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    नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार – 15

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    हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने अपनी ख़िलाफ़त के काल में हर प्रकार की निर्धनता को दूर करने के लिए अथक कोशिश की।
    जिस समय हज़रत अली अलैहिस्सलाम ख़लीफ़ा बने तो हज़रत उस्मान के शासन काल में उमय्या के वंश से विशेष वर्ग के पास धन-संपत्ति का संचय अपने चरम पर था जिसके कारण धनवानों और निर्धनों के बीच खायी बहुत गहरी हो चुकी थी। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने वर्गों के बीच खायी को कम करने के लिए बहुत कोशिश की ताकि निर्धनता के कारणों को ख़त्म कर ऐसे समाज की स्थापना करें जिसमें निर्धन और धनी दोनों बराबर हों। इस कार्यक्रम में हम निर्धनता एवं निर्धनता उन्मूलन को हज़रत अली की नज़र से पेश करेंगे।

    हज़रत अली अलैहिस्सलाम का कहना था कि हर व्यक्ति को मानवीय जीवन से संपन्नता का अधिकार हासिल है। यदि कोई वर्ग धन-संपत्ति में डूबा हुआ है और एक दूसरा वर्ग निर्धनता से लड़ रहा है तो इसका कारण यह है कि धनवान, निर्धनों की सहायता करने के अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं कर रहे हैं या इसका एक कारण यह भी है कि निर्धन वर्ग एक सम्मानजनक जीवन हासिल करने के लिए अपने मानवीय कर्तव्य का पालन नहीं कर रहा है।। अलबत्ता एक तीसरा कारण भी है वह यह कि शासक योग्य नहीं थे कि सामाजिक व आर्थिक न्याय की स्थापना के लिए सही उपाय कर सकें। हज़रत अली अलैहिस्सलाम कहते थे कि जो लोग बहुत कठिनाई में हैं उनके जीवन की ज़रूरतों को पूरा करना इस्लामी शासन का कर्तव्य है। जैसा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने नहजुलबलाग़ा की भाषण संख्या 53 में मालिक अश्तर को मिस्र का राज्यपाल बनाते समय उन्हें ऐतिहासिक आदेश में कहा है, “ हे मालिक जान लो कि राष्ट्र विभिन्न वर्गों व गुटों से बना है कि इनमें से हर एक में सुधार दूसरे की सहायता से संभव नहीं है। कोई भी वर्ग दूसरे वर्ग से आवश्यकतामुक्त नहीं है। इस बीच समाज का निचला वर्ग है जो निर्धन होता है। ईश्वर ने हर एक के लिए विशेष भाग निर्धारित किया है और उसकी अनिवार्य मात्रा का या तो क़ुरआन में या पैग़म्बरे इस्लाम के माध्यम से निर्धारित किया है कि यह ईश्वर की ओर से वचन है जो हमारे पास सुरक्षित है।”
    निर्धनता उन चीज़ों में है जिसकी अनदेखी सामाजिक संकट के जन्म लेने का कारण बनती है और समाज पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने कहा है, “ निर्धनता सबसे बड़ी मौत है।” हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने बहुत से अवसरों पर निर्धनता के नकारात्मक प्रभाव और निर्धनता को दूर करने के लिए अनेक अनुशंसाएं की हैं। उन्होंने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को वसीयत में कहा है, “ मेरे बेटे! उस व्यक्ति को बुरा-भला मत कहो जिसकी पूरी कोशिश दो वक़्त का पेट भरना है क्योंकि जिसके पास दो वक़्त की रोटी न हो उसके बहकने की संभावना बहुत अधिक है।” हज़रत अली अलैहिस्सलाम की नज़र में जीवन की ज़रूरत की चीज़ों की प्राप्ति की अपरिहार्यता निर्धन व्यक्ति को नैतिकता से दूर कर सकती है। निर्धन व्यक्ति का मन दुखी है और इसलिए वह अनुचित कार्य कर सकता है। परेशानी व दुख भी निर्धनता के लक्ष्ण में है। जैसा कि इस संदर्भ में हज़रत अली अलैहिस्सलाम का एक कथन है, “ निर्धनता बहुत सी समस्याएं लाती है।”

