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    तहारत के अहकाम

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    मुतलक़ और मज़ाफ़ पानी

    (म.न. 15) पानी या मुतलक़ होता है या मुज़ाफ़। “मुज़ाफ़” वह पानी है जो किसी चीज़ से हासिल किया जाये जैसे तरबूज़ का पानी, गुलाब का अरक़ और उस पानी को भी मुज़ाफ़ कहते हैं जिसमें कोई दूसरी चीज़ मिली हो जैसे गदला पानी जो इस हद तक मटयाल़ा हो कि उसे पानी न कहा जा सके। इनके अलावा जो पानी होता है उसे “मुतलक़” पानी कहते है और मुतलक़ पानी की पाँच क़िस्में हैं।

    1- कुर पानी

    2- क़लील पानी

    3- जारी पानी

    4- बारिश कापानी

    5- कुवें का पानी

    1-कुर पानी-

    *(म.न. 16) मशहूर क़ौल की बिना पर कुर इतने पानी को कहते हैं जो एक ऐसे बरतन को भर दे जिसकी लम्बाई ,चौड़ाई और गहराई हर एक साढ़े तीन बालिश्त हो इस तरह कि अगर इनको आपस में गुणा किया जाये तो गुणनफल 42-7/8 बालिश्त होना ज़रूरी है। लेकिन ज़ाहिर यह है कि अगर 36 बालिश्त भी हो तो काफ़ी है। कुर पानी को वज़न के लिहाज़ से मुऐयन करना इशकाल से ख़ाली नही है।

    (म.न. 17) अगर कोई चीज़ ऐने नजिस हो जैसे पेशाब, ख़ून या वह चीज़ जो नजस हो गई हो जैसे नजिस कपड़े वग़ैरह ऐसे पानी में गिर जाये जिसकी मिक़दार एक कुर के बराबर हो और वह निजासत पानी की बू, रंग या ज़ायक़ा को बदल दे तो वह पानी नजिस हो जायेगा लेकिन अगर पानी में ऐसी कोई तबदीली न हो तो वह पानी नजिस नही होगा।

    (म.न. 18) अगर ऐसे पानी का रंग, बू या जायक़ा जिसकी मिक़दार एक कुर के बराबर हो निजासत के अलावा किसी दूसरी चीज़ की वजह से बदल जाये तो वह पानी नजिस नही होगा।

    (म.न. 19) अगर कोई ऐने निजासत जैसे खून ऐसे पानी में गिर जाये जिसकी मिक़दार एक कुर से ज़्यादा हो और वह पानी के रंग ,बू या ज़ायक़े को बदल दे तो ऐसी सूरत में अगर पानी के उस हिस्से की मिक़दार जिस में कोई तबदीली नही हुई है एक कुर से कम है तो वह सारा पानी नजिस हो जायेगा, लेकिन अगर उस हिस्से की मिक़दार एक कुर के बराबर या उससे ज़्यादा है तो सिर्फ़ॉ वह हिस्सा नजिस होगा जिसका रमग, बू या ज़ायक़ा बदल गया है।

    (म.न. 20) अगर फ़व्वारे का पानी (यानी वह पानी जो जोश मार कर फ़व्वारे की शक्ल में उछले) ऐसे दूसरे पानी से मिल जाये जिस की मिक़दार एक कुर के बराबर हो तो फ़व्वारे का पानी नजिस पानी को पाक कर देता है। लेकिन अगर नजिस पानी पर फ़व्वारे के पानी का एक एक क़तरा गिरे तो उसे पाक नही करता अलबत्ता अगर फ़व्वारे के सामने कोई चीज़ रख़ दी जाये जिस की वजह से उसका पानी क़तरा क़तरा होने से पहले नजिस पानी से मिल जाये तो नजिस पानी को पाक कर देता है और बेहतर यह है कि फ़व्वारे का पानी नजिस पानी में घुल मिल जाये।

