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    गीलिअर्द एवं बारीकान गांव

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    तालेक़ान क्षेत्र ईरान के पर्वतीय और अद्वितीय घाटियों वाला क्षेत्र है जो पश्चिमी अलबुर्ज़ क्षेत्र में स्थित है। पूरब से पश्चिम तक तालेक़ान का पूरे क्षेत्र में शाहरूद नामक नदी फैली हुई है। यह नदी अलमौत नामक नदी और उसके बाद सफ़ेद झील में मिल जाती है। तालेक़ान क्षेत्र पश्चिमोत्तरी तेहरान से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इस क्षेत्र में एक बड़ी घाटी शामिल है जिसमें लगभग 90 गांव बसे हुए हैं। 4000 मीटर की ऊंचाईयों वाली चोटियों, झरनों, सुन्दर सोतों और प्राकृतिक गुफाओं के असित्व ने इस क्षेत्र को ईरान के सुन्दर प्राकृतिक क्षेत्रों में परिवर्तित कर दिया है। इस प्रकार से यह पर्वतीय क्षेत्र और इसकी अनछुई प्रकृति, मनमोहक जलवायु और राजधानी से सामान्यतः कम दूरी पर स्थित होने के कारण तेहरान का ठंडा क्षेत्र समझा जाता है। तालेक़ान क्षेत्र में बसंत ऋतु और गर्मी के मौसम में बहुत से प्राकृतिक प्रेमी भ्रमण के लिए जाते हैं। इस क्षेत्र के अधिकांश गांव की अलबुर्ज़ पर्वतांचल और ऊंचाईयों पर स्थित होने के कारण गर्मी के मौसम में भी यहां की जलवायु संतुलित और ठंडी होती है और नगरीय प्रदूषण से दूर हैं।

    मित्रो कार्यक्रम के इस भाग में हम तालेक़ान क्षेत्र के गीलिअर्द नामक गांव से आपको परिचित करवाएंगे।

    तालेक़ान क्षेत्र में गिलअर्द नामक सुन्दर गांव शाहरूद नदी के दक्षिणी छोर पर स्थित है। इस गांव की ऊंचाई समुद्र तल से 2224 मीटर है और गर्मी के मौसम में इस गांव की जलवायु संतुलित और ग्रीष्म ऋतु में ठंडी होती है। इस गांव के लोग फ़ारसी भाषा में बातचीत करते हैं।

    गीलिअर्द गांव की प्राचीनता का संबंध 500 से 600 वर्ष है। इसी गांव में ईरान के प्रसिद्ध धार्मिक और क्रांतिकारी हस्ती वरिष्ठ धर्म गुरू स्वर्गीय सैयद महमूद तालेक़ानी का जन्म हुआ था। यह उन्हीहं धर्म गुरूओं में से थे जिन्होंने पहलवी के अत्याचारी और भ्रष्ट शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और अपनी आयु का अधिकांश समय उन्होंने अत्याचारी पहलवी की जेल में बिताया। वरिष्ठ धर्मगुरू सैयद महमूद तालेक़ानी इमाम ख़ुमैनी के साथियों में से थे और ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता में इनका बहुत अधिक प्रयास रहा है।

    गीलिअर्द गांव की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन और बाग़बानी की गतिविधियों पर निर्भर है। इस गांव के कुछ लोग सेवा और हस्त उद्योग में भी व्यस्त रहते हैं। इस गांव के कृषि और पशु पालन उत्पादों में अनाज, ठंडे मौसमें पैदा होने वाले फल, अख़रोट, सेब, चेरी, ब्लैक चेरी और दूध से बनी वस्तुएं सम्मलित हैं।

    गीलिअर्द गांव की बनावट घनी है और हल्की ढलान पर स्थित है। इस गांव के अधिकांश प्राचीन घर एक मंज़िला हैं किन्तु कुछ नये बने हुए घर दो मंज़िला हैं जिसमें हाल भी है। इस गांव के अधिकांश घरों की छतें ढलुवा होती हैं। इस गांव के प्राचीन घरो के निर्माण में पत्थर, मिट्टी और लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है। यहां के घरों में बैठक, डायनिंग रूम, रसोई, शौचालय, प्रांगड़ और स्टोर रूम बने होते हैं। गीलिअर्द गांव के घरों में सुन्दर लकड़ियों की खिड़कियां और द्वार बने होते हैं। इस गांव के घरों में रोटी बनाने के लिए भी कुछ स्थान छोड़ा जाता है जो तनूरे ख़ाने के नाम से प्रसिद्ध होता है। गांव के मार्ग हरे भरे बाग़ों प्राचीन वृक्षों के पाये जाने के कारण, सुन्दर बाग़ों की गलियों की भांति है। हालिया वर्षों में देश की धरोहर संस्था के प्रयासों से इस गांव की दीवारों और फ़र्श की पारंपरिक डिज़ाइनों से मरम्मत की गयी है। गीलिअर्द गांव स्वच्छ जल, बिजली,टेलीफ़ोन और सार्वजनिक शौचायलों की सुविधाओं से संपन्न है।

