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    जाहिल की नमाज़

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    सवालः एक आदमी की आयु 30 या 40 साल की है

    उसके माँ बाप ने बचपन में उसे नमाज़ पढ़ना नहीं

    सिखाया अब वह लिख पढ़ भी नहीं सकता है लेकिन

    उसने कोशिश की है कि नमाज़ को सह़ी तरीक़े से

    याद करे उसके बावजूद भी कुछ शब्दों का सही

    उच्चारण नहीं कर पाता है तो क्या उसकी नमाज़ सह़ी है?

    जवाबः जितना उच्चारण करने की क्षमता रखता है

    अंजाम दे उसकी नमाज़ सह़ी मानी जायेगी।