islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. नाई और रंगरेज़-2

    नाई और रंगरेज़-2

    नाई और रंगरेज़-2
    Rate this post

    मिस्र के इस्कंदरिया नगर में अबू क़ीर और अबू सीर नामक दो व्यक्ति रहा करते थे जो एक दूसरे के मित्र थे। अबू क़ीर रंगरेज़ और अबू सीर नाई था। अबू क़ीर झूठा और धोखेबाज़ था जबकि अबू सीर सच्चा व्यक्ति था। मंडी में आने वाली मंदी के कारण दोनों ने निर्णय किया कि काम के लिए किसी दूसरे नगर जाएं। यात्रा के दौरान अबू सीर काम करता रहा जबकि अबू क़ीर केवल खाता और सोता रहा। बहुत अधिक काम के कारण अबू सीर बीमार पड़ गया। अबू क़ीर ने बेवफ़ाई का प्रदर्शन करते हुए अपने मित्र को उसी दशा में छोड़ दिया और वहां से चला गया। चूंकि उस नगर के रंगरेज़ काले और सफ़ेद के रंग के अतिरिक्त किसी अन्य रंग से परिचित नहीं थे अतः अबू क़ीर, उस नगर के राजा की सहायता से एक दुकान खोलने में सफल हो गया और उसकी दुकान अच्छी चलने लगी। इस प्रकार अबू क़ीर धनवान हो गया और उसकी दुकान राजा की रंगशाला के नाम से प्रसिद्ध हो गई। अबू सीर भी स्वस्थ होने के बाद काम के लिए बाहर निकला और चूंकि उस नगर में कोई सार्वजनिक हम्माम या स्नानगृह नहीं था अतः उसने भी राजा की सहायता से एक हम्माम बनाया और लोगों से कहा कि हम्माम के प्रयोग के लिए जो जितने पैसे दे सकता है, दे दे। इसके कुछ ही देर बाद लोगों का तांता बंध गया और वे हम्माम में आकर नहाने लगे और जिसकी जितनी क्षमता थी वह उतने पैसे अबू सीर को देने लगा। अभी रात भी नहीं हुई थी कि अबू सीर का गल्ला पैसों से भर गया। अगले दिन उसे सूचित किया गया कि रानी, हम्माम आना चाहती है। अबू सीर ने तुरंत घोषणा की कि आज हम्माम आम लोगों के लिए बंद रहेगा। इसके बाद उसने एक दासी को गल्ले के पास बिठाया और चार दासियों को हम्माम में छोड़ कर स्वयं घर चला गया। रानी अपनी दासियों और सखियों के साथ हम्माम पहुंची और जाते समय एक हज़ार सिक्के दे गई। उस दिन के बाद से हम्माम सुबह से लेकर दोपहर तक पुरुषों के लिए और दोपहर के बाद से रात तक महिलाओं के लिए खुला रहने लगा। एक दिन, क़िब्तान जिसने पानी के जहाज़ में अबू सीर के साथ बड़े स्नेह का व्यवहार किया था, हम्माम आया और अबू सीर ने उससे पैसे नहीं लिए। अब अबू क़ीर के बारे में सुनिए। नगर के हम्माम की प्रसिद्धि उसके कानों तक भी पहुंची। एक दिन वह घोड़े पर सवार हो कर आठ दासों के साथ हम्माम पहुंचा। अबू सीर उसे देखते ही बहुत प्रसन्न हुआ। अबू क़ीर ने कहा कि क्या बंधुत्व इसी को कहते हैं? कितने समय से मुझे तुम्हारे बारे में कोई सूचना ही नहीं है। मैंने इस नगर में रंगरेज़ी की एक दुकान खोल ली है जो ख़ूब चल रही है, मैं भी काफ़ी प्रसिद्ध हो चुका हूं किंतु तुम आज तक मेरे पास नहीं आए। मैं तो तुम्हें खोज खोज कर थक गया। मैं प्रतिदिन अपने दासों को उस सराए भेजता था कि शायद तुम्हारे बारे में कोई सूचना मिल जाए किंतु तुम्हारा कुछ अता पता ही नहीं था। अबू सीर ने कहा कि क्या तुम्हें याद नहीं है कि एक दिन मैं तुम्हारी दुकान पर आया था तो तुमने मुझ पर चोरी का आरोप लगाया, मेरी पिटाई की और मुझे दुकान से बाहर निकाल दिया था। अबू क़ीर ने अनजान बनते हुए कहा कि यह मैं क्या सुन रहा हूं? क्या वो तुम्हीं थे जिसकी मैंने उस दिन पिटाई कर दी थी। मैं सौगंध खा कर कहता हूं कि मैंने तुम्हें नहीं पहचाना था। वास्तव में एक चोर था जिसका चेहरा तुमसे बहुत मिलता है, वह प्रतिदिन आकर मेरी दुकान से चोरी किया करता था। यह कह कर वह पछताने का अभिनय करने लगा। उसने अपने एक हाथ से दूसरे हाथ पर मार कर कहा कि धिक्कार हो मुझ पर कि मैंने