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    जन्नतुल बक़ीअ कि तबाही – 20 (18 – 30)

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    पैग़म्बर (स॰) की बीवियों की क़ब्रें

    बक़ीअ में नीचे दी गई अज़वाज की क़बरें हैं

    (18)   ज़ैनब बिन्ते ख़ज़ीमा     वफ़ात 4 हि0

    (19)   रेहाना बिन्ते ज़ैद       वफ़ात 8 हि0

    (20)   मारिया क़बतिया        वफ़ात 16 हि0

    (21)   ज़ैनब बिन्ते जहश       वफ़ात 20 हि0

    (22)   उम्मे हबीबा            वफ़ात 42 हि0 या 43 हि0

    (23)   मारिया क़बतिया        वफ़ात 45 हि0

    (24)   सौदा बिन्ते ज़मा        वफ़ात 50 हि0

    (25)   सफि़या बिन्ते हई वफ़ात 50 हि0

    (26)   जवेरिया बिन्ते हारिस     वफ़ात 50 हि0

    (27)   उम्मे सलमा           वफ़ात 61 हि0

    ये क़बरें जनाबे अक़ील अ॰ की क़ब्र के क़रीब हैं। इब्ने बतूता के सफ़रनामे में रौज़े का जि़क्र है। मगर अब रौज़ा कहाँ है?

    (28.30) जनाब रूक़ईया, उम्मे कुलसूम, ज़ैनबः आप तीनों की परवरिश जनाब रिसालत मआब स॰ और हज़रत ख़दीजा ने फ़रमाई थी, इसी वजह से बाज़ मोअर्रेख़ीन ने आपकी क़ब्रों को ‘‘क़ुबूर बनाते रसूलुल्लाह’’ के नाम से याद किया है। रफ़त पाशा ने भी इसी ग़लती की वजह से उन सब को औलादे पैग़म्बर क़रार दिया है वह लिखते हैं। ‘‘अकसर लोगों की क़ब्रों को पहचानना मुश्किल है अलबत्ता कुछ बुज़ुर्गान की क़ब्रों पर क़ुब्बा बना हुआ है, इन कु़ब्बादार क़ब्रों में जनाब इब्राहीम, उम्मे कुलसूम, रूक़ईया, ज़ैनब वग़ैरा औलादे पैग़म्बर की क़बे्रं हैं।