    समाज से निर्धनता को मिटाने और उसमें संतुलन लाने के लिए निर्धनता लाने वाले कारणों की पहचान ज़रूरी है। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने निर्धनता का एक बहुत बड़ा कारण धनवानों के हाथ में संपत्ति का संचय बताया है। जैसा कि इस संदर्भ में हज़रत अली अलैहिस्सलाम नहजुल बलाग़ा में कथन संख्या में 328 में कहते हैं, “ ईश्वर ने वंचितों का खाना और उनकी ज़रूरत की चीज़ों को धनवानों की संपत्ति में निर्धारित किया है तो कोई भी निर्धन भूखा नहीं रहता मगर यह कि धनवान ने उसका अधिकार छीन लिया है और ईश्वर धनवानों से इसका हिसाब लेगा।” अब अगर सत्ताधी वर्ग और अधिकारी धन जमा करने में लग जाएं तो उन्हें देख कर उनके अधीन लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होंगे। जिसके नतीजे में एक समाज की संपत्ति सत्ताधारियों और व्यवस्था के अधिकारियों तथा उनके निकटवर्तियों के हाथ में जमा हो जाएगी जिससे वर्गों में विषमता बढ़ेगी जैसा कि हज़रत उस्मान के शासनकाल में हुआ था। जैसा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने नहजुल बलाग़ा में पत्र संख्या में 53 में कहा है, “ जान लो कि ज़मीन की वीरानी लोगों की निर्धनता के कारण है और लोगों में निर्धनता उन सत्ताधारियों की ओर से संपत्ति के लूटे जाने के कारण होती है जिन्हें अपनी हुकूमत के बाक़ी रहने का विश्वास नहीं होता।”

    हज़रत अली अलैहिस्सलाम निर्धनता से निपटने के लिए समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग जैसा खाना खाते और उनके जैसा निम्नस्तरीय कपड़ा पहनते थे। हज़रत अली अलैहिस्सलाम की सादा जीवन शैली के बहुत से पाठदायक उदाहरण मिलते हैं जिनमें से एक आपकी सेवा में पेश कर रहे हैं। वर्णनकर्ता अहनफ़ बिन क़ैस कहता है, “ एक दिन मोआविया के दरबार में गया। दोपहर के खाने के समय विभिन्न प्रकार का स्वादिष्ट भोजन मेरे सामने परोसा गया। मुझे बहुत हैरत हुयी। उसी समय एक ऐसा व्यंजन लाए जिसे मैं पहचान न सका। मैंने पूछा कि यह कैसा व्यंजन है तो मोआविया ने कहा, यह हंस की आंतों से बना है। इसमें चौपाये का भेजा मिला है जिसे पिस्ते के तेल से भूना गया है और इसमें शकर डाली गयी है। अहनफ़ बिन क़ैस कहता है, मैं बेअख़्तियार रो पड़ा। मोआविया ने बहुत हैरत से रोने का कारण पूछा तो मैंने कहाः अली इब्ने अबी तालिब की याद आ गयी। एक दिन मैं उनके घर में था कि खाने का वक़्त हो गया तो उन्होंने मुझे खाने के लिए रोका। थोड़ी देर में खाने दस्तरख़ान लाया गया जो मोहरबंद था। मैंने पूछा कि इस दस्तरख़ान में क्या है? कहाः जौ की रोटी। मैंने कहा क्या आपको डर है कि कोई निकाल लेगा या आप नहीं चाहते कि कोई खाए जो इसे मुहरबंद लाया गया है। उन्होंने कहा कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बल्कि मुझे इस बात की आशंका थी कि कहीं मेरा कोई बेटा इन रोटियों पर देसी घी या ज़ैतून का तेल न लगा दे। मैंने कहाः हे मोमिनों के मालिक क्या यह काम वर्जित है? अली अलैहिस्सलाम ने कहाः नहीं वर्जित नहीं है लेकिन सत्य के पथप्रदर्शक के लिए ज़रूरी है कि वह समाज के सबसे निर्धन वर्ग के जैसा भोजन करे ताकि वे निर्धनता के कारण उद्दंडता न करें। जब उन्हें निर्धनता सताए तो वे ख़ुद से कहेः किस बात की चिंता जब अमीरुल मोमेनीन का खाना भी हमारे जैसा है। यह सुनकर मोआविया ने कहाः हे अहनफ़ तुमने ऐसे व्यक्ति को याद किया जिसकी ख़ूबियों का इंकार नहीं किया जा सकता।”

