islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. दुश्मनों की साज़िशों के मुक़ाबले में ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत

    दुश्मनों की साज़िशों के मुक़ाबले में ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत

    Rate this post

    (कुछ दिन पहले सुप्रीम लीडर ने शहीद रजाई, शहीद बाहुनर और शहीद इराक़ी के शहादत दिवस पर यह स्पीच दी थी जिसे यहां पेश किया जा रहा है।)

    आज का दिन शहीद रजाई, शहीद बाहुनर और शहीद ईराक़ी की यादों का संगम और उनसे सम्बंधित है कि जो इस मुल्क की महान हस्तियाँ थीं। इन शहीदों के नाम को ज़िंदा रखना और उनकी याद मनाना, वास्तव में इन्क़ेलाब (क्रांति) को और उन शहीदों के बलिदान को ज़िंदा रखना है।

     

    इसी तरह आज के इस मौक़े पर मैं सरकार को उनके कामों के कारण, चाहे वह लोग हों कि जो मशीन के माध्यम से अपना काम करते हैं या वह लोग हों कि जो अपना ख़ून पसीना बहाते हैं, उन सबको धन्यवाद कहना चाहूंगा। खुशक़िस्मती से आज एक मेहनती ग्रुप हमारे बीच मौजूद है। सरकार की तरफ़ से यह जो मौक़ा हमें मिला है, आप सभी के लिए भी यह एक सुनहरा मौक़ा है न केवल इसलिए कि आप सब अपने अपने कामों के बारे में विस्तार से बताऐं ताकि जनता भी इस सच्चाई से वंचित न रहे, (यद्दपि इसकी भी आवश्यकता है कि हर चीज़ को बयान किया जाए।) बल्कि इस के अलावा भी सरकार का एक कर्तव्य और भी है और वह यह है कि इस डिपार्टमेंट के प्रभारी और कार्यकर्ता और ज़िम्मेदार लोग अपनी कमियों के बारे में खोज करें, उनको जानने का कोशिश करें, और जो चीज़ें इस मुल्क की तरक़्की के लिए ज़रूरी हैं उसको मज़बूत करें, और जो चीज़ें मुल्क की तरक़्की में रुकावट हैं उनको दूर करें। यानि इस मौक़े से फ़ायदा उठाऐं, ख़ास कर इस आख़री साल में जो इस सरकार का आख़री साल है। मुझे अच्छी तरह से याद है कि मैंने पहले भी इस बात को बयान किया है की समय रेत की तरह मुट्ठी से फिसल जाता है, जैसा कि आप लोगों को भी इस बात का आभास हो रहा होगा कि यह समय और दिन कितनी जल्दी बीत गया और इस सरकार का आख़री साल आ पहुँचा और कुछ ही दिनो में नयी सरकार आ जाएगी। परन्तु अभी एक साल का समय बाक़ी है, और यह न सोचें कि जो काम अब तक नहीं हो सका वह एक साल में कैसे होगा, नहीं, बल्कि आप सब लोग इस एक साल में बहुत से महत्वपूर्ण कामों को अंजाम दे सकते हैं जो इस मुल्क की तरक़्की और तरक़्क़ी में चार चाँद लगा सकते हैं। आपकी सरकार का यह आख़री साल, विश्व स्तर पर भी बहुत महत्वपूर्ण है। आप सब जानते हैं कि आज हम (ईरान) ऐसी साम्राजी ताक़तों के मुक़ाबले में डटे हुऐं जिनकी पूरी कोशिश और ताक़त हमें नीचा दिखाने में लगी हुई हैं और वह यह सोच रहे हैं कि हम उनके सामने घुटने टेक कर हार को स्वीकार कर लें। आप सब लोग भी अपनी पूरी ताक़त और कोशिश का इस्तेमाल करें ताकि उन साम्राजी ताक़तों की सोच को बदला जा सके जो हमें नीचा दिखाने की सोच रहीं है, और उनको मुँह तोड़ जवाब दिया जा सके। सरकार के इस आख़री साल में, सरकार का कर्तव्य यह है कि वह अपने सारे कामों की जानकारी को इकट्ठा करे और उसे जमा कराए, ताकि इस आख़री साल में