    (म.न. 21) अगर किसी नजिस चीज़ को ऐसे नल के नीचे धोयें जो ऐसे (पाक) पानी से मिला हो जिसकी मिक़दार एक कुर के बराबर हो और उस चीज़ का धोवन उस पानी से मिल जाये जिसकी मिक़दार एक कुर के बराबर हो तो वह धोवन पाक होगी इस शर्त के साथ कि उसमें निजासत की बू, रंग या ज़ायक़ा न पाया जाता हो और न ही उसमें ऐले निजासत मिली हो।

    (म.न. 22) अगर कुर पानी का कुछ हिस्सा जम कर बर्फ़ बन जाये और कुछ हिस्सा पानी की शक्ल में बाक़ी बच जाये जिसकी मिक़दार एक कुर से कम हो तो जैसे ही कोई निजासत इस पानी मिल जायेगी वह पानी नजिस हो जायेगा और बर्फ़ पिघलने पर जो पानी बनेगा वह भी नजिस होगा।

    (म.न. 23) अगर पानी की मिक़दार एक कुर के बराबर हो और बाद में शक पैदा हो कि अब भी कुर के बराबर है या नही तो यह एक कुर पानी ही माना जायेगा यानी वह निजासत को पाक भी करेगा और निजासत से मिलने पर नजिस भी नही होगा। इसके बर ख़िलाफ़ जो पानी एक कुर से कम हो और उसके बारे में शक हो कि अब इस की मिक़दार एक कुर के बराबर हो गई है या नही तो उसे एक कुर से कम ही माना जायेगा। (म.न. 24) पानी का एक कुर के बराबर होना दो तरीक़ों से साबित होता है।

    1- इंसान को ख़िद इस बारे में यक़ीन व इतमिनान हो।

    2- दो आदिल मर्द यह कहे कि यह पानी कुर है।

    2- क़लील पानी

    (म.न. 25) क़लील वह पानी कहलाता है जो ज़मीन से न उबल रहा हो और उसकी मिक़दार एक कुर से कम हो।

    (म.न. 26) अगर क़लील पानी किसी नजिस चीज़ पर गिरे या कोई नजिस चीज़ इस पर गिर जाये तो पानी नजिस हो जायेगा।

    *(म.न. 27) वह क़लील पानी जो किसी चीज़ पर ऐने निजासत को दूर करने के लिए डाला जाये तो वह ऐने निजासत से जुदा होने के बाद नजिस हो जाता है। और इसी तरह वह क़लील पानी जो ऐने निजासत के अलग हो जाने के बाद नजिस चीज़ को पाक करने के लिए उस पर डाला जाये उस चीज़ से जुदा होने के बाद (एहतियाते लाज़िम की बिना पर) मुतलक़न नजिस है।

    *(म.न. 28) वह क़लील पानी जिससे पेशाब या पख़ाना ख़ारिज होने की जगह को धोया जाये अगर वह किसी चीज़ को लग जाये तो वह चीज़ इन पाँच शर्तों के साथ

    नजिस नही होगी।

    1-पानी में निजासत का रंग, बू या जायक़ा मौजूद न हो।

    2-बाहर से कोई निजासत इस पानी से न मिल गई हो।

    3-कोई और निजासत(जैसे ख़ून) पेशाब या पख़ाने के साथ ख़ारिज न हुई हो।

    4-पख़ाने के ज़र्रे पानी में मौजूद न हों।

    5-पेशाब या पख़ाना ख़ारिज होने की जगह पर मामूल से ज़्यादा निजासत न लगी हो।

    3- जारी पानी

    जारी वह पानी कहलाता है जो ज़मीन से उबल कर बहता हो।

    (म.न. 29) जारी पानी अगरचे कुर से कम ही क्योँ न हो निजासत से मिलने पर उस वक़्त तक नजिस नही होता जब तक निजासत की वजह से उसका रंग, बू या ज़ायक़ा न बदल जाये।