    गीलिअर्द गांव पर्वतीय क्षेत्र में स्थित होने और मनमोहक व संतुलित जलवायु के कारण सुन्दर एवं रमणीय प्राकृतिक दृश्यों का स्वामी है। ठंडे क्षेत्र वाले इस गांव में गर्मी के मौसम में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। गांव के मार्ग के इर्द गिर्द प्राकृतिक दृश्यों और बाग़ों के सुन्दर व्यापक दृश्य देखने योग्य हैं। गांव के आस पास की ऊंचाईयों का विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और फूलों विशेषकर बसंत और ग्रीष्म ऋतु में ढका होना, इस गांव के अन्य प्राकृतिक आकर्षण हैं।

    प्राचीन स्नानघर और वरिष्ठ धर्मगुरू सैयद महमूद तालेक़ानी का घर इस गांव के एतिहासिक स्थल हैं। सैयद महमूद तालेक़ान का घर गांव के मध्य तथा गांव की मस्जिद के किनारे स्थित है। इस बड़े घर की बनावट सुन्दर और पारंपरिक है और इस इमारत की प्राचीन का संबंध क़ाजारी शासन काल से है। वर्तमान समय में सैयद महमूद तालेक़ानी का घर संग्राहलय में परिवर्तित हो चुका है। इस गांव के प्राचीन स्नान घर की मरम्मत देश की सांस्कृतिक धरोहर संस्था द्वारा किया गया है। इस स्नानघर का गुबंद गोलकार है। इस स्नानघर के निर्माण में पत्थर, सीमेन्ट और चूने का प्रयोग किया गया है।

    गीलिअर्द गांव के हस्त उद्योग के उत्पादों में दरी, जाजीम, मोज़े, दस्ताने और शाल है। इस गांव का मुख्य उपहार, अच्छी जलवायु, विभिन्न प्रकार के सूखे मेवे और आख़रोट है।

    करज़-क़ज़वीन राज्यमार्ग और तालेक़ान मार्ग से इस गांव में सरलता से पहुंचा जा सकता है।

    कार्यक्रम के इस भाग में तालेकान क्षेत्र के एक अन्य गांव बारीकान से आपको परिचित करवाएंगे। बारीकान गांव तालेक़ान के प्राचीन सुन्दर गांवों में से है और इसके सामने तालेक़ान बांध है। यह गांव पर्वतीय है और समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 2350 मीटर है और तेहरान से इस गांव की दूरी 135 किलोमीटर है।

    बारीकान स्थानीय लोगों की भाषा में हरा भरा और कृषि उत्पादों से संपन्न स्थान के अर्थ में है। बारीकान गांव की ज़मीन प्राचीन काल से ही प्रयत्नशील किसानो के प्रयासों से, कृषि और बाग़ के विभिन्न उत्पादों विशेषकर सेबों के बाग़ के लिए हरी भरी रही है।

    एतिहासिक प्रमाणो के आधार पर बारीकान गांव वर्तमान स्थल पर लगभग 270 वर्ष पूर्व नादिर शाह दुर्रानी के अंतिम काल में बसाया गया। उल्लेखनीय है कि अतीत में बारीकान गांव सहित तालेक़ान क्षेत्र में विभिन्न भूकंप आए हैं।

    सदैव बहने वाली बारीकान नदी और मौसमी नदी कामीकी और विभिन्न सोते, इस गांव के किसानों की पानी की आवश्यकता की आपूर्ति करते हैं। मित्रों आपके लिए जानना उचित है कि अतीत से बारीकान गांव के निवासियों और तालेक़ान क्षेत्र के अन्य ग्रामवासियों के मध्य विभिन्न प्रकार का आपसी सहयोग विशेषकर इस क्षेत्र की महिलाओं के मध्य सहयोग और लेनदेन रहा है। इस प्रकार का सहयोग गांव के पशुपालकों के समर्थन के लक्ष्य से विशेषकर जिनके पास पशुओं की संख्या कम है, किया जाता है। इस प्रकार के सहयोग के अंतर्गत गांव वाले पशुओं से प्राप्त दूध को बारी बारी एक व्यक्ति के हवाले कर देते हैं ताकि वह उससे मक्खन, पनीर, खोया और दूध की विभिन्न वस्तुएं बनाए। इस प्रकार की सहयोग की शैली से बारी आने पर हर परिवार के पास अधिक मात्रा में दूध हो जाता है।