किसी भी प्रकार की कमी और सुस्ती न रह जाए। क़िस्मत से आज हमारा मुल्क तरक़्क़ी के रास्ते पर है और यह बात सिर्फ़ हम नहीं कह रहे हैं बल्कि पूरी दुनिया इस बात को क़बूल कर रही है। यह और बात है कि बहुत से लोगों को हम पर एतेराज़ है और वह हम पर इल्ज़ाम भी लगाते हैं मगर यह इल्ज़ाम सही नहीं हैं। हमारे दुश्मन नयी नयी चालबाज़ियों में और हमारी ताक में लगे हुए हैं। हमेशा इस बात को ध्यान में रखना चाहिए जैसा कि कुछ दोस्तों ने इस बात की तरफ़ इशारा किया कि हमारे दुश्मन हमारे ख़िलाफ योजना बनाते हैं इसलिए हमें भी उनसे मुक़ाबला करने के लिए ठोस क़दम उठाना चाहिए, यह बहुत अच्छा विचार है लेकिन इससे अच्छा रास्ता यह है कि इस पहले कि दुश्मन हमारे ख़िलाफ़ कोई योजना बनाए, हमें उसको समझ लेना चाहिए कि वह कौन सी चाल चलेगा, मेरे कहने का मतलब यह है कि हमें दुश्मनों कि तरफ़ से बेख़बर और लापरवाह नहीं होना चाहिए, वह सब अपनी अपनी चाल बाज़ियों में लगे हुए हैं। इसलिए कि पहले उन लोगों ने जो योजनाऐं बनायी थीं उसमें उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा इसलिए अब वह लोग नयी नयी योजनाऐं बनाने में लगे हुए हैं, और अगर अल्लाह ने चाहा तो इसमें भी उनको हार

    ही होगी। आप लोग उनकी चाल बाज़ियों को समझें और उससे निपटने (मुक़ाबले) के लिए तय्यार रहें।

    एक और बात जो यहाँ बयान की गई और मुझसे भी पहले कहा जा चुका था वह थी सरकार के बजट की और उसकी माली हालत के बारे में स्कीमें, मैं भी इस बात को स्वीकार करता हूँ कि सबसे महत्वपूर्ण काम सरकारी बजट है, ख़ास कर वह बजट की जो पब्लिक से सम्बंधित है लेकिन इस के बारे में कोई फ़ैसला लेना किसी एक इंसान या अकेले आदमी का काम नहीं है बल्कि जितने लोग भी हुकूमत में हैं उन सब का यह कर्तव्य है कि एक बैठक बुलाऐं और सब मिल कर स्कीमें बनाऐं और फिर कोई फ़ैसला लें और यह बहुत ही ज़रुरी काम है यह सबकी ज़िम्मेदारी है जब ऐसी कोई स्कीम बनेगी या कोई फ़ैसला लिया जाएगा जिसमें सबके सब शामिल हों तो फिर कोई भेदभाव नहीं होगा। सब एक होकर मैदान में उतर पड़ें और एक दूसरे का साथ दें। हमारा मुल्क ख़ुशहाल और ताक़तवर है। मैं देख रहा हूँ कि बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो हुकूमत में नहीं हैं मगर फिर भी अपने सोच-विचार से हमारी मदद कर रहे हैं यह एक बहुत ही नेक काम है, इसे और बढ़ावा देना चोहिए और इस तरह के विचारों से फ़ायदा उठाना चाहिए। बहुत से लोग हैं जो इस मुल्क से सहानुभूति रखते हुए इस मुल्क और देशवासियों के लिए सरकार के साथ क़दम से क़दम मिला कर इस मुल्क के हित में काम कर रहें हैं उनके हौसलों और जज़्बों से फ़ायदा उठाना चाहिए, यह सब मुल्क की तरक़्की में सहायक है। कुछ सालों में जो तरक़्क़ी इस मुल्क में हुई है उसको भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। मगर आज भी कुछ मज़बूत प्वाइंट हैं तो कुछ कमज़ोर प्वाइंट। मगर स्ट्राँग प्वाइंट का पलड़ा भारी है लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि हम वीक प्वाइंट को दूर न करें। इधर कुछ सालों में सरकार ने बहुत से काम अंजाम दिये हैं ख़ास कर पिछड़े इलाक़ों में, यह काम होना चाहिए था और यह ज़रूरी भी था और यह एक बेहतरीन सरकार की निशानी है। विश्व स्तर पर भी हमारे मुल्क की तरक़्क़ी को लेकर यही हाल है, लेकिन आज की और कुछ साल पहले की सियासत में बड़ा अंतर है और हम ने हर जगह अपनी छाप छोड़ी हैं।
