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    जल्दबाज़ी का फ़ैसला

    जल्दबाज़ी का फ़ैसला
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    एक जंगल में ईश्वर से भय रखने वाला और मोमिन एक सियार रहता था जिसका नाम शअहर था वह दूसरे सियारों की भांति नहीं था इसीलिए दूसरे सियार और लोमड़ियां उससे ईर्ष्या करते थे। शअहर की दयालुता की ख्याति जंगल के राजा शेर तक पहुंची। उसने शअहर को अपने घर निमंत्रित किया। कुछ समय साथ रहने और उससे बात चीत करने के बाद उसने शअहर से यह इच्छा व्यक्त की कि वह सलाहकार बनकर रहे। शअहर ने आरंभ में जंगल के राजा का प्रस्ताव स्वीकार न किया किन्तु कुछ दिनों की वार्ता के बाद उसने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इसके बदले में उसने जंगल के राजा से कहा कि उसे वचनपत्र दे और शेर ने स्वीकार कर लिया। समझौता इस बात पर हुआ कि यदि कोई द्वेष या भय के कारण शेर से उसकी शिकायत करे और शेर भी इन बातों में आकर उसे दंड देना चाहे तो दंड देने में जल्दी नहीं करेगा और मामले की जांच पड़ताल कर लेगा। समय बीतता गया। शेर के निकट शअहर का स्थान दिन प्रतिदिन बढ़ता और बेहतर होता जा रहा था और यहीं से उसके निकटवर्तियों में ईर्ष्या आरंभ हुई। शेर के निकटवर्ती चाहते थे कि एक ऐसा काम करें कि राजा स्वयं ही शअहर की हत्या का आदेश जारी कर दे। शअहर के कामों में से एक यह था कि वह हर दिन शेर के भाग का मांस रसोईया को देता था ताकि वह उसे शेर के लिए पकाए। उस दिन भी शअहर ने यह कार्य किया किन्तु षड्यंत्रकारियों ने जिसका मुखिया भेड़िया था, रसोइया के साथ मिलकर मांस को शअहर के कमरे में छिपा दिया। शेर को नाश्ते में देरी हो रही थी उसने इसका कारण पूछा। भेड़िये ने कहा कि मुझ तक एक बहुत बुरी ख़बर पहुंची है कि मैं आपसे बताने पर विवश हूं। आज शअहर ने कोई मांस रसोइया को नहीं दिया और मांस अपने कमरे में ले गया।शेर ने आश्चर्य किया और कहा कि वास्तव में, आख़िर क्यों?भेड़िये ने कहा कि महाराज मुझे भी आपकी ही भांति आश्चर्य हुआ किन्तु मेरा मानना है कि पहले इस बारे में जांच पड़ताल कर ली जाए तो अच्छा होगा। हमें किसी को भेजना चाहिए ताकि उसके कमरे की तलाशी ले। यदि मांस वहां पाया गया तो उसका विश्वासघात खुलकर सबके सामने आ जाएगा। शेर ने कहा कि यदि उसने ऐसा किया तो उस पर धिक्कार, मैं विश्वासघात सहन नहीं कर सकता। चाहे कोई भी हो। भेड़िये ने कहा कि मैंने उसके बारे में बहुत उल्टी सीधी बातें सुनी थीं किन्तु मैंने उनपर ध्यान नहीं दिया। शेर ने कहा कि तुम्हारी बात सही है।शेर ने दो सिपाहियों को शअहर के बुलाने के लिए भेजा। कुछ ही देर बाद शअहर कमरे में प्रविष्ट हुआ, उसे किसी चीज़ की कोई ख़बर नहीं थी। उसने सलाम किया और कहा कि महाराज ने मुझे तलब किया, जो भी आदेश है, मैं सेवा के लिए तैयार हूं। शेर क्रोधित था और उसने अपना क्रोध दिखाने का प्रयास नहीं किया, उसने कहा कि आज मेरा नाश्ता मुझे नहीं मिला, तुमने मांस का क्या किया?