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    जुमे के दिन नमाज़े ज़ुहर

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    सवालः नमाज़े ज़ुहर का ठीक उसी वक़्त जमाअत से क़ाएम करना जब नमाज़े जुमा थोड़े फासले पर हो रही हो जाएज़ है या नहीं?
    जवाबः इसमें कोई रुकावट नहीं है और मुकल्लफ़ (शरीअत की ज़िम्मेदारी जिस पर वाजिब हो जाए) के लिए जुमे के दिन नमाज़े ज़ुहर काफ़ी हो जाएगी

    क्योंकि इस ज़माने में नमाज़े जुमा वाजिबे तख़ईरी (ऐसे दो वाजिब जिसमे किसी एक के अंजाम देने का इख़्तियार ह़ासिल हो) है

    लेकिन जुमे के दिन नमाज़े जुमा के पास ही जमाअत के साथ दूसरी नमाज़े ज़ुहर का क़ाएम करना, मोमेनीन के बीच भेदभाव

    व इख़्तिलाफ़ पैदा करना है और बहुत सारे लोगों की नज़र में इससे इमाम जुमा का अपमान होता है और इससे नमाज़े जुमा को महत्व न देने का पता चलता है।

    इस लिए नमाज़े ज़ुहर का जमाअत के साथ क़ाएम करना उचित नहीं है बल्कि अगर ऐसा करना दंगा व फ़साद और ह़राम काम का कारण बने तो उससे बचना वाजिब है।