    एक स्ट्राँग प्वाइंट जो मुझे यहाँ बयान करना था वह है इंक़ेलाब के महत्व को समझना। इंक़ेलाब से लेकर आज तक (नवी या दसवी सरकार है) इंक़ेलाब का महत्व और वह बातें कि जिसके बारे में इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने वसियत की थी और जो कुछ हमने इंक़ेलाब से सीखा, आज पूरे दुनिया पर उजागर हो गया है। साम्राजी ताक़तों के कमेंट्स और उनके इल्ज़ाम लगाने का ज़माना अब बीत चुका है, ख़ुशनसीबी से आज ऐसा नहीं है बल्कि उसका उलटा हो चुका है, आज ईरान की पब्लिक, मुल्क के अलग अलग विभागों के प्रभारी और सारे मुल्क के रहने वाले ईरान के हित में काम कर रहे हैं। यह बात जान ले चाहिए कि ईरान की पब्लिक इंक़ेलाब के महत्व को समझती है और आम पब्लिक का सरकार से लगाओ, इस बात को ठोस सबूत है।
    सरकार का आम पब्लिक से संपर्क और उनसे लगाओ यह एक नेक काम है। मगर यह बात ध्यान में रहे कि जिस काम का पब्लिक से वादा (वचन) किया जाए उसको अंजाम भी दिया जाए, ऐसा न हो कि वचन दे कर उसे भुला दिया जाए। मगर मैं जानता हूँ और इस बात में कोई शंका नहीं कि जो वादा भी आप लोग पब्लिक से करते हैं उसको पूरा भी करते हैं। लेकिन पब्लिक से वादा करते समय इस बात को ध्यान में रखना ज़रूरी है की जो काम आप कर सकते हैं उनका ही वादा करें और जिन कामों को आप अंजाम नहीं दे सकते हैं उनके बारे में पूरे यक़ीन के साथ वादा न करें मिसाल के तौर पर अगर आपने पब्लिक से 100 कामों का वादा किया और आप सिर्फ़ 90 काम ही कर सकें तो इस तरह से पब्लिक के दिमाग़ में धीरे धीरे आप पर से विश्वास कम होने लगेगा इसलिए जिन कामों के बारे में पूरा विश्वास हो कि आप कर सकते हैं उनका वादा करें और जिन कामों में शंका हो कि पूरा नहीं हो पाएंगे उन कामों का वादा न करें। यह एक बहुत ज़रूरी बात थी जो मैंने आपके सामने बयान की।
    हर देखने वाला यह समझ सकता है कि गुज़रे हुए इन 6 सालों में और ख़ास कर इस 2 साल में हमारे दुश्मनों की साज़िशें बहुत बढ़ गई हैं, मेरी निगाह से उसके कुछ कारण हैं कि आगर हम उनको समझ गए तो फिर दुश्मनों की चाल बाज़ियों से निपटना हमारे लिए आसान हो जाएगा।
    पहला कारण, आज हम जो दुश्मनों की आँखों में खटक रहे हैं उसका पहला कारण यही आप की तरक़्की है, दुश्मन यह चाहता है कि हमारी तरक़्कियों को कम करदे और उसमें रुकावट पैदा करे। हमारी यह इस्लामी हुकूमत, लोगों के साथ हमदर्दी, डेमोक्रेसी, यह सब पश्चिमी साम्राजी ताक़तों के लिए एक बड़ा ख़तरा है इसी लिए आप जितनी तरक़्की करेंगे दुश्मन की तरफ़ से खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा, और इसीलिए वह हमारी तरक़्की में बाधा डालते हैं और रुकावट बनते हैं।
    दुसरा कारण, आज जो पूरी दुनिया में इन्क़ेलाबी सोच पैदा हो गई है, और जितना जितना आप इस सोच को बढ़ावा देंगें दुश्मन भी उतना ही चौकन्ना हो जाएगा, क्योंकि यह एक नॉरमल बात है कि जब इन्क़ेलाब का रंग फीका होगा दुश्मन भी कोई चाल नहीं चलेगा।
