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    नामज़े आयात

    नामज़े आयात
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    नामज़े आयात (हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई की नज़र में)

    सवाल 708:  नमाज़ आयात क्या है और शरीयत के एतबार से उस के वाजिब होने के असबाब क्या हैं?
    जवाब:  ये दो रकअत है और हर रकअत में पांच रुकू और दो सज्दे हैं, शरीयत के लिहाज़ से इसके वाजिब होने के असबाब ये हैं:
    सूरज गहन और चाँद गहन चाहे उनके मामूली हिस्से को ही लगे, इसी तरह ज़लज़ला और हर वह ग़ैर मामूली चीज़ जिससे अकसर लोग ख़ौफ़ज़दह हो जायें, जैसे सुर्ख़ स्याह या पीली आंधियां या शदीद तारीकी (अंधेरे), या ज़मीन का धंसवालना, पहाड़ का टूट कर गिरना, बिजली की कड़क और गरज और वह आग जो कभी आसमान में नज़र आती है। सूरज गहन, चाँद गहन और ज़लज़ले के अलावा बाक़ी सब चीज़ों में शर्त है कि आम लोग उनसे ख़ौफ़ज़दह हो जायें लिहाज़ा अगर इनमें से कोई चीज़ ख़ौफ़नाक न हो या उससे बहुत कम लोग ख़ौफ़ज़दह हों तो नमाज़ आयात वाजिब नहीं है।
    सवाल 709:  नमाज़े आयात पढ़ने का तरीक़ा क्या है?
    जवाब:  इसे पढ़ने के कुछ तरीक़े हैं:
    1.  नियत और तकबीरतुल एहराम के बाद हम्द व सूरा पढ़े फिर रुकू में जाये इसके बाद रुकू से सर उठायें और हम्द व सूरा पढ़े और रुकू में जाये, फिर रुकू से बुलन्द होकर हम्द व सूरा पढ़े फिर रुकू बजा लाये, फिर सर उठाये और हम्द व सूरा पढ़े और इसी तरह इस रकत में पांच रुकू अंजाम दे फिर सज्दे में जाये और दो सज्दे अंजाम देने के बाद खड़ा होकर पहली रकत की तरह अमल करे फिर दूसरा सजदा अंजाम दे और इसके बाद तशहुद और सलाम पढ़े।
    2.  नियत और तकबीरतुल हराम के बाद सूरा-ए-हम्द और किसी सूरा की एक आयत पढ़ कर रुकू में जाये फिर रुकू से सर उठाने के बाद उसी सूरा की दूसरी आयत पढ़े और रुकू में जाये, फिर सर उठा कर उसी सूरत की तीसरी आयत पढ़े, पांचवा रुकू इसी तरह बजा लाये यहां तक कि जिस सूरा की एक एक आयत हर रुकू से पहले पढ़ी थी वो तमाम हो जाये इसके बाद पांचवा रुकू अंजाम दे और फिर दो सज्दे बजा लाये फिर खड़ा हो जाये और सूरा-ए-हम्द और किसी सूरा की एक आयत पढ़कर रुकू करे और दूसरी रकअत को भी पहली रकत की तरह बजा लाय और तशहदुल इस्लाम पढ़कर नमाज़ ख़त्म करदे। चुनाचे अगर (इस तरीक़े के मुताबिक़) हर रुकू से पहले किसी रुकू की एक आयत पर इकतेफ़ा करे तो सूरा-ए-हम्द को रकअत के शुरु में एक मर्तबा से ज़्यादा पढ़े।
    3.  ज़िक्र किये गये दोनों तरीक़ों में से एक रकअत को पहले तरीक़े से और दूसरी को दूसरे तरीक़े से बजा लाये।
    4.  वोह सूरा जिस की एक आयत पहले रुकू से पहले क़याम में पढ़ी थी, ऐसे दूसरे, तीसरे या चौथे रुकू से पहले वाले क़याम में ख़त्म कर दे फिर रुकू से सर उठाने के बाद खड़े हो कर सूरा-ए-हम्द और एक दूसरा सूरा या उसकी एक आयत पढ़े। अगर तीसरे या चौथे रुकू से पहले हो और इस सूरत में वाजिब है कि इस सूरा को पांचवे रुकू से पहले मुकम्मल करदे।
    सवाल 710: क्या नमाज़े आयात उसी शख़्स पर वाजिब है जो इस शहर में था जिसमे नमाज़े आयात वाजिब हुई है या हर उस शख़्स पर वाजिब है जिसे इनका इल्म हो गया हो, चाहे वो इस शहर में न हों जिसमें नमाज़े आयत वाजिब हुई है?
    जवाब: नमाज़े आयात उसी शख़्स पर वाजिब है जो उस शहर में हो जिसमें नमाज़े आयात वाजिब हुई है, इसी तरह उस शख़्स पर भी वाजिब है जो इसके नज़दीक वाले शहर में रहता हो, इतना नज़दीक के दोनों को एक शहर कहा जाता हो।
    सवाल 711: अगर ज़लज़ले के वक़्त एक शख़्स बेहोश हो और ज़लज़ला ख़त्म हो जाने के बाद होश में आये तो क्या उस पर भी नमाज़े आयात वाजिब है?
    जवाब: अगर उसे ज़लज़ले के आ जाने की ख़बर न हो यहां तक कि ज़लज़ला आने का वक़्त गुज़र जाये तो उस पर नमाज़े आयात वाजिब नहीं अगर्चे एहतियात ये है कि नमाज़ को बजा लाये।
    सवाल 712: किसी इलाक़े में ज़लज़ला आने के बाद कुछ टाइम के दर्मियान बहुत ही मामूली ज़लज़ले और ज़मीनी झटके आते हैं, इन हालात में नमाज़े आयात का क्या हुक्म है?
    जवाब: हर झटका जिसे ज़लज़ला शुमार किया जाये उसके लिये अलग नमाज़े आयात वाजिब है चाहे शदीद हो या ख़ु़ीफ़ (चाहे झटके तेज़ हों या हलके)
    सवाल 713:  जब ज़लज़ला बताने वाला मरकज़ ऐलान करे के फ़लां इलाक़े में जिसमें हम रहते हैं ज़लज़ले के कई मामलू झटके आये हैं और झटकों की तादाद का भी ज़िक्र करें, लेकिन हमने उन्हें बिल्कुल महसूस न किया हो तो क्या इस सूरत में हमारे ऊपर नमाज़े आयात वाजिब है?
    जवाब: अगर आपने ज़लजले के दर्मियान या इसके फ़ौरन बाद ज़लज़ले को खुद महसूस न किया हो तो आप पर नमाज़े आयात वाजिब नहीं है।