    (म.न.30) अगर कोई निजासत जारी पानी से आमिले तो पानी की उतनी मिक़दार ही नजिस होगी जिसका रंग, बू या ज़ायक़ा निजासत की वजह से बदल जाये। अलबत्ता इस पानी का वह हिस्सा जो चश्में(झरने) से मिला हो पाक है चाहे इसकी मिक़दार कुर से कम ही क्योँ न हो। नद्दी की दूसरी तरफ़ का पानी अगरल एक कुर के बराबर हो या उस पानी के ज़रिये जिसका ( रंग, बू या ज़ायका) न बदला हो चश्में की तरफ़ के पानी से मिला हुआ हो तो पाक है वरना नजिस है।

    *(म.न.31) अगर किसी चश्में का पानी बह न रहा हो लेकिन सूरते हाल यह हो कि जब इस में से पानी निकाल लें तो उसका पानी दुबारा उबल पड़ता हो तो वह पानी जारी पानी के हुक्म में नही है। यानी अगर कोई निजासत उससे आ मिले तो वह नजिस हो जाता है।

    *(म.न.32) नद्दी या नहर के किनारे का पानी जो रुका हुआ हो और जारी पानी से मिला हो, जारी पानी के हुक्म में नही है।

    (म.न.33) अगर एक ऐसा चश्मा हो जो मिसाल के तौर पर सर्दी में उबल पड़ता हो लेकिन गर्मी में उसका जोश ख़त्म हो जाता हो तो वह उसी वक़्त जारी पानी के हुक्म में होगा जब उबलता हो।

    (म.न.34) अगर किसी (तुर्की या इरानी तर्ज़ पर बने) हम्मा के छोटे हौज़ का पानी एक कुर से कम हो लेकिन वह ऐसे “वसील-ए- आब” से मिला हो जिसका पानी हौज़ के पानी से मिल कर एक कुर बन जाता हो तो जब तक निजासत के मिल जाने की वजह से उस का रंग, बू या ज़ायक़ा न बदल जाये तो वह नजिस नही होता।

    (म.न.35) हम्माम और इमारत के नलकों का पानी जो टोँटियों और शावरों के ज़रिये बहता है अगर उस हौज़ के पानी से मिल कर जो इन नलकों से मुत्तसिल हो एक कुर के बराबर हो जाये तो नलकों का पानी भी कुर पानी के हुक्म में शामिल होगा।

    (म.न.36) जो पानी ज़मीन पर बह रहा हो लेकिन ज़मीन से उबल न रहा हो अगर वह एक कुर से कम हो और उसमें कोई निजासत मिल जाये तो वह नजिस हो जायेगा। लेकिन अगर वह तेज़ी से बह रहा हो और निजासत उसके नीचले हिस्से पर लगे तो उसका ऊपर वाला हिस्सा नजिस नही होगा।

    4-बारिश का पानी-

    *(म.न.37) अगर कोई चीज़ नजिस हो और उसमें ऐने निजासत मौजूद न हो तो उस पर जहाँ जहाँ एक बार बारिश हो जाये वह पाक हो जाती है। लेकिन अगर बदन व लिबास पेशाब से नजिस हो जाये तो एहतियात की बिना पर एन पर दो बार बारिश होना ज़रूरी है। मगर क़ालीन व लिबास वग़ैरह का निचौड़ना ज़रूरी नही है।लेकिन हल्की सी बुन्दा बान्दी काफ़ी नही है बल्कि इतनी बारिश ज़रूरी है कि लोग कहों कि बारिश हो रही है।

    *(म.न.38) अगर बारिश का पानी ऐने निजासत पर बरसे और उसकी छाँटे दूसरी जगह पर पड़े अगर उनमें ऐने निजासत मौजूद न हो और निजासत की बू, रंग या ज़ायका भी उसमें न पाया जाता हो तो वह पानी पाक है। बस अगर बारिश का पानी ख़ून पर बरसे और उससे छाँटे बलन्द हों जिन में ख़ून के ज़र्रात शामिल हों या ख़ून की बू, रंग या ज़ायक़ा पाया जाता हो तो वह पानी नजिस है।

