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    जनाबे शहेरबानों की स्टोरी

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    सवाल 11: क्या तीसरे यज़्दगिर्द की बेटी जनाबे शहर बानों, इमाम सज्जाद अ. की माँ थीं और कर्बला की ज़मीन पर मौजूद थीं? और इमाम हुसैन अ. के हुक्म से ईरान की तरफ़ को चला जाना और उस मज़ार में दफ़्न होना जो फ़िलहाल तेहरान में बीबी शहेरबानो के नाम से मशहूर है, सही है?

    बाद की कुछ किताबों में (जिन्होंने अपनें ख़्याल में मोतबर व विश्वस्नीय इतिहास की किताबों के हवाले से बयान किया है) इस तरह आया है:
    कि कुछ इतिहास की विश्वस्नीय किताबों में इस तरह आया है कि जनाबे शहरबानो (जो कर्बला में मौजूद थीं और जनाबे क़ासिम की की पत्नी फ़ात्मा की माँ थीं) इमाम के हुक्म से आपके घोड़े पर सवार हुईं ताकि वह उनके भाग्य की ज़मीन पर पहुँचा दे और वह अल्लाह की इजाज़त से एक घंटे में शहर पहुँच गईं और उसके आसपास के एक पहाड़ पर जनाबे सय्यद अब्बदुल अज़ीम हसनी के मक़बरे के नज़दीक दफ़्न हो गईं।
    और वहीं यह इबारत आई है कि लोगों के बीच यह बात मशहूर है कि पहाड़ की चोटी पर औरत के बुरक़े की तरह कोई चीज़ नज़र आती है जिसके नज़दीक कोई आदमी नहीं जा सकता है और गर्भवती औरत जिसके पेट में लड़का हो वह भी उसके नज़दीक नहीं जा सकती है।
    तथा यह बात भी मशहूर है कि वह जिस समय रै पहुँची तो उन्होंने “हू” (ख़ुदा) से मदद मांगना चाही लेकिन ग़लती से उन्होंनें “हू” के बजाए कूह (पहाड़) उनकी ज़बान पर आ गया और वहीं पहाड़ नें उन्हें अपने अंदर छुपा लिया।
    शायद कुछ की नज़र में इन अफ़सानों का मन गढ़न्त होना तथा इमामे सज्जाद अ. की माँ का कर्बला में मौजूद न होना स्पष्ट बात हो और उसमें बहेस व रिसर्च की ज़रूरत न हो, लेकिन चूँकि उनके बारे में पब्लिक यहाँ तक कि बहुत से बुद्धिजीवियों के बीच बहुत सारी बातें आम हैं इसलिए हम इसके सम्बंध में बहेस करते हैं बहेस के ज़्यादा साफ़ व स्पष्ट होने के लिये हम आपका ध्यान नीचे बयान होने वाली बातों की तरफ़ आकर्षित करते हैं।
    इमामे सज्जाद की माँ
    शिया व सुन्नी की अनेक किताबों की स्टडी करने से मालूम होता है कि शिया इमामों में से सबसे ज़्यादा मतभेद इमामे सज्जाद अ. की माँ के नाम के सम्बंध में पाया जाता है यहां तक कि कुछ स्कालर्स नें विभिन्न किताबों का सहारा लेते हुए 14 और कुछ नें 16 नाम तक इमाम सज्जाद अ. की माँ के सम्बंध में बयान किये हैं। उन नामों का विवरण यहाँ बयान किया जा रहा है:
    1-शहेरबानों, 2- शहेरबानवीया, 3- शाहे ज़ेनान, 4- जहान शाह, 5- शहे ज़ेनान, 6- शहेरनाज़, 7- जहान बानवीया, 8- ख़ौला, 9- बर्रा, 10- सलाफ़ा, 11- ग़ज़ाला, 12- सलामा, 13- हेरार, 14- मरियम, 15- फ़ातिमा, 16- शहेरबान।
    जबकि अहले सुन्नत की इतिहास की किताबों में सलाफ़ा, सलामा और ग़ज़ाला जैसे नामों पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है।
    लेकिन शियों की किताबों ख़ास कर उनकी हदीस की किताबों में शहेरबानो का नाम ज़्यादा मशहूर है, कुछ स्कालर्स के लिखने के अनुसार सबसे पहली बार यह नाम मुहम्मद इब्ने हसन सफ़्फ़ार क़ुम्मी (वफ़ात 290 हिजरी) की किताब हबाएरुत दरेजात में देखनें को मिला। बाद में शियों के मारूफ़ मुहद्दिस यानी शेख़ कुलीनी (वफ़ात 329 हिजरी) नें इसी किताब की रिवायत को अपनी किताब “काफ़ी” में बयान किया। बाक़ी किताबों नें या तो इन्हीं दो किताबों से लिया है या फिर कमज़ोर और अविश्वस्नीय हवालों वाली रिवायतों को अपने यहाँ जगह दे रखी है।

    जारी………..