    अलबत्ता बहुत से समाचार पत्र और साइट्स में यह बातें लिखी हुई मिलती हैं कि क्यों हम सबसे दुश्मनी मोल ले रहे हैं और हमारे इतने ज़्यादा दुश्मन क्यों हैं तो मैं यही कहूँगा की यह सब बकवास है और इसका कोई मूल्य नहीं हैं। जो कुछ भी ईरान के बारे में लिखा जाता है वह सही नहीं है क्यों कि जब इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ज़िंदा थे, हमारे दुश्मन भी बहुत ज़्यादा थे मगर जब इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह हमारे बीच नहीं रहे और हम कमज़ोर हो गये तो हमारे दुश्मन भी खुल कर सामने आ गए और उन के चेहरे ख़ुशी से चमकने लगे, और उनका सामने आने का लक्ष्य यह है कि वह हमें तरक़्क़ी करने और आगे बढ़ने से रोक दें और हमारे रास्ते में रुकावट बन कर खड़े हो जाऐं लेकिन हमारा इरादा (संकल्प) जितना पक्का होता गया हमारे दुश्मन उतने ही ज़्यादा होते गये और और हम जितनी तरक़्की करते गये दुश्मनियाँ भी उतनी ही बढ़ती गयी लेकिन इस 33 साल में हमारे दुश्मन हमें रोक ही नहीं सके और इसके बाद भी अगर अल्लाह ने चाहा तो वह हमें रोक नहीं पाऐंगे। और खुशनसीबी से हमारा मुल्क तरक़्की के रास्ते पर है। यह और बात है कि कठिनाईयाँ, मुश्किलें, और कमियाँ हैं लेकिन कुल मिला कर आज हमारा मुल्क तरक़्की कर रहा है। मेरे हिसाब से महत्वपूर्ण मुश्किल गरीबी रेखा वालों की है कि जिनकी माली हालत (आर्थिक स्तिथि) बहुत अच्छी नहीं है और हमें उनकी कठिनाईयों को हल करना चाहिए, सिर्फ़ कठिनाईयों को गिन गिन कर लिख लेना उनका हल नहीं हो सकता है और उनको हर जगह बयान भी नहीं किया जा सकता है सिर्फ़ उनका हल सोचा जाए और उनको दूर करने का कोशिश की जाए। हमारे मुल्क में चीज़ों की कमी नहीं है, ख़ुशक़िस्मती से हर वह चीज़ इस मुल्क में पायी जाती है जिसकी आवश्कता पब्लिक को है, मगर महंगाई है और उसको कम करने का हमें कोशिश करना है। और यह काम उन लोगों से सम्बंधित है जो कृषि विभाग, मील, और कारखानों से जुड़े हुए हैं, वह लोग कि जो ग़रीबों की आर्थिक स्तिथि को समझते और जानते हैं चाहे वह हुकूमत में हों या न हों उनका कर्तव्य है की वह लोग उन विभागों से संपर्क करें जो उनसे संम्बंधित है और ग़रीबों की माली हालत को सुधारने में उनकी मदद करें, कुछ लोगों ने मझे बताया कि इसका महत्वपूर्ण कारण हर चीज़ की बढ़ती हुई क़ीमतें हैं और यह बात सिर्फ़ वह लोग नहीं कह रहे हैं जो सरकार में नहीं हैं बल्कि वह लोग भी जो हुकूमत में है जब मैं उनसे भी पूछता हूँ तो यही जवाब सुनने को मिलता है इसलिए हमें चाहिए कि कोई ऐसा रास्ता निकालें जिससे बढ़ती हुई क़ीमतों पर कंट्रोल किया जा सके इसलिए की जब मारकेट में चीज़ें कम होगी तो मंहगाई अपने आप बढ़ती जाएगी अतः ज़रूरी है कि पहले हम यह काम करें कि मारकिट में कोई चीज़ कम न होने पाए कि जिसके कारण मंहगाई बढ़े, यह एक कठिन काम तो है पर इसकी कोशिश तो की जा सकती है। मंहगाई के और भी बहुत से कारण हैं और इसको कम करने के बारे में सोचना आप सबका कर्तव्य है। इसलिए हमने एक डिपार्टमेंट बनाया था प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था।
