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    ज़ैतून व खजूर के लाभदायक गुण

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    क़ुरआन में छः बार ज़ैतून शब्द का प्रयोग किया गया है और पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके परिजनों के कथनों में ज़ैतून की चमत्कारिक विशेषता की ओर संकेत किया गया है। ज़ौतून लघु एशिया की स्थानीय वनस्पति है जो लगभग 6000 वर्ष पूर्व ऐसे क्षेत्र में उगती थी जिसकी जलवायु भूमध्य सागरीय होती है। विश्व के सबसे प्राचीन वृक्षों में से एक ज़ैतून है। अंतिम ईश्वरीय दूत हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैह व आलेही वसल्लम ने अपने भाषण में लोगों को यह सलाह दी है कि वे खाने और शरीर की मालिश करने के लिए ज़ैतून के तेल का प्रयोग करें क्योंकि इसे शुभ वृक्ष से लिया गया है। अब शताब्दियां बीतने के बाद चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने भी ज़ैतून के औषधि संबंधी लाभ का पता लगा लिया है। चिकित्सकों का कहना है कि हृदय को स्वस्थ और सुरक्षित रखने, दिल के दौरे को रोकने या हृदय से संबंधित बीमारियों में ग्रस्त होने से रोकने के लिए बेहतरीन आहार ज़ैतून या ज़ैतून के तेल का निरंतर प्रयोग है। न्यूयार्क न्यूट्रेश्न एक्ज़मीनर नामक वेब साईट की रिपोर्ट के आधार ज़ैतून के तेल में ऐसे वसा पाए जाते हैं जो सरलता से पच जाते हैं और शरीर की रक्त वाहिका को पवित्र करने के लिए इसके असाधारण प्रभाव हैं। यह मूल्यवान तेल शरीर में नकरात्मक कोलस्ट्रोल या एल डी एल को कम करता है और शरीर में एच डी एल या वही सकरात्मक कोलस्ट्रोल की मात्रा में वृद्धि करता है। वर्तमान समय में विश्व के अधिकांश क्षेत्रों में ज़ैतून के खाने वाले तेल को बहुत अधिक लोग पसंद करते हैं और सलाद तथा विभिन्न प्रकार के खाने बनाने में प्रयोग किया जाता है।आहार विशेषज्ञ श्रीमति फ़ातेमा मेअराजी ज़ैतून के अन्य लाभ की ओर संकेत करते हुए कहती हैं कि ज़ैतून का तेल प्रास्टेट के कैंसर, पाचन तंत्र, शकरा रोग, अलज़ायमर और बालों के गिरने को रोकने के लिए बहुत प्रभावी है।

