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    नमाज़ को हल्का समझना

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    सवालः जानबूझ कर नमाज़ न पढ़ने या उसको

    हल्का समझने वाले का क्या ह़ुक्म है।?
    जवाबः हर दिन पाँच वक़्त में पढ़ी जाने वाली नमाज़

    इस्लाम के महत्वपूर्ण वाजेबात में से है और दीन का

    सुतून (खम्बा) है। उसको छोड़ना या हलका समझना

    जायज़ नहीं है और अज़ाब का कारण है।