    मगर इसकी कुछ शर्तें हैं जिसमें से एक आम पब्लिक पर भरोसा करना है। और यह सब आप लोगों के बुनियादी कामों का एक हिस्सा है। कभी कभी मैंने भी कुछ प्रभारी लोगों से सुना है कि इससे सम्बंधित लोग कोई सपोर्ट न होने के कारण सामने नहीं आते, इसलिए मेरी आप सबसे विनती है कि इसके बारे में सोच विचार करें ताकि इस डिपार्टमेंट को मज़बूती मिले और यह काम बैंक के माध्यम से किया जा सकता है। और जो भी रास्ता आप लोगों को सही लगे उसके माध्यम से इस काम को अंजाम देने का कोशिश करें। प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था का अर्थ यह है कि हमारे पास एक अर्थव्यवस्था हो कि जो मुल्क की तरक़्की मे हमारा साथ निभाए और जो मुल्क के हित में हनिकारक है उसे भी रोका जा सके, यानी मुल्क की आर्थिक स्तिथि ऐसी हो कि दुश्मनों की चाल बाज़ियों के सामने उसमें किसी भी प्रकार का ख़लल न पड़े। मगर यह तब होगा जब हम पब्लिक के सोच विचार और सरकार से फ़ायदा उठाऐं। हमें चाहिए की हम पब्लिक के लिए रास्ते हमवार करें।
    प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था का दुसरा स्तम्भ है अपने मुल्क की पैदावार का सहयोग करना, खेती बाड़ी को बढ़ावा देना, और वह संख्या कि जो आप लोगों ने बयान की वह बहुत अच्छी संख्या है, लेकिन दूसरी तरफ़ से मुझे यह ख़बर मिली है कि कुछ कारख़ाने और मील्स बंद पड़े हैं, कुछ कठिनायों से जूझ रहे हैं, मेरे पास भिन्न भिन्न प्रकार की खबरे हैं, एक तो आप लोगों की ख़बरें हैं, मेरे पास एक और भी दूसरी ख़बर भी है, मगर मैं दुसरी ख़बरों को महत्व नहीं देता हूँ, मेरे पास आप लोगों की जो ख़बर है वही मेरे लिए काफ़ी है। इस समय आप लोग मुल्क के लिए जो काम कर रहे हैं वह बहुत ही अच्छी दिशा में जा रहा है और लोगों की भी अधिक से अधिक मदद हो रही है। हर छोटे बड़े डिपार्टमेंट को ऐक्टिव करें। ख़ुशकिस्मती से हमारे बड़े बड़े डिपार्टमेंट ऐक्टिव हैं, और उनसे फ़ायदा भी अच्छा हो रहा है, उनके काम भी अच्छे हैं, उनकी पैदावार भी अच्छी है, ये बात तो हुई बड़े बड़े विभागों के बारे में, रही बात छोटे विभागों की तो उनको भी ऐक्टिव होना चाहिए क्योंकि यह बहुत ज़रूरी है और इसका प्रभाव भी आम पब्लिक पर अच्छा पड़ता है।
    इन सब के आलावा करेंसी का मौज़ू भी बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, इस विषय पर आप लोगों को गम्भीरता से सोच विचार करना है, इस विषय पर अच्छे से अच्छे काम करने की आवश्यकता है, इस के बारे में भी विभिन्न प्रकार की ख़बरें सुनने को मिली हैं, एक बार किसी ने कुछ कहा तो दो या तीन दिन के बाद कुछ कहा, ऐसा नहीं होना चाहिए, बल्कि एक पक्का इरादा और संकल्प होना चाहिए और फ़िर उसी पर बाक़ी रहना चाहिए, हर हाल़ में इस कैरेंसी सोर्सेज़ (मुद्रा संसाधनों) की सही देख भाल होनी चाहिए।
    एक और विषय है जिसको मुझे यहाँ बयान करना है वह प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था में सही ख़र्च करना है, उसको ख़र्च करने के लिए भी सही जगह और ज़िम्मेदारी की अवश्यकता है, ऐसा न हो कि फ़ुज़ूल ख़र्ची (दुरूपयोग) मुल्क में प्रचलित हो जाए।