    पवित्र फलों में से एक खजूर भी है कि जिसकी ओर पवित्र क़ुरआन ने संकेत किया है। इस्लामी चिकित्सा ने खजूर को शांति प्रदान करने वाला, पेट साफ़ करने वाला और हृदय को गति प्रदान करने वाला बताया है जो भूलने की बीमारी में ग्रस्त होने से रोकता है। चिकित्सा शोध इस बात के सूचक हैं कि खजूर में पाए जाने वाले मैगनेशियम के कारण ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने वाली विशेषता पायी जाती है और शरीर को अधिक ऊर्जा प्रदान करती है। यह फल इसी प्रकार फ़ास्फोरस और मैगनेशियम के पाए जाने के कारण स्मरण शक्ति को सुदृढ़ करता है।खजूर पूर्ण रूप से सांस की समस्या विशेषकर अस्थमा के लिए भी बहुत लाभ दायक है। खजूर की समस्त विशेषता के दृष्टिगत इसको पूर्ण आहार और शक्तिवर्धक कहा जा सकता है। पैग़म्बरे इस्लाम सलल्लाहो अलैह व आलेही वसल्लम ने खजूर की अदभुत और आश्चर्य जनक विशेषता के दृष्टिगत लोगों को व्यवस्थित रूप से खजूर के सेवन की सलाह दी है। इस्लामी इतिहास में आया है कि एक बार हज़रत अली अलैहिस्सलाम बीमारी के कारण कुछ कमज़ोर हो गये थे तो पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने उन्हें ख़जूर खाने से मना कर दिया। इस बात को लेकर पैग़म्बरे इस्लाम के समर्थकों में आश्चर्य व्यापत हो गया। वर्तमान समय में यह बात स्पष्ट हो गयी है कि खजूर पौष्टिक तत्वों से संपन्न है इसीलिए जो व्यक्ति कमज़ोर है और उसका अभाशय कमज़ोर है तो इन पौष्टिक तत्वों को पचाना उसके लिए कठिन होता है और उचित है कि इसके सेवन से बचा जाए।खजूर गर्भवती महिलाओं में दूध की मात्रा में वृद्धि करता है और अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। क़ुरआन की कुछ व्याख्या करने वाले इस मामले को इस बात से प्रमाणित करते हैं कि खजूर के अधिक लाभ के कारण जब हज़रत मरियम को प्रसव पीड़ा हुई तो उन्हें संबोधित किया गया कि उस वृक्ष का जिसके नीचे बैठी हो कुछ खजूर खाओ। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले या दूध या दूध से बनी वस्तुओं के साथ खजूर खाने से शरीर की भारी और कठिन गतिविधियों से उत्पन्न होने वाली थकान और परेशानी के लिए बहुत लाभदायक है। खजूर में ऐसे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो वसा कम करने और शरीर की प्रोटीन को सुनिश्चित करने में प्रभावी होते हैं। ताज़ा वैज्ञानिक शोध मनुष्य में शांति प्रदान करने में खजूर के आश्चर्य जनक और अदभुत प्रभाव की पुष्टि करता है। यह फल हिंसक स्थिति को दूर करने में भी प्रभावी है और आत्मा को शांति प्रदान करने का सार है।क़ुरआन में ईश्वर ने मछलियों के सेवन की ओर भी संकेत किया है और इसे ईश्वर की जीवन प्रदान करने वाली अनुकंपाओं में बताया है। सूरए नहल की 14वीं आयात में आया हैः और वही वह ईश्वर है जिसने समुद्रों को वश में दिया ताकि तुम इसमें से ताज़ा मांस खा सको और पहनने के लिए सौन्दर्य का सामान निकाल सको और तुम तो देख रहे हो कि नौकाएं किस प्रकार इसके सीने को चीरती हुई चली जा रही हैं और यह सब इसलिए भी है कि तुम इसकी कृपा को ढूढ सको और शायद इसी प्रकार उसके कृतज्ञ भक्त बन सको।इस आयत में ताज़ी मछली खाने की ओर संकेत किया गया है। आक्सफ़ोर्ड विश्व विद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक शोध के माध्यम से इस बात का पता लगाया है कि मछली का सेवन वृद्ध लोगों की स्मरण शक्ति को सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने इसी प्रकार इस बिन्दु पर भी बल दिया कि प्रयोग होने वाली मछली जितनी ताज़ी होगी उतना ही लोगों की स्मरण शक्ति को सुदृढ़ करने में प्रभावी होगी।इस शोध के अधिकारी डाक्टर स्मिथ का कहना है कि हमने इस बात का पता लगाया कि बिना वसा की मछलियों का प्रयोग भी वसा वाली मछलियों के प्रयोग के अनुमानुसार लाभदायक है। इसी आधार पर ऐसा लगता है कि स्मरण शक्ति पर मछली के सेवन का प्रभाव उसमें पाए जाने वाले ओमेगा-3 एसिड के कारण ही केवल नहीं होता और हमें मछलियों में पाए जाने वाले अन्य तत्वों को देखना चाहिए कि जिनके इस प्रकार के आश्चर्य जनक प्रभाव हैं।मछलियों का सेवन हृदय और मासपिंड के स्वास्थ की सहायता करता है। यह विशेषता मछलियों में पाए जाने ओमेगा-3 और ओमेगा-6 एसिड के पाए जाने के कारण है। हालिया वर्षों में शोधकर्ता इस बिन्दु को मानते हैं कि मछलियों और मछलियों के तेल में पाए जाने वाला ओमेगा-3 वसा एसिड धमनियों में हानिकारक वसा के एकत्रित करने से रोक सकता है और जिसके परिणाम में धमनियां बंद हो जाती हैं। इस प्रकार से मछलियों का सेवन हार्ट अटैक और पक्षाघात से रोकता है।

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