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    नमाज़ी का लिबासः

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    वह हिस्सा जिसका नमाज़ में छिपाना वाजिब है।
    मसअला 397 पुरुष को नमाज़ की हालत में अपनी दोनों शर्मगाह (गुप्तांग) का छिपाना वाजिब है, चाहे उसे कोई न देख रहा हो। बेहतर यह है कि नाभि और घुटनों के बीच के हिस्से को छिपाए।
    मसअला 398 नमाज़ की हालत में स्त्री पर वाजिब है कि अपने पूरे शरीर को और बालों को ऐसे लिबास से ढके जो उसके पूर्ण शरीर को ढाँप ले। हाँ चेहरे को न छिपाना इतना कि जितना वुज़ू में धोना वाजिब है, इसी प्रकार हाथों को कलाईयों तक और दोनो पाँव को दोनों पिन्डलियों के जोड़ तक वाजिब नहीं है।
    मसअला 399 ठुड्डी चेहरे का भाग है अतः नमाज़ की हालत में स्त्री पर उसको छिपाना वाजिब नहीं है, लेकिन ठुड्डी के निचले भाग का छिपाना वाजिब है।
    मसअला 400 महिला पर वाजिब है कि अजनबी देखने वालों की उपस्थिति में दोनों पाँव को पिन्डलियों तक छिपाए।
    मसअला 401 स्त्री नमाज़ पढ़ रही हो और यह ध्यान हो कि नमाज़ में उसके बाल खुले हुए हैं तो उन बालों को तुरन्त छिपाए और अगर जानबूझ कर बालों को प्रकट नहीं किया है तो उसकी नमाज़ सही है।
    मसअला 402 अगर नमाज़ी को नमाज़ की समाप्ति पर पता चले कि जिस भाग को छिपाना वाजिब था लिबास उसको छिपा नहीं रहा था तो उसकी नमाज़ सही है।

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