    एकाधिपत्य उन तत्वों में है जिससे समाज को नुक़सान पहुंचता है और यह निर्धनता को जन्म देता है। स्वाभाविक बात है कि कुछ ख़ास लोगों के हाथ में धन के एकाधिकार से समाज के कम आय वाले वर्ग में निर्धनता व दरिद्रता बढ़ती है। शासकों का आम लोगों पर विशेष वर्ग को वरीयता देने का अत्याचार, समाज की सुविधाओं के उनके लिए केन्द्रित होने और दूसरों के निर्धन होने का कारण बनता है। यह विशेष वर्ग प्रायः अत्याचारी शासक के निकटवर्ती लोगों पर आधारित होता है जो संपत्ति का संचय कर दूसरे वर्ग विशेष रूप से वंचित वर्ग के लोगों को अर्थव्यवस्था के चक्र में प्रवेश तथा पूंजि निवेश करने से रोकते हैं। हज़रत अली अलैहिस्सलाम उन शासकों के बारे में जो अपने मित्रों व निकटवर्तियों के लिए इस प्रकार का अनुचित अवसर मुहैया करते हैं, कहते है, “ ज़मीन की वीरानी लोगों की निर्धनता के कारण है और लोगों की निर्धनता शासको में माल इकट्ठा करने की लालच के कारण होती है।” उच्च स्तरीय सुविधाओं की प्राप्ति के लिए एकाधिकारी अवसर पैदा करना, शासक के निकटवर्तियों के लिए संपत्ति इकट्ठा करने के लिए बेहतरीन भूमि समतल करता है। हज़रत अली अलैहिस्सलाम पत्र संख्या 62 में कहते हैं, “ इस उम्मत के मूर्ख व अपराधी लोगों की ओर से चिंतित हूं कि कहीं उनके हाथ में सत्ता न पहुंच जाए और वे ईश्वर के धन को अपने बीच में बांट ले और उसके बंदों को वंचित तथा अपना दास न बना लें।”

    मनुष्य के अस्तित्व में एक बुरी आदत जो जड़ पकड़ती है वह काम में सुस्ती है। यह बुरायी मनुष्य के व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के सभी चरण में अपना प्रभाव डालती है और समाज को निर्धनता के संकट में ढकेल देती है। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने निठल्ले लोगों की भर्त्सना में कहा है, “सुस्ती और अक्षमता का साथ निर्धनता को जन्म देता है”। इस वाक्य में हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने निर्धनता को सुस्ती और निकम्मेपन का परिणाम बताया है। इसलिए हज़रत अली अलैहिस्सलाम इस्लामी संस्कृति में काम के महत्व का उल्लेख कर लोगों को काम और अधिक प्रयास के लिए प्रेरित करते थे और लोगों से कहते थे, “ ईश्वर के मार्ग में कोई भी कोशिश अपने बच्चों व बीवियों की ज़रूरतों को पूरा करने से बेहतर नहीं है।” इसी प्रकार एक अन्य स्थान पर कहा है, “ मनुष्य का ख़ज़ाना उसका काम है। ” यह बिन्दु भी रोचक है कि ख़ुद हज़रत अली अलैहिस्सलाम काम व कोशिश करने की दृष्टि से बेहतरीन उदाहरण के रूप में पहचाने जाते थे। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने ख़िलाफ़त मिलने से पहले और उसके बाद भी अति व्यस्त होने के बावजूद जब भी अवसर मिलता तो व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के प्रयास से पीछे नहीं हटते। प्रसिद्ध सुन्नी धर्मगुरु इब्ने अबिल हदीद मोतज़ली हज़रत अली अलैहिस्सलाम के बारे में लिखते हैं, “ वह अपने हाथ से काम करते थे। सदैव खेती करते और सिंचाई करते थे, खजूर की गुठली बोते और ज़मीन को उपजाउ बनाकर तथा बहुत सी क़नातों अर्थात भूमिगत पानी की नहरों की खुदाई कर उसे लोगों के लिए वक़्फ़ कर देते थे।”

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