islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. तहारत में शक (डाउट)

    तहारत में शक (डाउट)

    Rate this post

    सवालः अगर कोई हमेशा वुज़ू में शक करता है तो वह कैसे

    मस्जिद में जाये और नमाज़ पढ़े और क़ुर्आन की

    तिलावत करे और मासूमीन (अ.स) की ज़ियारत करे?

    जवाबः वुज़ू के बाद तहारत के बाक़ी रहने के बारे

    में शक का कोई ऐतेबार नहीं है जब तक कि वुज़ू

    के टूट जाने का यक़ीन ह़ासिल न हो जाये उस

    वुज़ू से नमाज़ व क़ुर्आन पढ़ सकता है और

    ज़ियारत के लिए भी जा सकता है।