    (म.न.39) अगर माकान की अनेदरूनी या ऊपरी छत पर ऐने निजासत मौजूद हो तो बारिश के दैरान जो पानी निजासत को छू कर अन्दर टपके या परनाले से गिरे वह पाक है। लेकिन जब बारिश रुक जाये और यह बात मालूम हो कि जो पानी नीचे गिर रहा है वह किसी निजासत को छू कर आ रहा है तो वह पानी नजिस है।

    (म.न.40) जिस नजिस ज़मीन पर बारिश बरस जाये वह पाक हो जाती है। और अगर बारिश का पानी बहने लगे और छत के अन्दर उस मक़ाम तक पहुँच जाये जो नजिस है तो छत भी पाक हो जायेगी इस शर्त के साथ कि बारिश जारी हो।

    *(म.न.41) नजिस मिट्टी के तमाम अजज़ा तक बारिश का मुतलक़ पानी पहुँच जाये तो मिट्टी पाक हो जायेगी।

    *(म.न.42) अगर बारिश का पानी एक जगह पर जमा हो जाये तो जब तक बारिश बरसती रहेगी वह कुर के हुक्म में है चहे वह एक कुर से कम ही क्यों न हो। अगर उसमें कोई नजिस चीज़ धोई जाये और पानी निजासत के रंग, बू, या ज़ायक़े को कबूल न करे तो वह नजिस चीज़ पाक हो जायेगी।

    *(म.न.43) अगर नजिस ज़मीन पर बिछे हुए पाक क़ालीन (या दरी) पर बारिश बरसे और उसका पानी बरसने के वक़्त क़ालीन से नजिस ज़मीन पर पहुँच जाये तो क़ालीन भी नजिस नही होगा और ज़मीन भी पाक हो जायेगी।

    5-कुँवें का पानी

    (म.न.44) एक ऐसे कुँवें का पानी जो ज़मीन से उबलता हो अगर मिक़दार में एक कुर से कम हो निजासत पड़ने से उस वक़ेत तक नजिस नही होगा जब तक उस निजासत से उसका रंग, बू या मज़ा न बदल जाये लेकिन मुस्तहब यह है कि कुछ निजासतों के गिरने पर कुँवे से उतनी मिक़दार में पानी निकाला दें जो मुफ़स्सल किताबों में दर्ज है।

    (म.न.45) अगर कोई निजासत कँवें में गिर जाये और उसके पानी की बू, रंग या ज़ायक़ा को बदल दे तो जब कुँवें के पानी में आया हुआ यह बदलाव ख़त्म हो जायेगा तबी पानी पाक हो जायेगा और बेहतर यह है कि यह पानी कुँवे से उबल ने वाले पानी में घुल मिल जाये।

    (म.न.46) अगर बारिश का पानी एक गढ़े में जमा हो जाये और उसकी मिक़दार एक कुर से कम हो तो अगर बारिश रुकने के बाद उससे कोई निजासत मिल जाये तो वह नजिस हो जायेगा।

    पानी के अहकाम

    (म.न.47) मुज़ाफ़ पानी (जिसके माअना मसला न. 15 में बयान हो चुके हैं।) किसी नजिस चीज़ को पाक नही कर सकता। ऐसे पानी से वज़ू और ग़ुस्ल करना भी बातिल है।

    *(म.न.48) मुज़ाफ़ पानी अगरचे एक कुर के बराबर ही क्योँ न हो अगर उसमें निजासत का एक ज़र्रा भी गिर जाये तो नजिस हो जाता है।अलबत्ता अगर ऐसा पानी किसी नजिस चीज़ पर ज़ोर से गिरे तो उसका जितना हिस्सा नजिस चीज़ से मिलेगा वह नजिस हो जायेगा और जो हिस्सा नजिस चीज़ से नही मिलेगा वह पाक होगा। मसलन अगर अरक़े गुलाब को गिलाब दान से नजिस हाथ पर छिड़का जाये तो उसका जितना हिस्सा हाथ को लगेगा नजिस होगा और जो हिस्सा हाथ को नही लगेगा वह पाक होगा।

