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    ज़रूरी अहकाम

    ज़रूरी अहकाम
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    मक़ाला (लेख)

    بسم الله الرحمن الرحيم

    الحمد لله رب العلمين والصلاة والسلام علی اشرف الخلق اجمعين محمد و آله الطيبين الطاهرين واللعنة غلی اعدائهم اجمعين

    अम्मा बादः प्रत्येक मुस्लमान के लिए आपने को एक मुस्लमान कहना काफ़ी नहीं हैं, जब तक वह इस्लाम के समस्त प्रकार अच्छे और उत्तम विधानों से अच्छी तरह वाक़िफ़ न हो, और उस के मुताबिक़ अमल न करें। क्योंकि समस्त प्रकार मुस्लमानों पर दायित्व है कि इस्लाम के समस्त प्रकार विधान से वाक़िफ़ होना और आपने को विजय के लिए उस विधान पर अमल करना। (समस्त प्रकार मुस्लमान पर दायित्व है) उस के बाद अपनी फ़िक्र वसूल व यक़ीन पर मज़बूत अटल रहना, ताकि आपने को पृथ्वी में एक मुस्लमान प्रमाण करके एक विजयी ज़िन्दगी और इसके साथ साथ आख़ेरत की ज़िन्दगी में एक विजयी दिलाएं ताकि स्वर्ग मिल सके।

    और इस वजह से समस्त प्रकार मुस्लमानों पर दायित्व है कि इस्लाम की समस्त प्रकार वसूल व यक़ीन अक़ीदा व विश्वास, और उत्तम बिधानें को अर्जन के बाद अपना यक़िनों को सठीक करना और उस बिधानें पर अमल करना ज़रुरी है।

    जो व्यक्ति पवित्र इस्लाम के यक़ीन पर ईमान लाया और साथ साथ उसके जूयीयात पर अमल किया और आपने को इस्लाम के अदाब व अख़लाक़ की सून्दर पद्धति से सजाया वह पृथ्वी और स्वर्ग में विजयी होगा।

     

    प्रथम अध्याय

    उसूल व अक़ाइद इस्लाम का सूची पत्र या (फिहरिस्त)

    पवित्र इस्लाम धर्म में पाँच मौलिक विषय है जिस को उसूले दीन कहा जाता है। (1)

    1- तौहीद

    2- अद्ल

    3- नबूवत

    4- इमामत

    5- क़यामत