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    घर का माहौल बच्चे पर असर डालता है

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    कहते हैं कि इंसान का कैरेक्टर उसकी शख़्सियत की बुनियाद होता है। कुछ लोगों की शख़्सियत इतनी रोबदार होती है कि दूसरा उनसे बात करते हुए हिचकिचाता है और कुछ लोगों की शख़्सियत में ज़ाहिरी तौर पर तो ऐसी कोई बात नहीं होती लेकिन उसके चलने फिरने, उठने बैठने और बात करने का अंदाज़ इम्प्रेस करने लगता है।
    एक्सपर्टस लोग कहते हैं कि माँ-बाप का बिहेवियर बच्चों की शख़्सियत की तराश-ख़राश में बहुत ख़ास रोल अदा करता है दूसरे लफ़्ज़ों में बच्चों की शख़्सियत की बुनियाद अस्ल में पैरेंट्स के ज़रिए बनाए गए घरेलू माहौल से पड़ती है। जिसमें बच्चे सिर्फ़ ज़िन्दगी गुज़ारने के उसूल सीखते हैं।
    आमतौर पर यह भी देखने में आता है कि लोगों की एक बहुत बड़ी तादाद अपनी शख़्सियत की कमज़ोरी की वजह से अपने घर के ख़राब माहौल को बताती है। किसी भी बच्चे में यह कमज़ोरी उसकी जिन्दगी के हर मौड़ पर अपना असर छोड़ती है और वह तरह तरह की परेशानियों में बिला वजह घिरा रहता है।
    उसे दूसरे कामों को करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वक़्त इतनी तेज़ी से बदलता जा रहा है कि लोगों की ख़्वाहिशों और पसन्द-नापसन्द का अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल हो गया है। इंसान के लिए पहला और आख़िरी स्कूल उसका अपना घर होता है। एक बच्चा जो कुछ अपने घर से सीखता है, वह किसी और जगह से नहीं सीख सकता। जिस तरह घर से मिली ख़ुशियाँ हमेशा सब से पहले याद आती हैं, उसी तरह घर से मिली हुई महरूमियाँ भी इंसान का साथ बन जाती हैं जो हर वक़्त उसका पीछा करती रहती हैं। लोगों के कैरेक्टर के बनने-संवरने और निखार लाने में घर का माहौल बुनियादी रोल अदा करता है और कभी-कभी बेजा लाड-प्यार बच्चों की परवरिश और कैरेक्टर को भी बिगाड़ देता है। पैरेंट्स का फ़र्ज़ यह है कि वह अपने बच्चों को ऐसा ख़ुशगवार माहौल दें कि वह आगे चलकर एक ख़ुशगवार और ख़ूबसूरत ज़िन्दगी गुज़ार सकें। अगर घर का माहौल सही न हो तो बच्चे के कैरेक्टर पर भी उसका बहुत ग़लत असर पड़ता है।

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