    (म.न.49) अगर वह मुज़ाफ़ पानी जो नजिस हो एक कुर पानी या जारी पानी में इस तरह मिल जाये कि उसे मुज़ाफ़ पानी न कहा जा सके तो वह पाक हो जायेगा।

    *(म.न.50) अगर एक पानी मुतलक़ था और बाद में उसके बारे में यह मालूम न हो कि मुज़ाफ़ हो जाने की हद तक पहुँचा है या नही तो वह मुतलक़ पानी समझा जायेगा। यानी नजिस चीज़ को पाक करेगा और उससे वज़ू व ग़ुस्ल करना भी सही होगा। लेकिन अगर पानी मुज़ाफ़ था और यह मालूम न हो कि मुतलक़ हुआ या नही तो वह मुज़ाफ़ समझा जायेगा यानी वह किसी नजिस चीज़ को पाक नही करेगा और उस से वज़ू व ग़ुस्ल करना भी बातिल होगा।

    *(म.न.51) ऐसा पानी जिसके बारे में यह मालूम न हो कि मतलक़ है मुज़ाफ़, निजासत को पाक नगी करता और उससे वज़ू व ग़ुस्ल करना भी बातिल है। अगर ऐसे पानी से कोई निजासत मिल जाये तो एहतियाते लाज़िम की बिना पर वह नजिस हो जायेगा चाहे वह पानी एक कुर के बराबर ही क्यों न हो।

    *(म.न.52) ऐसा पानी जिसमें ख़ून या पेशाब जैसी कोई ऐने निजासत गिर जाये और उसके रंग, बू या ज़ायक़े को बदल दे तो वह नजिस हो जाता है । चाहे वह कुर या जारी पानी ही क्योँ न हो। अगर उस पानी की बू, रंग या ज़ायक़ा किसी ऐसी निजासत के सबब बदल जाये जो उससे बाहर हो मसलन क़रीब पड़े हुए मुरदार की वजह से उसकी बू बदल जाये तो एहतियाते लाज़िम की बिना पर वह पानी नजिस हो जायेगा।

    *(म.न.53) वह पानी जिस में ऐने निजासत मसलन ख़ून या पेशाब गिर जाये और उसके रंग, बू या ज़ायक़े को बदले अगर कुर या जारी पानी से मिल जाये या बारिश का पानी उस पर बरस जाये या हवा की वजह से बारिश का पानी उस पर गिरे या बारिश का पानी उस दौरान जब बारिश हो रही हो परनाले से उस पर गिरे और जारी हो जाये तो इन तमाम सूरतों में अगर उस पानी के रंग बू या ज़ायक़े में आया बदलाव ख़त्म हो जाये तो वह पानी पाक हो जाता है लेकिन क़ौले अक़वा की बिना पर ज़रूरी है कि बारिश का पानी या कुर पानी या जारी पानी उसमें घुल मिल जाये।

    (म.न.54) अगर किसी नजिस चीज़ को कुर या जारी पानी में पाक किया जाये तो वह पानी जो बाहर निकलने के बाद इस से टपके पाक होगा।

    (म.न.55) जो पानी पहले पाक हो और यह इल्म न हो कि बाद में नजिस हुआ या नही तो वह पाक है। और जो पानी पहले नजिस हो और मालूम न हो कि बाद में पाक हुआ या नही तो वह नजिस है।

    (म.न.56) कुत्ते ,सूअर और ग़ैरे किताबी काफ़िर का झूटा बल्कि एहतियाते मुस्तहब की बिना पर किताबी काफ़िर का झूटा भी नजिस है और उसका खाना पीना हराम है। मगर हराम गोश्त जानवर का झूटा पाक है। और बिल्ली के अलावा इस क़िस्म के बाक़ी तमाम जानवरों का झूटा खाना पीना मकरूह है।