका में बढोत्तरी का कारण बनता है”

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