शअहर ने कहा कि मैं मांस लेकर रसोइघर गया और रसोईया को दिया। शेर ने कहा जल्दी ही रसोईया को उपस्थित करो। वही दो सिपाही बहुत तेज़ी से गये और रसोइया को लेकर आए। शेर ने पूछा कि क्या आज सुबह शअहर ने तुम्हें मांस दिया था? रसोइया ने कहा, नहीं महाराज कोई मांस वांस नहीं दिया। शअहर ने आश्चर्य से कहा किन्तु महाराज मैंने अपने हाथों से उसे मांस दिया था, झूठ कह रहा है। भेड़िया जो अभी तक चुप था बीच में ही बात काटते हुए कहता है कि बेहतर है कि किसी को कमरे में भेजकर तलाशी ली जाए। शअहर ने कहा कि महाराज जैसी आपकी इच्छा। वही दो सिपाही गये और उन्होंने शअहर के कमरे की तलाशी ली और कुछ ही देर बाद वह मांस के एक बड़े से टुकड़े के साथ कमरे में प्रविष्ट हुए। शेर का चेहरा क्रोध से लाल हो गया, क्रोध उसपर छा गया और उसने दहाड़ कर कहा कि तुरंत इसको जेल में डालो, बाद में इसके विश्वासघात पर फ़ैसला करूंगा। शअहर ने कहा कि किन्तु महाराज, क्या आप भूल गये…। शेर ने दहाड़कर कहा चुप, इसको ले जाओ यहां से। दोनों सिपाहियों ने शअहर को जेल में डाल दिया। लोगों के जाने के बाद भेड़िये ने अवसर उचित देखा और शेर से बोला कि मुझे और मेरे मित्रों को पहले ही मालूम था और विश्वास था कि वह विश्वासघाती है किन्तु हम भयभीत थे और हम चाहते थे कि आपको स्वयं ही विश्वास हो। अब क्षमा का कोई प्रावधान नहीं है। आपका मौन इस अर्थ में होगा कि हर कोई विश्वासघात करे और दंड की परवाह न हो।शेर टहल रहा था और उसकी बातों की पुष्टि कर रहा था। भेड़िये ने कहा कि अलबत्ता मुझे और मेरे मित्रों के लिए आश्चर्य की बात यह है कि महाराज चतुरता और बुद्धिमानी के बावजूद किस प्रकार अभी तक सियार की गंदी नीयत को समझ न सके, हमने आज तक यह नहीं देखा कि महाराज से कोई बात छिपी हुई हो, इन सबसे बढ़कर आश्चर्य की बात यह है कि अब उसे दंड देने में टालमटोल करें और उसपर कड़ाई न करें। शेर ने कहा कि हां बहुत जल्दी, बहुत जल्दी ही उसके दंड के बारे में निर्णय लूंगा। अभी मुझे अकेला छोड़ दो।घटना की सूचना शेर की मां तक पहुंची, वह समझ गयी कि उसके पुत्र ने फ़ैसले में जल्दबाज़ी की है। एक बार फिर किसी ने उसे बहका दिया है और कुछ ऐसा कर दिया है जिससे उसकी बुद्धि ने कार्य करना बंद कर दिया है। उसने स्वयं से कहा कि मेरा बेटा जल्दबाज़ी कर रहा है और राजाओं के लिए जल्दबाज़ी अच्छी चीज़ नहीं है। मुझे जल्दी की उसके पास जाना होगा और उसके ग़लत काम से उसे अवगत कराना होगा। शेर अकेला परेशान बैठा हुआ था, जैसे ही उसने अपनी मां को देखा मुसकुराया और कुछ देर के लिए परेशानी दूर हो गयी। उसकी मां ने उसे सलाम किया और कहा कि अकेले ही बैठे हो बेटा? शेर ने अपनी मां के सलाम का उत्तर दिया और कहा कि मुझे एकांत की आवश्यकता है। एकांत में अच्छी तरह से सोच विचार कर सकता हूं। शेर की मां ने कहा कि सुना है बेटा कुछ घटना घटी है, इसीलिए मैं तुम्हारे पास आई हूं ताकि तुमसे कुछ बात करूं। क्या तुम यह सोचते हो कि सियार ने ऐसा किया होगा?शेर ने कहा हां। शेर की मां ने कहा क्या तुम्हें विश्वास है? शेर चुप हो गया और उसने कुछ भी नहीं कहा। शेर की मां ने तुरंत कहा कि तुम्हारा मौन इस बात का चिन्ह है कि तुमने जल्दबाज़ी की है। पछतावा जल्दबाज़ी के फ़ैसलों का परिणाम है। राजाओं के बारे में कहा जाता है कि राजा महान तब तक नहीं हो सकता जब तक उसमें अधिक सच्चाई, बुद्धि और धौर्य न हो। तुम्हें यह बात जान लेना चाहिए कि ईर्ष्यालु लोग किसी से भी ईर्ष्या कर सकते हैं। अधिक सोच विचार करो और ऐसा आदेश जारी करो जो जांच पड़ताल के आधार पर हो। मुझे तुम पर बहुत