अपने मित्र पर हाथ उठाया, लेकिन ग़लती तुम्हारी भी है। तुमने अपने आपको पहचनवाया क्यों नहीं? बहरहाल अब मुझे क्षमा कर दो। अबू सीर ने स्नेह के साथ कहा कि मैंने तुम्हें क्षमा किया, अब उठो और हम्माम में चले जाओ, मैं स्वयं तुम्हें आकर नहलाऊंगा। अबू क़ीर ने कहा कि उससे पहले मैं यह जानना चाहता हूं कि तुमने किस प्रकार यह हम्माम खोला और इतनी तेज़ी से कैसे प्रगति कर ली। अबू सीर ने अपने मित्र को पूरी बात बता दी कि किस प्रकार राजा की सहायता से उसने हम्माम खोला। अबू क़ीर हम्माम में गया जहां अबू सीर ने उसे नहलाया तथा शर्बत और मिठाई से उसका सत्कार किया। जब जाते समय अबू क़ीर ने पैसे देने चाहे तो अबू सीर ने कहा कि तुम मेरे मित्र हो, मैं तुमसे कैसे पैसे ले सकता हूं। अबू क़ीर ने कहा कि तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद। अब मैं तुम्हें एक ऐसी बात बताना चाहता हूं जो तुम्हारे बहुत काम आएगी। तुमने जो हम्माम खोला है वह बहुत अच्छा व सुंदर है किंतु इसमें एक चीज़ कम है। अबू सीर ने आश्चर्य से पूछा कि वह क्या? अबू क़ीर ने कहा कि तुम्हें याद होगा कि हमारे नगर के हम्मामों में संखिया और कच्चे चूने से एक दवा बना करती थी। जब हम उस दवा को अपने शरीर पर लगाते थे तो अधिक स्वच्छ और सफ़ेद हो जाया करते थे। तुम्हारे हम्माम में वह दवा नहीं है। तुम उसे बनाओ और जब राजा हम्माम में आए तो उससे कहो कि तुम्हारे पास इस प्रकार की दवा है और यदि वह अनुमति दे तो उसे उसके शरीर पर लगा दो। राजा बहुत प्रसन्न होगा और तुम्हें काफ़ी पारितोषिक देगा। अबू सीर ने कहा कि बहुत धन्यवाद, तुमने बड़ा अच्छा सुझाव दिया है। मैं अवश्य ही यह काम करूंगा। अबू क़ीर उससे अनुमति लेकर चला गया। वह अत्यंत दुष्ट व्यक्ति था और उसने अबू सीर को बदनाम करने के लिए यह चाल चली थी। वह हम्माम से निकल कर सीधे राजा के पास गया और उससे भेंट करके कहा कि हे राजा! मैं आपका शुभचिंतक हूं और आपको एक रहस्य की बात बताने आया हूं। राजा ने कहा कि कहो। उसने कहा मैंने सुना है कि आपके आदेश पर नगर में एक बड़ा हम्माम बनाया गया है। राजा ने कहा कि हां, एक विदेशी मेरे पास आया था और उसने मुझे हम्माम के लाभ बताए तो मैंने हम्माम बनाने का आदेश दे दिया। अबू क़ीर ने कहा कि क्या आप कभी उस हम्माम में गए हैं? उसने उत्तर दिया कि हां, गया हूं। अबू क़ीर ने कहा कि ईश्वर की कृपा हुई कि उस दुष्ट व्यक्ति ने आपको कोई क्षति नहीं पहुंचाई किंतु याद रखिए कि यदि एक बार फिर आप उस हम्माम में गए तो आपकी जान चली जाएगी। राजा ने बड़े आश्चर्य से पूछा कि क्यों? उसने कहा कि वह व्यक्ति अर्थात अबू सीर आपका शत्रु है। उसने वह हम्माम आपकी हत्या के लिए बनाया है। उसकी चाल यह है कि हम्माम में आपको विषाक्त कर दे। उसने एक ऐसी दवा बनाई है जिसमें विष भरा हुआ है। यदि आप हम्माम जाएंगे तो वह आपसे कहेगा कि उस दवा को अपने शरीर पर लगाइये ताकि अधिक स्वच्छ व गोरे हो जाएं। चूंकि वह दवा विषाक्त है इस लिए जैसे ही आप उसे अपने शरीर पर लगाएंगे, वह आपकी मृत्यु का कारण बन जाएगी। उस दुष्ट व्यक्ति ने ईसाइयों के राजा को वचन दिया है कि वह आपकी हत्या कर देगा ताकि वह उसके बच्चों व पत्नी को जेल से रिहा कर दे। मैं भी वहां बंदी रह चुका हूं। एक दिन मैंने उस राजा से कहा कि मुझे विभिन्न रंग बनाने की अनुमति दे। उसकी अनुमति से मैंने रंग बनाए तो वह बहुत प्रसन्न हुआ और मुझसे कहा कि इस सेवा के बदले में तुम क्या चाहते हो? मैंने उससे कहा कि मुझे स्वतंत्र कर दिया जाए। उसने मेरी बात मान ली और मुझे रिहा कर दिया जिसके बाद मैं यात्रा करता हुआ इस नगर तक पहुंच गया। जारी…