आश्चर्य हो रहा है कि मांस के एक टुकड़े के लिए तुमने सियार पर चोरी का आरोप लगा दिया। यह आरोप शोभा नहीं देता। वह मांसाहारी है ही नहीं। इस बारे में अधिक जांच पड़ताल की आवश्यकता है। बहुत ही दुष्ट वह लोग हैं जिन्होंने इस बारे में तुम्हें बताया और षड्यंत्र रचा। उन्होंने स्वयं ही उसके कमरे में मांस छिपाया ताकि उसे तुम्हारी नज़रों में गिरा दें। वह दोनों अभी बात कर रहे थे कि एक सिपाही प्रविष्ट हुआ। सिर झुकाकर उसने राजा और उसकी मां का सम्मान व आदर किया और कहा कि महाराज आपकी माता की बात पूर्ण रूप से सही है। शअहर निर्दोष है। मैं पूरी घटना से अवगत हूं और मुझे मालूम है कि इस षड्यंत्र में कौन-2 सम्मलित है। इसमें भेड़िये से लेकर रसोइया तक सब सम्मलित हैं। मैं उन सबको अच्छी तरह जानता हूं। शअहर इन सब बातों से बरी व पवित्र है। उसने दोबारा शीश नवाकर सम्मान किया और चला गया।राजा को यह बात सुनकर आश्चर्य हुआ। उसने ईश्वर का आभार व्यक्त किया कि समय रहते उसकी आंख खुल गयी और उससे ग़लती नहीं हुई। उसने अपनी मां के हाथों को चूमा। शेर की नज़रों में शअहर का व्यवहार घूमने लगा और उसे शअहर का दिया हुआ वचन पत्र याद आने लगा। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ उसने तुरंत अपने कुछ सिपाहियों को शअहर को लाने का आदेश दिया। जैसे ही शेर की नज़र शअहर पर पड़ी उसने लज्जा के साथ कहा कि मैंने अपने वचन का पालन नहीं किया और तुम्हें बिना किसी अपराध के जेल में डलवा दिया और तुम्हारी हत्या का आदेश जारी किया। मैं किस मुंह और किस ज़बान से तुमसे क्षमा मांगू?शअहर ने कहाः सबसे बुरा मित्र वह है जो अपने मित्र की परेशानी और कष्ट के समय चैन की सांस ले और इस संसार को परलोक पर प्राथमिकता दे। इस प्रकार के मित्र संसार में और हमारे ईर्द गिर्द बहुत हैं। आज जो मेरे ऊपर गुज़र रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। मुझे आशा है कि यदि मैं महाराज से यह कहूं कि आज के बाद मैं यहां पर स्वयं को अधिक सुरक्षित नहीं समझता, तो मेरी बात का बुरा नहीं मानेंगे क्योंकि अब मैं सदैव भय और डर में रहूंगा कि महाराज मुझपर भरोसा करते हैं या नहीं। शेर ने उसकी बात काटते हुए कहा कि आज तुम्हारा विदित व भीतरी हाल मुझपर स्पष्ट हो गया और ईर्ष्यालुओं की ईर्ष्या के बारे में मुझे पता चल गया। तुम्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। आज के बाद मेरी कृपा व दया तुम पर कई गुना होगी और मैं तुम्हारे प्रति इतना दयावान होऊंगा ताकि यह सब बातें तुम्हारे मन से निकल जाए और पुनः तुम मेरे बारे में वही कहो जो तुम पहले कहते थे। आज मेरी मां ने ऐसी बातें कीं जिससे मेरा पुराना दृष्टिकोण बदल गया। अब मैं नये विचार के साथ अपने और अपने निकटवर्तियों के जीवन को देखूंगा। आज मैंने यह सीखा कि क्रोध के समय फ़ैसला नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस प्रकार के फ़ैसलों से पछतावे के अतिरिक्त कुछ और हाथ नहीं लगता। शअहर को राजा की बातों में सच्चाई दिखी। ऐसी सच्चाई जो उसने शायद आज तक नहीं देखी थी। उसने इस बात का आभास किया कि उस पर विश्वास किया जा सकता है और उसे एक अवसर और देना चाहिए। उसके बाद वह वहीं रूक गया और शेर की सेवा करने लगा। मक्कार भेड़िये और उसके साथियों को उनके किए का दंड मिला।